झारखंड में आदिवासी समुदाय की महिला आशा देवी ने मुर्गीपालन शुरू करके अपनी आमदनी लाखों में पहुंचा दी है. उनकी सफलता को देखकर अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं. आशा देवी ने बताया कि उन्होंने मुर्गीपालन व्यवसाय शुरू करने के लिए सरकारी योजना का लाभ लिया है. वह मीट और अंडा उत्पादन कर रही हैं और इसे बिक्री करके अच्छा मुनाफा हासिल हो रहा है. इलाके में वह लखपति दीदी के नाम से मशहूर हैं.
आजीविका मिशन का लाभ लेकर मुर्गीपालन व्यवसाय शुरू किया
झारखंड के जामताड़ा जिले के फतेहपुर प्रखंड के भातुडीह गांव निवासी आशा देवी आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुकी हैं. उन्होंने आजीविका मिशन योजना का लाभ लेकर आजीविका सखी मंडल से जुड़ीं और उन्होंने मुर्गी पालन और अंडा उत्पादन का व्यवसाय शुरू किया. इससे उन्हें मीट और अंडा उत्पादन हासिल हो रही है, जिससे उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिली है.
अंडा उत्पादन से रोजाना की कमाई बढ़ी
आशा देवी ने मीडिया को बताया कि उनके पोल्ट्री फार्म से प्रतिदिन 70 से 82 अंडों का उत्पादन होता है, जिनकी बिक्री से उन्हें नियमित आय हो रही है. अंडा उत्पादन से आमदनी बढ़ी है, जिससे देखकर अन्य महिलाएं भी प्रेरित हुई हैं. केंद्र सरकार की लखपति दीदी और आजीविका सखी मंडल जैसी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
लखपति दीदी के नाम से मशहूर हुईं
जामताड़ा जिले की आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय की आशा देवी इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं. अंडा उत्पादन का कारोबार शुरू कर उन्होंने न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि अपने समुदाय की अन्य महिलाओं के लिए भी नई राह दिखाई है. पहाड़िया समुदाय की आशा देवी अब लखपति दीदी के रूप में जानी जाती हैं और उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है.

आजीविका मिशन के तहत आशा देवी ने मुर्गी पालन व्यवसाय से कामयाबी पाई.
ट्रेनिंग और जरूरी सहयोग मिला
जामताड़ा के आजीविका मिशन के कार्यक्रम संयोजक शैलेन्द्र चक्रवर्ती ने मीडिया को बताया कि आशा देवी ने सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है. उन्हें प्रशिक्षण और जरूरी सहयोग दिया गया है. अंडा और मीट की बिक्री की भी व्यवस्था की गई है. इससे वह अपनी आय बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं. इस तरह सरकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बन रही हैं. आशा देवी की सफलता यह दिखाती है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और महिलाओं की मेहनत मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं.