Seeds Bill: नए कानून में सख्त सजा का वादा, पर नुकसान की भरपाई का रास्ता मुश्किल, जानें कैसे

अगर कोई कंपनी जानबूझकर खराब या नकली बीज बेचती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मौजूदा कानून में जहां जुर्माना बहुत कम है, वहीं नए बिल में इसे बढ़ाकर लाखों रुपये करने का प्रस्ताव है. गंभीर मामलों में जेल की सजा का भी प्रावधान रखा गया है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 17 Jan, 2026 | 08:20 AM

Seeds Bill: देश के कई हिस्सों में किसान हर साल बीज पर भरोसा करके अपनी मेहनत और पूंजी लगाते हैं, लेकिन जब बीज ही नकली या घटिया निकल जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाती है. ऐसे मामलों में किसान लंबे समय से सरकार से सीधे मुआवजे की मांग करते रहे हैं. अब नए ड्राफ्ट सीड्स बिल को लेकर यह साफ हो गया है कि नकली या खराब बीज से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को उपभोक्ता फोरम का दरवाजा ही खटखटाना होगा.

ड्राफ्ट सीड्स बिल में मुआवजे का प्रावधान नहीं

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि प्रस्तावित सीड्स बिल में किसानों को सीधे मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है. अगर किसी किसान को नकली या घटिया बीज के कारण नुकसान होता है, तो उसे उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत शिकायत दर्ज करनी होगी. सरकार का कहना है कि इसी कानून के जरिए किसानों को न्याय और मुआवजा मिल सकेगा.

सरकार या कंपनी, जिम्मेदारी किसकी?

इस मुद्दे पर जब यह सवाल उठा कि फसल खराब होने पर मुआवजा कौन देगा सरकार या बीज कंपनी तो केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ जवाब देने से बचते हुए कहा कि उपभोक्ता कानून को और प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा. उनका कहना था कि इसी व्यवस्था के जरिए किसानों के हितों की रक्षा की जाएगी.

बीज की कीमतों पर कब होगा नियंत्रण

बीजों की कीमतों को लेकर भी सरकार का रुख स्पष्ट किया गया है. कृषि मंत्री ने कहा कि आम तौर पर बीज पैकेट पर खुदरा कीमत छपी होनी चाहिए और कंपनियां उसी हिसाब से बिक्री करें. हालांकि अगर किसी कंपनी के खिलाफ यह शिकायत आती है कि वह असामान्य तरीके से कीमतें बढ़ा रही है, तो ऐसी खास परिस्थितियों में सरकार हस्तक्षेप कर सकती है. फिलहाल बीटी कॉटन को छोड़कर अन्य बीजों की कीमतें नियंत्रित नहीं की जातीं.

बीज की पहचान और ट्रेसबिलिटी पर जोर

नए सीड्स बिल में बीज की पहचान और ट्रेसबिलिटी को सबसे अहम बदलाव बताया जा रहा है. मंत्री ने कहा कि अभी किसानों को यह तक पता नहीं होता कि बीज कहां का है और कहां तैयार किया गया है. नए कानून के तहत हर बीज पैकेट पर क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करते ही बीज का स्रोत सामने आ जाएगा. इससे घटिया बीज बाजार में आने से पहले ही पकड़े जा सकेंगे.

पारंपरिक बीजों को लेकर फैली गलतफहमी

सरकार ने यह भी साफ किया है कि नए कानून से पारंपरिक बीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. किसान आज भी एक-दूसरे को बीज दे सकेंगे और बदले में फसल का हिस्सा लेने की पुरानी परंपरा जारी रहेगी. बीज कंपनियों और बड़े स्तर पर बीज बेचने वालों का पंजीकरण जरूर अनिवार्य होगा.

सख्त सजा का प्रावधान

अगर कोई कंपनी जानबूझकर खराब या नकली बीज बेचती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मौजूदा कानून में जहां जुर्माना बहुत कम है, वहीं नए बिल में इसे बढ़ाकर लाखों रुपये करने का प्रस्ताव है. गंभीर मामलों में जेल की सजा का भी प्रावधान रखा गया है.

किसानों में मिली-जुली प्रतिक्रिया

एक तरफ सरकार पारदर्शिता और सख्त नियमों की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसान संगठन यह सवाल उठा रहे हैं कि जब नुकसान होता है तो उन्हें सरकारी स्तर पर तुरंत राहत क्यों नहीं मिलती. फिलहाल साफ है कि नकली बीज से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को कानूनी लड़ाई ही लड़नी पड़ेगी.

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