30 लाख की सरकारी मदद ने बदली किस्मत, अब मदन सिंह कमा रहे 1 लाख रुपये महीना

Success Story: बागपत के 8वीं पास मदन सिंह ने मेहनत और सरकारी सहयोग से सफलता की नई कहानी लिखी. NLM योजना से 30 लाख रुपये की सब्सिडी और बैंक सहयोग लेकर 60 लाख रुपये का प्रोजेक्ट खड़ा किया. लार्ज वाइट नस्ल पालन से अब करीब 1 लाख रुपये मासिक आय और रोजगार मिल रहा है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 11 Aug, 2026 | 05:58 PM

Success Story: बागपत के सहड़भर गांव के रहने वाले मदन सिंह ने यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए बड़ी डिग्री नहीं, बल्कि सही जानकारी, मेहनत और दृढ़ संकल्प जरूरी है. महज 8वीं तक पढ़ाई करने वाले मदन सिंह ने पशुपालन को अपनी आमदनी का मजबूत साधन बनाने का फैसला किया. शुरुआत आसान नहीं रही, लेकिन उन्होंने दोबारा प्रयास किया और सरकारी योजना की मदद से अपने सपने को हकीकत में बदल दिया. आज वे लार्ज वाइट नस्ल का पालन कर हर महीने करीब 1 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं. इतना ही नहीं, उनके पशुपालन व्यवसाय से गांव के 2 से 5 स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है.

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से मिली NLM योजना की जानकारी

उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार,  मदन सिंह को पशुपालन व्यवसाय को बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन  (NLM) योजना की जानकारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी से मिली. विभाग की ओर से उन्हें योजना के प्रावधानों और जरूरी दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी दी गई. इसके बाद उन्होंने योजना के तहत पशुपालन इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया. सरकारी सहयोग और बैंक की मदद को अवसर मानते हुए मदन सिंह ने करीब 60 लाख रुपये के निवेश का प्रस्ताव तैयार किया. इस प्रोजेक्ट में 10 लाख रुपये उनकी स्वयं की हिस्सेदारी रही, जबकि 20 लाख रुपये बैंक लोन और 30 लाख रुपये NLM योजना के तहत सब्सिडी के रूप में सहयोग मिला. इस आर्थिक सहयोग ने उनके लिए बड़े स्तर पर पशुपालन शुरू करने का रास्ता खोल दिया.

30 लाख रुपये की सब्सिडी से मजबूत हुई पशुपालन इकाई

मदन सिंह की सफलता में सरकारी योजना का सहयोग  अहम साबित हुआ. NLM योजना के तहत मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी ने उनके निवेश का बोझ कम किया और पशुपालन इकाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद की. बैंक से मिले सहयोग और अपनी पूंजी को जोड़कर उन्होंने करीब 60 लाख रुपये की परियोजना को जमीन पर उतारा. लार्ज वाइट नस्ल के पशुओं का पालन शुरू करने के साथ ही उन्होंने पशुओं की देखभाल, खान-पान और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया. लगातार मेहनत और बेहतर प्रबंधन से उनकी इकाई धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी. आज उनका यह प्रयास दूसरे ग्रामीण युवाओं और पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है.

हर महीने करीब 1 लाख रुपये की आय, गांव में मिला रोजगार

मदन सिंह की मेहनत का परिणाम अब उनकी आमदनी में साफ दिखाई देता है. लार्ज वाइट नस्ल पालन से वे करीब 1 लाख रुपये प्रति माह की आय अर्जित कर रहे हैं. उनकी इकाई सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं कर रही, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का माध्यम  भी बनी है. उनके पशुपालन व्यवसाय से 2 से 5 स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल रहा है. यानी सरकारी योजना से मिली सहायता ने एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ दूसरे ग्रामीणों के लिए भी काम के अवसर पैदा किए हैं.

प्रयास, सफलता का विश्वास बनी मिसाल

मदन सिंह की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि किसी भी काम में पहली कोशिश सफल न हो तो प्रयास रोकना नहीं चाहिए. दृढ़ संकल्प से पुन: प्रयास, सफलता का विश्वास उनके सफर की पहचान बन गया है. 8वीं पास मदन सिंह ने सरकारी योजना की जानकारी हासिल की, विभागीय मार्गदर्शन लिया, बैंक सहयोग जुटाया और करीब 60 लाख रुपये का प्रोजेक्ट खड़ा कर अपनी मेहनत को सफल व्यवसाय में बदल दिया. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग  की इस सफलता की कहानी यह भी दिखाती है कि यदि सरकारी योजनाओं की सही जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचे और लाभार्थी उसका सही उपयोग करें, तो पशुपालन गांवों में आय और रोजगार दोनों का मजबूत जरिया बन सकता है. ग्राम सहड़भर, विकासखण्ड पिलना, तहसील एवं जनपद बागपत के मदन सिंह आज इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल हैं.

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