El Nino Impact: इस साल खरीफ फसलों को लेकर किसानों के लिए फिलहाल राहत की खबर है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अल नीनो की वजह से खरीफ उत्पादन पर कोई बड़ा असर दिखाई नहीं दे रहा है. कुछ इलाकों में बारिश कम जरूर हुई है, लेकिन देश के ज्यादातर हिस्सों में फसलों को जरूरत के हिसाब से पानी मिला है. सरकार का मानना है कि, आने वाले दिनों में बुवाई का अंतर भी और कम हो सकता है.
262 से घटकर करीब 100 रह गए संवेदनशील जिले
कृषि मंत्री ने ICAR के एक कार्यक्रम के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, देश में कम बारिश की वजह से प्रभावित माने जा रहे जिलों की संख्या अब काफी कम हुई है. पहले ऐसे जिलों की संख्या 262 थी, जो अब घटकर करीब 100 रह गई है. उनके मुताबिक, ज्यादातर इलाकों में खरीफ फसलों के लिए बारिश पर्याप्त रही है. उन्होंने कहा कि कुछ खास क्षेत्रों में स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन पूरे देश को देखें तो अल नीनो का बड़ा असर अभी नजर नहीं आ रहा है. यही वजह है कि खरीफ उत्पादन को लेकर फिलहाल ज्यादा चिंता की स्थिति नहीं है.
बुवाई का अंतर लगातार हो रहा कम
खरीफ फसलों की बुवाई में जो कमी कुछ समय पहले दिखाई दे रही थी, उसमें भी सुधार हुआ है. कृषि मंत्री के अनुसार, पिछले सप्ताह बुवाई का अंतर करीब 11 प्रतिशत था, लेकिन अब यह कम हो गया है. आने वाले दिनों में इसमें और सुधार की उम्मीद है. उन्होंने यह भी कहा कि खेती और मौसम की स्थिति लगातार बदलती रहती है, इसलिए सरकार को इसकी नियमित समीक्षा करनी होगी. इसका मतलब है कि बारिश, बुवाई और फसल की स्थिति पर आगे भी नजर रखी जाएगी.
कर्नाटक और तेलंगाना में पानी की चिंता
कुछ राज्यों में कम बारिश की वजह से पानी का संकट जरूर बना हुआ है. खासकर कर्नाटक और तेलंगाना में जल संकट की स्थिति सामने आई है. हालांकि, कृषि मंत्रालय का मानना है कि इन राज्यों की समस्या का असर पूरे देश के खरीफ उत्पादन पर बड़ा नहीं पड़ेगा. मंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर बुवाई अच्छी हुई है. कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर असर हो सकता है, लेकिन अभी देशभर में खरीफ उत्पादन पर किसी बड़े नुकसान के संकेत नहीं हैं.
14 अगस्त तक 92 प्रतिशत बुवाई पूरी
आंकड़ों के मुताबिक, 14 अगस्त तक खरीफ फसलों की बुवाई औसत क्षेत्र के करीब 92 प्रतिशत हिस्से में पूरी हो चुकी थी. इस दौरान कुल 1,016.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई, जो पिछले साल की तुलना में करीब 2 प्रतिशत कम है. इस बार जून में मॉनसून की शुरुआत के बाद बुवाई की रफ्तार कुछ धीमी रही. इसकी एक वजह मौसम की अनिश्चितता और अल नीनो को लेकर बनी चिंता भी रही. हालांकि, बाद में कई इलाकों में बारिश होने से बुवाई की स्थिति में सुधार आया.
पूर्व और पूर्वोत्तर में बारिश की कमी ज्यादा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त तक देश में कुल मॉनसून बारिश सामान्य से 12 प्रतिशत कम रही. पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में कमी करीब 26 प्रतिशत रही. दक्षिण प्रायद्वीपीय हिस्से में 19 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.
अगले सत्र में आएगा बीज और कीटनाशक विधेयक
कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार से जुड़े बीज विधेयक और कीटनाशक प्रबंधन विधेयक पर काम कर रही है. दोनों विधेयकों के मसौदे तैयार हैं और इन्हें अगले संसद सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है. इसके अलावा, पूसा में आयोजित कार्यक्रम में कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों को ‘शक्ति की सप्त धारा’ के तहत शपथ दिलाई गई. इस पहल का लक्ष्य कृषि और खाद्य उत्पादन को मजबूत करना, खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देना और किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ना है. सरकार 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दोनों मंत्रालयों का रोडमैप भी तैयार कर रही है.