Kharif Crop Sowing 2026: देश में खरीफ फसलों की बुवाई अब लगभग पूरी होने की ओर बढ़ रही है. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 14 अगस्त तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 1,016.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. यह सामान्य सीजन के 1,104.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का करीब 92 फीसदी है. पिछले साल इसी समय 1,037.52 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी. इस तरह पिछले साल के मुकाबले बुवाई का अंतर अब घटकर 1 फीसदी से भी कम रह गया है. हालांकि, अगस्त के दूसरे सप्ताह में बुवाई की रफ्तार थोड़ी धीमी रही. 8 से 14 अगस्त के दौरान किसानों ने करीब 48 लाख हेक्टेयर में नई बुवाई की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 52 लाख हेक्टेयर था. इसकी बड़ी वजह इस दौरान सामान्य से कम बारिश बताई जा रही है.
धान की बुवाई में सुधार, लेकिन रकबा अभी पीछे
खरीफ की सबसे प्रमुख फसल धान की बुवाई और रोपाई पर सभी की नजर है. 14 अगस्त तक धान का रकबा 379.07 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 393.44 लाख हेक्टेयर से करीब 3.7 फीसदी कम है. हालांकि, 7 अगस्त तक यह अंतर 4.4 फीसदी था. यानी पिछले एक सप्ताह में धान की रोपाई की रफ्तार बेहतर हुई है.
असम, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में धान का रकबा बढ़ा है. दूसरी ओर कर्नाटक, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार में पिछले साल की तुलना में धान का रकबा कम हुआ है. सरकार ने खरीफ 2026 में 12.315 करोड़ टन चावल उत्पादन का लक्ष्य रखा है. प्रमुख राज्यों में फसल क्षेत्र बढ़ने और रोपाई में सुधार को देखते हुए फिलहाल उत्पादन में बड़ी कमी की आशंका नहीं जताई जा रही है.
दलहन और तिलहन का रकबा भी बदला
दलहन की बुवाई 14 अगस्त तक 108.14 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले साल यह 108.49 लाख हेक्टेयर थी. तिलहन का रकबा 184.46 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 185.36 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है. दलहन में अरहर का रकबा 40.31 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल से करीब 4 फीसदी कम है. मूंग की बुवाई भी घटी है. हालांकि, उड़द का रकबा बढ़कर 23.52 लाख हेक्टेयर हो गया है. तिलहन में सोयाबीन का रकबा घटकर 120.84 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि मूंगफली की बुवाई बढ़कर 48.03 लाख हेक्टेयर हो गई है. सरकार ने खरीफ सीजन में कुल 2.92 करोड़ टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा है.
| फसल | 2025 में बुवाई (लाख हेक्टेयर) | 2026 में बुवाई (लाख हेक्टेयर) | बदलाव (फीसदी) |
|---|---|---|---|
| धान | 393.44 | 379.07 | -3.7 |
| दलहन | 108.49 | 108.14 | -0.3 |
| श्री अन्न व मोटे अनाज | 177.13 | 172.96 | -2.4 |
| तिलहन | 185.36 | 184.46 | -0.5 |
| तिलहन | 58.62 | 58.31 | -0.9 |
| कपास | 108.27 | 107.30 | -0.5 |
| सभी फसलें | 1,037.52 | 1,016.57 | -0.9 |
नोट: आंकड़े 14 अगस्त तक के हैं. सोर्स: कृषि मंत्रालय.
मोटे अनाज और मक्का की बुवाई पीछे
मोटे और पोषक अनाजों का कुल रकबा 172.96 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 177.13 लाख हेक्टेयर से 2.4 फीसदी कम है. ज्वार और बाजरा की बुवाई बढ़ी है, लेकिन रागी और मक्का का रकबा घटा है. मक्का की बुवाई 88.39 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले साल यह 92.06 लाख हेक्टेयर थी. ऐसे में मक्का समेत कुछ फसलों के रकबे में आई कमी पर भी नजर रखनी होगी.
गन्ने का रकबा लगभग स्थिर
14 अगस्त तक गन्ने का रकबा 58.31 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी समय यह 58.62 लाख हेक्टेयर था. उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा बढ़ा है, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तमिलनाडु और पंजाब में इसमें कमी दर्ज की गई है.
अब बारिश और फसल की हालत होगी सबसे अहम
खरीफ सीजन में अब सिर्फ बुवाई का आंकड़ा ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि खेतों में खड़ी फसल की स्थिति भी अहम होगी. मौसम विभाग के मुताबिक 1 जून से 17 अगस्त के बीच देश में बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम रही है. अगस्त के पहले 17 दिनों में भी बारिश 15 फीसदी कम दर्ज की गई. ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का वितरण, मिट्टी में नमी और किसानों को समय पर मिलने वाली कृषि सलाह फसल की पैदावार तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी. सरकार ने खरीफ 2026 के लिए कुल 17.616 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. अब इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बुवाई के साथ-साथ फसल की निगरानी और समय पर जरूरी उपाय सबसे महत्वपूर्ण होंगे.