Livestock Care: गर्मी में पशु को कम पानी पिलाया तो जा सकती है जान, पशुपालन मंत्रालय के टिप्स पढ़ें

पशुपालन और डेयरी विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि गर्मी के मौसम में पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाने के लिए पर्याप्त और साफ पानी उपलब्ध कराएं. पानी की कमी से दूध उत्पादन घट सकता है और पशु बीमार पड़ सकते हैं. नियमित जांच और साफ-सफाई बेहद जरूरी है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 5 Mar, 2026 | 03:02 PM

Livestock Care: गर्मी की तेज धूप सिर्फ इंसानों को ही नहीं, पशुओं को भी परेशान करती है. जब तापमान बढ़ता है तो गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशु जल्दी थक जाते हैं, कम खाते हैं और उनका दूध भी घट सकता है. ऐसे में पशुपालन और डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry and Dairying) ने साफ कहा है-गर्मी से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका है, पशुओं को भरपूर और साफ पानी देना.

हीट स्ट्रेस से बचाव में पानी की अहम भूमिका

पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार, पर्याप्त पानी पीने  से पशुओं का शरीर ठंडा रहता है और हीट स्ट्रेस का खतरा कम होता है. पशुओं को दिन भर में 40 से 60 लीटर पानी पीलाना चाहिए. अगर पशु को समय पर पानी न मिले तो वह सुस्त पड़ सकता है, उसकी सांस तेज चलने लगती है और दूध उत्पादन भी घट सकता है. गर्मी के दिनों में एक दुधारू पशु सामान्य दिनों से ज्यादा पानी पीता है. इसलिए यह जरूरी है कि पशु के पास हर समय साफ और ठंडा पानी उपलब्ध रहे. पानी की कमी सीधे उसकी सेहत और किसान की कमाई दोनों पर असर डालती है.

साफ और ठंडा पानी हमेशा रहे उपलब्ध

विभाग की सलाह है कि पानी का टब या टंकी छांव में रखें ताकि पानी ज्यादा गर्म न हो. दिन में कई बार जांच करें कि पानी साफ है या नहीं. अगर पानी गंदा हो गया है तो तुरंत बदल दें. पशुओं को दिया जाने वाला पानी ताजा और स्वच्छ होना चाहिए. कीचड़ या काई जमा होने से बीमारी का खतरा  बढ़ जाता है. इसलिए पानी की टंकियों और ट्रफ (पानी पीने की जगह) की नियमित सफाई जरूरी है.

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हीट स्ट्रेस से बचाव का आसान और असरदार उपाय.

पानी की टंकी की नियमित जांच और भराई

गर्मी में पानी  जल्दी खत्म हो जाता है. ऐसे में सुबह और शाम टंकी या ट्रफ की जांच जरूर करें. अगर पानी कम है तो तुरंत भरें. कई किसान दिन में एक बार पानी भरकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन तेज गर्मी में यह पर्याप्त नहीं होता. विभाग ने कहा है कि जहां संभव हो, वहां पशुओं के लिए अलग-अलग जगह पर पानी की व्यवस्था करें ताकि सभी पशु आसानी से पानी पी सकें. भीड़ होने से कुछ पशु कम पानी पी पाते हैं, जिससे वे बीमार पड़ सकते हैं.

छांव और ठंडी जगह भी है जरूरी

सिर्फ पानी देना ही काफी नहीं है. पशुओं को धूप से बचाने के लिए शेड या पेड़ों की छांव भी जरूरी है. अगर पशु खुले में बंधे हैं तो उनके ऊपर टीन या घास-फूस की छत बनाना फायदेमंद रहेगा. दिन के सबसे गर्म समय में पशुओं को ज्यादा इधर-उधर न ले जाएं. सुबह और शाम के ठंडे समय में ही चराने या काम पर ले जाना बेहतर है. इससे उनका शरीर कम थकेगा और वे स्वस्थ रहेंगे.

किसान की सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय

पशुपालन और डेयरी विभाग का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है. पशु अगर स्वस्थ रहेंगे तो दूध उत्पादन  भी अच्छा रहेगा और किसान की आमदनी पर असर नहीं पड़ेगा. गर्मी हर साल आती है, लेकिन सही तैयारी से इसे आसान बनाया जा सकता है. साफ पानी, नियमित जांच और छांव की व्यवस्था-ये तीन आसान कदम पशुओं को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

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Published: 5 Mar, 2026 | 03:01 PM

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