Retail Inflation India: भारत में खुदरा महंगाई को लेकर आने वाले महीनों में थोड़ी चिंता बढ़ सकती है. SBI रिसर्च की हालिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि, अक्टूबर और नवंबर के दौरान खुदरा महंगाई दर कुछ समय के लिए 6 फीसदी की ऊपरी सीमा को पार कर सकती है. हालांकि, राहत की बात यह है कि यह तेजी लंबे समय तक रहने की उम्मीद नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही तक महंगाई घटकर करीब 5 फीसदी के आसपास आ सकती है.
अगस्त में भी बढ़ सकती है महंगाई
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 फीसदी रही थी. अगस्त में इसके बढ़कर करीब 4.7 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. हालांकि, खाद्य पदार्थों की सप्लाई में सुधार होने पर महंगाई पर दबाव कम हो सकता है.
महंगाई में आगे होने वाले बदलाव में मॉनसून की भी अहम भूमिका रहेगी. इस साल मॉनसून की शुरुआत कुछ कमजोर रही थी. जून में बारिश की कमी करीब 40 फीसदी तक पहुंच गई थी. लेकिन जुलाई में सामान्य से ज्यादा बारिश और अगस्त में सामान्य बारिश के चलते यह कमी काफी घट गई है. अब बारिश का घाटा करीब 13 फीसदी रह गया है.
बेहतर सिंचाई से किसानों को मिला सहारा
SBI रिसर्च ने खरीफ फसलों की बुआई के आंकड़ों को भी महंगाई के नजरिए से अहम माना है. प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में बारिश सामान्य से कम रहने के बावजूद खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले सिर्फ करीब 2 फीसदी कम रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसका एक कारण देश में सिंचाई सुविधाओं का पहले के मुकाबले बेहतर होना भी हो सकता है. यानी खेती अब केवल बारिश पर उतनी निर्भर नहीं रह गई है. इससे खाद्यान्न उत्पादन पर मौसम की मार का असर कुछ हद तक कम हो सकता है और आने वाले समय में खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है.
IOD ने अल नीनो का असर किया कम
रिपोर्ट में इंडियन ओशन डिपोल (IOD) की सकारात्मक स्थिति का भी जिक्र किया गया है. SBI रिसर्च के मुताबिक, सकारात्मक IOD अल नीनो के संभावित नकारात्मक असर को कुछ हद तक कम करने में मदद कर रहा है. अगर खेती और खाद्य आपूर्ति बेहतर रहती है तो महंगाई पर भी दबाव कम रह सकता है. यही वजह है कि रिपोर्ट ने वित्त वर्ष 2026-27 की आखिरी तिमाही में महंगाई के मौजूदा अनुमानों से भी नीचे रहने की संभावना जताई है.
RBI जल्दबाजी में नहीं करेगा ब्याज दरों पर फैसला
महंगाई के आंकड़ों पर रिजर्व बैंक की भी नजर बनी हुई है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति को लेकर संकेत दिया है कि ब्याज दरों में बदलाव से पहले महंगाई के रुख को और स्पष्ट तौर पर समझना जरूरी है. मौद्रिक नीति समिति की बैठक के मिनट्स के मुताबिक, महंगाई में सामान्य स्थिति लौटने के संकेत दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में केंद्रीय बैंक भविष्य की नीति तय करने से पहले नए आंकड़ों और आर्थिक संकेतों का इंतजार करना चाहता है.
बाजार में भी उठाए जा रहे कदम
SBI रिसर्च ने RBI की हालिया रणनीति पर भी चर्चा की है. रिपोर्ट के मुताबिक, वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑपरेशन और FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने जैसे कदम केवल बयानों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. इनसे बाजार में पैसे की उपलब्धता और वित्तीय परिस्थितियों को संतुलित करने में मदद मिल सकती है. वहीं, वैश्विक बाजारों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े कदमों का असर भी दिखाई दे रहा है. सरकारी लोन की पुनर्खरीद और बॉन्ड यील्ड को बैलेंस करने की कोशिशों से लंबी अवधि की यील्ड में नरमी आई है.
कुल मिलाकर, आने वाले महीनों में महंगाई कुछ समय के लिए बढ़ सकती है, लेकिन बेहतर खाद्य आपूर्ति, सुधरी सिंचाई और अनुकूल मौसम परिस्थितियां इसे लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने से रोक सकती हैं.