Seed Treatment In Kharif Crops: खरीफ सीजन शुरू होते ही किसान ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई की तैयारियों में जुट जाते हैं. अच्छी पैदावार पाने के लिए किसान बेहतर बीज, खाद और सिंचाई पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार एक छोटी सी गलती पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है. यह गलती है बिना बीज उपचार किए बुवाई करना. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बीज जनित रोग और फफूंद के हमले से बचने के लिए बुवाई से पहले बीज उपचार करना बेहद जरूरी है. इससे फसल की शुरुआत मजबूत होती है और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है.
क्यों बढ़ जाता है बीज जनित रोगों का खतरा?
ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी खरीफ फसलों में बीज जनित रोगों का खतरा काफी अधिक रहता है. कई बार बीजों या मिट्टी में पहले से मौजूद फफूंद और रोगजनक तत्व बुवाई के बाद सक्रिय हो जाते हैं. इनमें फ्यूजेरियम जैसी फंगस सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. जब बिना उपचार किए बीजों की बुवाई की जाती है, तो यह फंगस बीजों पर हमला कर देती है. इसके कारण कई बीज मिट्टी में ही सड़ जाते हैं या उनका अंकुरण कमजोर होता है. नतीजतन खेत में पौधों की संख्या कम हो जाती है और पैदावार प्रभावित होती है.
बीज उपचार क्यों है जरूरी?
बीज उपचार फसल की सुरक्षा का पहला और सबसे जरूरी कदम होता है. यह बीजों को शुरुआत से ही बीमारियों और फफूंद के असर से बचाने में मदद करता है. बीज उपचार करने से पौधे ज्यादा स्वस्थ और मजबूत निकलते हैं. इसका फायदा यह होता है कि फसल की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है, पौधे मजबूत बनते हैं और खेत में फसल का जमाव भी बेहतर होता है. साथ ही, बीमारियों का खतरा कम हो जाता है, जिससे आगे चलकर अच्छी पैदावार और बेहतर क्वालिटी वाली फसल मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
बीज उपचार से मिलते हैं कई फायदे
बीज उपचार करने से किसानों को कई फायदे मिलते हैं.
- इससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है, यानी ज्यादा बीज अच्छी तरह उगते हैं.
- खेत में पौधों की संख्या भी सही बनी रहती है.
- बीज उपचार से फसल की शुरुआती अवस्था में बीमारियों का खतरा कम हो जाता है.
- मजबूत पौधे मौसम की मार और दूसरी परेशानियों का भी बेहतर तरीके से सामना कर पाते हैं.
यही कारण है कि आज के समय में अच्छी खेती के लिए बीज उपचार को बहुत जरूरी माना जाता है.
बीज उपचार के लिए कौन-सी दवा करें इस्तेमाल?
विशेषज्ञों ने किसानों को बुवाई से पहले बीज उपचार के लिए कुछ प्रभावी फफूंदनाशकों के उपयोग की सलाह दी है.
- थीरम 75 फीसदी – 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज
- कार्बेन्डाजिम 50 WP – 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज
- मेटालेक्सिल 35 फीसदी – 6 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज
किसान इनमें से किसी एक दवा का उपयोग कर सकते हैं. दवा को निर्धारित मात्रा में बीजों पर अच्छी तरह मिलाकर उपचार करना चाहिए, ताकि हर बीज पर दवा की परत चढ़ जाए.
बीज उपचार के दौरान रखें ये सावधानियां
बीज उपचार करते समय किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. हमेशा अच्छी और भरोसेमंद गुणवत्ता वाले बीजों का ही चुनाव करें. दवा मिलाते समय हाथों में दस्ताने पहनें और जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन करें. बीज उपचार के बाद उन्हें कुछ समय तक छाया में सुखाएं और फिर बुवाई करें. साथ ही, दवा की मात्रा सही रखना भी बहुत जरूरी है. दवा ज्यादा या कम डालने पर उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता और फसल पर भी असर पड़ सकता है.