Monsoon 2026: देश में मॉनसून की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट (Skymet) ने अपने ताजा अनुमान में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर पहले के मुकाबले ज्यादा खराब तस्वीर पेश की है. एजेंसी ने पूरे मॉनसून सीजन में बारिश सामान्य से काफी कम रहने और सूखे का खतरा बढ़ने की बात कही है. कमजोर बारिश का असर खेती, जलाशयों और आगे चलकर खाद्य महंगाई पर भी पड़ सकता है.
Skymet ने घटाया बारिश का अनुमान
स्काईमेट ने सोमवार को अपने नए अनुमान में कहा है कि, इस साल मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है. एजेंसी के मुताबिक, इस साल कुल बारिश सामान्य बारिश के औसत की करीब 85 फीसदी ही रह सकती है. साथ ही, स्काईमेट ने सूखे की आशंका 70 फीसदी जताई है. इससे पहले अप्रैल में स्काईमेट ने अनुमान लगाया था कि इस साल मॉनसून की बारिश सामान्य बारिश के औसत की 94 फीसदी रह सकती है. यानी कुछ ही महीनों में एजेंसी ने अपने अनुमान में करीब 9 फीसदी की बड़ी कटौती कर दी है. स्काईमेट के मुताबिक, मॉनसून पर अल नीनो के मजबूत होने का असर पड़ रहा है. इसकी वजह से इस साल बारिश सामान्य से काफी कम रहने की आशंका बढ़ गई है.
अगस्त और सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान
Skymet के मुताबिक अगस्त के बाकी दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण समान नहीं रहेगा. अगस्त का महीना LPA के मुकाबले करीब 16 फीसदी कम बारिश के साथ खत्म हो सकता है. सितंबर को लेकर भी राहत की उम्मीद कम है. एजेंसी ने इस महीने बारिश सामान्य से करीब 20 फीसदी कम रहने का अनुमान जताया है. कमजोर हिंद महासागर द्विध्रुव यानी IOD और मजबूत होता अल नीनो बारिश की कमी को और बढ़ा सकते हैं.
IMD का अनुमान भी चिंता बढ़ाता है
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने अप्रैल में इस साल मॉनसून की बारिश 92 फीसदी LPA रहने का अनुमान लगाया था. जून में विभाग ने इसे घटाकर 90 फीसदी कर दिया और कमजोर मॉनसून की 60 फीसदी संभावना जताई. हालांकि, IMD ने अभी पूरे सीजन के लिए Skymet के 85 फीसदी वाले अनुमान पर कोई टिप्पणी नहीं की है. विभाग का कहना है कि, मॉनसून को लेकर नियमित अपडेट जारी किए जा रहे हैं और अगस्त के अंत तक एक और अपडेट दिया जाएगा.
17 अगस्त तक 13 फीसदी बारिश की कमी
देश में अभी तक बारिश का आंकड़ा भी चिंता पैदा कर रहा है. 17 अगस्त तक भारत में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई है. 1 जून से 17 अगस्त के बीच देश में 518.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 596.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी. हालांकि जुलाई में बारिश की स्थिति में कुछ सुधार हुआ था. जून के अंत में बारिश की कमी 40 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो 31 जुलाई तक घटकर 13 फीसदी रह गई. लेकिन अगस्त में यह कमी करीब 11-13 फीसदी के बीच बनी हुई है.
अल नीनो बन रहा बड़ी चिंता
Skymet के मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन सिंह के मुताबिक, अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है और इसका मॉनसून पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. उनके अनुसार सितंबर की शुरुआत में अल नीनो के मजबूत से बहुत मजबूत स्थिति में जाने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो मॉनसून की बाकी अवधि में बारिश पर और दबाव पड़ सकता है. हालांकि, IOD के सकारात्मक होने की संभावना भी जताई गई है, लेकिन इसके समय और असर को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है.
खेती पर पड़ सकता है सीधा असर
कम बारिश का सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ने की आशंका है. विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के 71.7 फीसदी तहसील यानी 4,562 में 10 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी है. करीब 72 फीसदी तहसीलों में दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं. खरीफ की अरहर और उड़द जैसी दालों के साथ सोयाबीन जैसी तिलहन फसलों पर इसका असर पड़ सकता है. वहीं मक्का और धान की पैदावार भी प्रभावित होने का खतरा है. कम बारिश से जलाशयों का स्तर और मिट्टी में नमी घटने पर आने वाली रबी फसलों, खासकर गेहूं, पर भी असर पड़ सकता है.
ऐसे में मॉनसून की कमजोर स्थिति सिर्फ बारिश के आंकड़ों तक सीमित नहीं है. अगर आने वाले हफ्तों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो किसानों की आय, फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है.