World Elephant Day: धरती को कार्बन खतरे से बचा रहे हाथी, क्लाइमेट हीरो और इकोसिस्टम इंजीनियर नाम मिला

World Elephant Day 2026 : हाथी केवल जंगल की शान नहीं हैं, बल्कि विज्ञान उन्हें इकोसिस्टम इंजीनियर और क्लाइमेट हीरो मानता है. एक अकेला वन हाथी लगभग 250 एकड़ जंगल की कार्बन कैप्चर क्षमता को बढ़ा सकता है, जो 2047 कारों के सालाना प्रदूषण उत्सर्जन को वातावरण से हटाने के बराबर है.

Kisan India
नोएडा | Published: 11 Aug, 2026 | 01:58 PM

तेजी से बढ़ रहे कार्बन उत्सर्जन से जलवायु बदलाव, विपरीत मौसम और क्लाइमेट को खतरा बढ़ रहा है. दुनियाभर में इस कार्बन उत्सर्जन को कम करने में हाथी मदद कर रहे हैं. आज 12 अगस्त 2026 को दुनिया विश्व हाथी दिवस मना रही है. हाथी जंगलों में कार्बन उत्सर्जन सोखने वाले पौधों को बढ़ने में मददगार करता है, क्योंकि वह इन पौधों को बढ़ने में बाधा बनने वाले पौधों और झाड़ को खा जाते हैं. विशेषज्ञ रिपोर्ट में कहा गया है कि हाथी इस गतिविधि से 2,047 कारों के सालाना कार्बन उत्सर्जन को वातावरण से हटाने के बराबर माना गया है. वहीं, जंगलों में दूर-दूर तक विचरण करते समय हाथी अपने मल से बीजों को एक से दूसरी जगह फैलाते हैं जो खाद बनकर प्रकृति विस्तार में मदद करती है. इसलिए हाथियों को क्लाइमेट हीरो और इकोसिस्टम का इंजीनियर भी कहा जाता है.

हाथियों का अस्तित्व मिटा तो जलवायु संतुलन बिगड़ जाएगा

12 अगस्त 2012 को पहली बार विश्व हाथी दिवस आधिकारिक तौर पर कनाडाई फिल्म निर्माता पेट्रीशिया सिम्स और थाईलैंड के ‘एलिफेंट रीइंट्रोडक्शन फाउंडेशन’ की ओर से शुरू किया गया था. इस साल इस दिवस का मूल उद्देश्य हाथियों के शिकार और मानव-हाथी संघर्ष को रोकना है. जीव वैज्ञानिक कहते हैं कि हाथियों का अस्तित्व मिटा, तो हमारी पृथ्वी का जलवायु संतुलन भी खतरे में पड़ सकता है.

कार्बन सोखने वाले पौधों को बढ़ावा देने में मददगार

हाथी केवल जंगल की शान नहीं हैं, बल्कि विज्ञान उन्हें ‘इकोसिस्टम इंजीनियर’ और ‘क्लाइमेट हीरो’ मानता है. एक अकेला वन हाथी लगभग 250 एकड़ जंगल की कार्बन कैप्चर क्षमता को बढ़ा सकता है, जो 2,047 कारों के वार्षिक उत्सर्जन को वातावरण से हटाने के बराबर है. आर्थिक दृष्टि से एक हाथी द्वारा प्रदान की जाने वाली कार्बन कैप्चर सेवा का मूल्य 1.75 मिलियन डॉलर तक आंका गया है. जब हाथी जंगल में घूमते हैं, तो वे कम कार्बन घनत्व वाले छोटे पेड़ों को खा जाते हैं और उन्हें रौंद देते हैं, जिससे बड़े और उच्च कार्बन घनत्व वाले पेड़ों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और धूप मिलती है.

अपने मल से बीज और खाद फैलाकर प्रकृति विस्तार कर रहे

अपने 18 से 22 महीने के लंबे गर्भकाल (जो भूमि स्तनधारियों में सबसे लंबा है) के बाद जब वे बच्चों को जन्म देते हैं, तो हाथियों का झुंड उन्हें मीलों दूर तक ले जाता है. इस यात्रा में वे अपने मल के जरिए बड़े पेड़ों के बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे जंगलों का लगातार विस्तार होता रहता है. विडंबना यह है कि कई रिपोर्ट में मौजूद जानकारी के अनुसार दांतों के अवैध व्यापार के कारण हर दिन लगभग 50 अफ्रीकी हाथियों की हत्या कर दी जाती है.

दुनियाभर के 50 फीसदी हाथी अकेले भारत में

वैश्विक एशियाई हाथियों की करीब 50 प्रतिशत से अधिक आबादी भारत में पाई जाती है, इसलिए भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारत सरकार के ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट’ (1992) के तहत देश में 33 हाथी रिजर्व और 150 से अधिक हाथी कॉरिडोर स्थापित किए गए हैं. भारत की पहली डीएनए-आधारित वैज्ञानिक हाथी गणना (अक्टूबर 2025 में जारी रिपोर्ट) के अनुसार, देश में जंगली हाथियों की कुल संख्या 22,446 दर्ज की गई है. जीव वैज्ञानिक कहते हैं कि हाथियों का अस्तित्व मिटा, तो हमारी पृथ्वी का जलवायु संतुलन भी खतरे में पड़ सकता है.

मधुमक्खी के छत्तों और मिर्च की बाड़ से हाथी मानव टकराव रोका जा रहा

मानव हाथी टकराव की घटनाएं रोकने के लिए रचनात्मक कोशिशें की जा रही हैं. इसके तहत केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में मधुमक्खी के छत्तों और मिर्च की बाड़ का रचनात्मक उपयोग किया जा रहा है, ताकि हाथियों को सुरक्षित तरीके से मानव बस्तियों से दूर रखा जा सके. वहीं, भारतीय रेलवे ने ‘गजराज सिस्टम’ नाम की एआई-आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू की है. करीब 181 करोड़ रुपए की लागत वाला यह सिस्टम पटरियों के नीचे बिछे ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए हाथियों के पैरों के कंपन को 99.5 फीसदी सटीकता के साथ पहचान कर ट्रेन चालकों को अलर्ट कर देता है.

बुद्धिमान पशुओं में शामिल है हाथी

हाथी अपने पैरों और सूंड के जरिए धरती में 20 हर्ज से भी कम फ्रीक्वेंसी वाले इंफ्रासाउंड पैदा करते हैं. इन्हें सेस्मिक वाइब्रेशन कहा जाता है. ये कंपन 32 किलोमीटर दूर तक महसूस किए जा सकते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक हाथियों के पैरों में ‘पैसिनियन कॉर्पसल्स’ नाम की विशेष कोशिकाएं होती हैं. ये कोशिकाएं जमीन के कंपनों को पकड़कर हड्डियों के रास्ते सीधे कानों तक पहुंचा देती हैं. सिर्फ यही नहीं, इनकी सूंड में 40,000 से अधिक मांसपेशियां होती हैं, जो एक मानव शरीर की कुल मांसपेशियों से कहीं अधिक हैं, और वे आइने में खुद को पहचानने की दुर्लभ क्षमता भी रखते हैं. पृथ्वी के इन अद्भुत और बेहद बुद्धिमान जीवों के संरक्षण का वैश्विक संदेश देने के लिए हर साल 12 अगस्त को ‘विश्व हाथी दिवस’ मनाया जाता है.

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