दालों के आयात में बड़ा उलटफेर! अरहर-मसूर की आवक बढ़ी, चने के आयात में 45 फीसदी की भारी गिरावट

Pulses Import: जनवरी-जून 2026 के दौरान भारत का कुल दाल आयात 1.46 फीसदी घटकर 31.80 लाख टन रहा. हालांकि, अरहर, मसूर और पीली मटर के आयात में बढ़ोतरी हुई, जबकि चना और उड़द की विदेशी आवक कम हुई. मसूर का आयात 51.58 फीसदी और अरहर का 43.34 फीसदी बढ़ा.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 18 Aug, 2026 | 01:29 PM

Pulses Import India 2026: भारत में दालों की घरेलू जरूरत और कीमतों को देखते हुए विदेशों से होने वाले आयात के आंकड़ों में इस साल थोड़ा बदलाव देखने को मिला है. जनवरी से जून 2026 के बीच देश में कुल 31.80 लाख टन दालों का आयात हुआ. यह पिछले साल की इसी अवधि के 32.27 लाख टन के मुकाबले करीब 1.46 फीसदी कम है. कुल आयात में मामूली गिरावट के बावजूद सभी दालों की तस्वीर एक जैसी नहीं रही. जहां चना और उड़द का आयात घटा, वहीं अरहर, मसूर और पीली मटर की विदेशों से आवक बढ़ी है. इससे घरेलू बाजार में दालों की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.

अरहर के आयात में 43 फीसदी से ज्यादा उछाल

इंडिया पल्सेस एंड ग्रेंस एसोसिएशन (IPGA) के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच अरहर का आयात 5.05 लाख टन से ज्यादा रहा. पिछले साल की तुलना में इसमें 43.34 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अफ्रीकी देश इस दौरान भारत को अरहर भेजने में सबसे आगे रहे. मोजाम्बिक भारत को अरहर भेजने वाला सबसे बड़ा देश रहा. इसके बाद म्यांमार और तंजानिया का स्थान रहा.

देश अरहर आयात
मोजाम्बिक 1.83 लाख टन से ज्यादा
म्यांमार 1.23 लाख टन से ज्यादा
तंजानिया 1.01 लाख टन से ज्यादा
सूडान करीब 49,049 टन

नोट: सोर्स – इंडिया पल्सेस एंड ग्रेंस एसोसिएशन (आईपीजीए)

उड़द का आयात 19 फीसदी घटा

उड़द के आयात में इसके उलट गिरावट देखने को मिली. साल की पहली छमाही में भारत ने पिछले साल के मुकाबले करीब 19 फीसदी कम उड़द आयात की. म्यांमार अभी भी भारत के लिए उड़द का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है. म्यांमार से करीब 2.78 लाख टन उड़द भारत पहुंची. इसके बाद ब्राजील से करीब 39,309 टन और थाईलैंड से 11,448 टन से ज्यादा उड़द का आयात हुआ.

मसूर की आवक में 51 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी

मसूर के मामले में आयात काफी तेजी से बढ़ा है. जनवरी-जून 2026 के दौरान भारत में 9.63 लाख टन मसूर आई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह मात्रा 6.35 लाख टन थी. यानी मसूर के आयात में 51.58 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. कनाडा भारत को मसूर भेजने वाला सबसे बड़ा देश रहा. कनाडा से 5.10 लाख टन से ज्यादा मसूर आई, जबकि ऑस्ट्रेलिया से 4.17 लाख टन से अधिक आयात हुआ. रूस से भी करीब 22,938 टन मसूर भारत पहुंची.

चना आयात में 45 फीसदी से ज्यादा गिरावट

चना आयात की तस्वीर बिल्कुल अलग रही. जनवरी से जून के बीच चने का आयात 45 फीसदी से ज्यादा घट गया. इसकी एक बड़ी वजह ऑस्ट्रेलिया से आने वाली खेप में कमी बताई गई है. हालांकि, ऑस्ट्रेलिया अब भी भारत के लिए चने का सबसे बड़ा सप्लायर है. इस दौरान वहां से 6.03 लाख टन से ज्यादा चना भारत आया. तंजानिया से करीब 28,743 टन चना आयात हुआ. इसके अलावा ब्रिटेन और म्यांमार से भी आपूर्ति हुई. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू बाजार में चने की कीमत कम रहने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ज्यादा होने से आयात में कमी आई.

पीली मटर का आयात भी बढ़ा

पीली मटर के आयात में भी तेजी देखी गई. जनवरी-जून 2026 के दौरान इसका आयात करीब 17 फीसदी बढ़ा. कनाडा सबसे बड़ा सप्लायर रहा और वहां से 5.7 लाख टन से ज्यादा पीली मटर भारत आई. रूस भी पीली मटर का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा.

घरेलू बाजार पर क्या होगा असर?

दालों के आयात के ये आंकड़े बताते हैं कि, भारत अलग-अलग दालों की जरूरत के हिसाब से विदेशी बाजार पर अपनी निर्भरता को बदल रहा है. अरहर और मसूर की ज्यादा आवक से घरेलू बाजार में इनकी उपलब्धता बढ़ सकती है. वहीं चना और उड़द के आयात में कमी के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अंतर अहम माना जा रहा है. कुल मिलाकर, दालों के आयात में भले ही मामूली गिरावट आई है, लेकिन अलग-अलग दालों की सप्लाई में बड़ा बदलाव हुआ है. आने वाले महीनों में घरेलू उत्पादन, कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति यह तय करेगी कि दालों की कीमतों पर इसका कितना असर पड़ता है.

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Published: 18 Aug, 2026 | 10:02 AM

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