रसोई का बजट बिगाड़ेगी उड़द दाल! एक महीने में कीमतों में 20 फीसदी उछाल, कम उत्पादन ने बढ़ाई चिंता

Urad Dal Prices: देश में उड़द दाल की थोक कीमतें पिछले एक महीने में करीब 20 फीसदी बढ़ गई हैं. इसकी मुख्य वजह घरेलू उत्पादन में कमी, खरीफ बुवाई का घटा रकबा और म्यांमार जैसे प्रमुख निर्यातक देशों में कमजोर उत्पादन है. अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई और बुवाई में सुधार नहीं आया, तो उड़द की कीमतों में और तेजी आ सकती है.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 18 Jul, 2026 | 08:07 AM

Urad Price Hike: कृषि मंत्रालय के यूपीएजी (UPAG) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, देश में उड़द दाल की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान करीब 20 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है. थोक बाजार में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह घरेलू उत्पादन में कमी, खरीफ सीजन में कम बुवाई और विदेशों से महंगा आयात माना जा रहा है. वहीं, दूसरी दालों की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला है. यानी कुछ दालों के दाम बढ़े हैं, जबकि कुछ की कीमतें स्थिर रहीं या उनमें हल्की गिरावट दर्ज की गई.

ऐसे में अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई और खरीफ बुवाई में सुधार नहीं आया, तो उड़द की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. इसका असर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग कंपनियों पर भी पड़ सकता है.

उत्पादन घटने से बढ़ा दबाव

देश में साल 2025-26 के दौरान उड़द का उत्पादन घटकर 21.60 लाख टन रह गया, जबकि इससे पिछले साल यह 22.42 लाख टन था. यानी उत्पादन में साफ गिरावट दर्ज की गई है. इसके साथ ही इस खरीफ सीजन में भी उड़द की बुवाई उम्मीद से कम रही है. 17 जुलाई तक 13.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 6 प्रतिशत कम है. कम बुवाई से आगे चलकर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.

एक महीने में सबसे ज्यादा महंगी हुई उड़द

दाल 15 जून 2026 (₹/क्विंटल) 15 जुलाई 2026 (₹/क्विंटल)
उड़द (Urad) 7,683.26 9,212.41
अरहर (Tur) 7,468.44 7,599.94
मूंग (Moong) 7,031.74 6,817.34
चना (Gram) 5,628.24 5,772.79
मसूर (Lentil) 6,751.76 7,605.21

सोर्स: कृषि मंत्रालय का UPAG पोर्टल

बारिश और मौसम ने बढ़ाई चिंता

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, बदलते मौसम और समय पर बारिश नहीं होने का असर उड़द की खेती पर साफ दिख रहा है. खासकर आंध्र प्रदेश में रबी सीजन की उड़द की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आने की बात सामने आई है. पहले से ही बाजार में उड़द का स्टॉक कम था. अब नई फसल को लेकर बनी अनिश्चितता ने किसानों, व्यापारियों और खरीदारों की चिंता और बढ़ा दी है. उन्हें डर है कि अगर उत्पादन कम रहा, तो आने वाले समय में कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.

विदेशों से आयात भी हुआ महंगा

भारत अपनी जरूरत का कुछ हिस्सा म्यांमार और ब्राजील जैसे देशों से आयात करता है. लेकिन इस बार वहां भी मौसम और बीमारियों की वजह से उत्पादन प्रभावित हुआ है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार में उड़द का उत्पादन करीब 10 लाख टन से घटकर 7 लाख टन तक आ सकता है. वहीं फसल में येलो मोजेक वायरस का असर भी देखने को मिला है. इसका सीधा असर आयात कीमतों पर पड़ा है.

म्यांमार से आने वाली उड़द की कीमत पिछले एक महीने में करीब 825 डॉलर (लगभग 79.6 हजार रुपये) प्रति टन से बढ़कर 935 डॉलर (करीब 90.3 हजार रुपये) प्रति टन हो गई है. वहीं अच्छी क्वालिटी वाली उड़द की कीमत 1,030 डॉलर (करीब 99.4 हजार रुपये) प्रति टन तक पहुंच गई है. रुपये की कमजोरी के कारण विदेशों से उड़द मंगाना भी पहले के मुकाबले और महंगा पड़ रहा है.

आगे क्या हो सकता है?

व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल वे ज्यादा मात्रा में उड़द खरीदने से बच रहे हैं, क्योंकि पहले कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था. अब बाजार की नजर मॉनसून और खरीफ फसलों की बुवाई पर टिकी हुई है. अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है और उड़द की बुवाई बढ़ती है, तो कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है. लेकिन अगर बारिश कम रही या सरकार ने आयात को लेकर कोई बड़ा फैसला नहीं लिया, तो आने वाले समय में उड़द दाल के दाम और बढ़ सकते हैं.

उपभोक्ताओं और कंपनियों पर भी असर

उड़द की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहेगा. दाल से जुड़े खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है. ऐसे में कंपनियां या तो बढ़ी हुई लागत खुद वहन करेंगी या फिर उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं. आने वाले हफ्तों में मॉनसून और सरकारी नीतियां ही तय करेंगी कि उड़द की कीमतें किस दिशा में जाएंगी.

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Published: 18 Jul, 2026 | 08:03 AM

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