Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों ने सरकार पर मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) को कमजोर करने का आरोप लगाया है. इस योजना के तहत किसानों से ग्रेड-C सेब सरकार की तय कीमत पर खरीदे जाते हैं. लेकिन किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने 2023 से इस योजना का बजट काफी कम कर दिया है. अब राज्य सरकार के कदमों से भी उनकी चिंता बढ़ गई है. कई किसानों को 100 से ज्यादा पेटी सेब MIS के तहत बेचने पर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं.
अधिकारियों की जांच में कुछ किसानों के बेचे गए ग्रेड-C सेब की मात्रा उनकी जमीन के रकबे और संभावित उत्पादन से मेल नहीं खाई. किसानों से इस अंतर की वजह बताने और जमीन के मालिकाना हक व फसल उत्पादन से जुड़े दस्तावेज जमा करने को कहा गया है. संयुक्त किसान मंच के सह-संयोजक संजय चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार MIS के तहत सेब खरीद की सीमा तय करने और योजना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. वहीं, सरकार का कहना है कि इस जांच का मकसद खरीद प्रक्रिया में खामियों को दूर करना और इसे ज्यादा पारदर्शी बनाना है.
MIS में रिकॉर्ड खरीद से उठे सवाल
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, MIS के तहत बेचे गए ग्रेड-C सेब की मात्रा का किसानों की जमीन के रकबे से मिलान किया जा रहा है. पिछले साल हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉरपोरेशन (HPMC) ने इस योजना के तहत करीब 1 लाख टन सेब खरीदे थे, जिसकी कीमत लगभग 120 करोड़ रुपये थी. रिकॉर्ड खरीद के बाद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे थे. इसके बाद सरकार ने 100 से ज्यादा पेटी सेब बेचने वाले किसानों की जमीन और उत्पादन की जांच के लिए SDM की अध्यक्षता में समितियां गठित की हैं.
45 हजार किसानों ने बेचे सेब
MIS के तहत करीब 45 हजार किसानों ने सेब बेचे हैं. इनमें लगभग 7 हजार किसानों ने 100 से ज्यादा पेटी सेब बेचे. हालांकि, सरकार का कहना है कि इन सभी किसानों को नोटिस नहीं दिया गया है. केवल उन्हीं किसानों को नोटिस भेजे गए हैं, जिनके मामले में जांच समिति को जमीन के रकबे की तुलना में ग्रेड-C सेब की मात्रा ज्यादा लगी. योजना के तहत माना जाता है कि किसान की कुल फसल में ग्रेड-C सेब की हिस्सेदारी अधिकतम 25 फीसदी हो सकती है. हालांकि, संयुक्त किसान मंच के सह-संयोजक संजय चौहान ने इस अनुमान पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ओलावृष्टि और फसल में बीमारियों का असर बढ़ा है. इस साल कुछ इलाकों में ओलावृष्टि से 70-80 फीसदी तक फसल खराब हुई है. ऐसे में किसानों की पूरी खराब या कम गुणवत्ता वाली फसल की खरीद कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है.
खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी
संयुक्त किसान मंच के सह-संयोजक संजय चौहान ने कहा कि सेब खरीद प्रक्रिया में अगर कोई गड़बड़ी है तो उसे दूर किया जाना चाहिए, लेकिन इससे MIS योजना कमजोर नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि खरीद केंद्रों पर कागजी कार्रवाई सरकार की ओर से नियुक्त कर्मचारियों द्वारा की जाती है, किसानों द्वारा नहीं. चौहान ने कहा कि गड़बड़ी में शामिल किसी भी व्यक्ति, चाहे वह खरीद केंद्र का एजेंट हो या किसान, के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही MIS को मजबूत किया जाना जरूरी है, क्योंकि यह खुले बाजार में सेब की कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद करती है.