अल नीनो के खतरे के बीच फसल बीमा में 80 फीसदी का उछाल, 35.17 लाख किसानों को मिला सुरक्षा कवच
Andhra Pradesh Crop Insurance: अल नीनो के संभावित खतरे के बीच आंध्र प्रदेश सरकार ने खरीफ 2026 में फसल बीमा कवरेज बढ़ाने पर जोर दिया है. बीमा के लिए 35.17 लाख आवेदन मिले हैं, जो पिछले साल से करीब 80 फीसदी ज्यादा हैं. बीमित क्षेत्र भी बढ़कर 15.17 लाख हेक्टेयर हो गया है.
El Nino: अल नीनो की वजह से बारिश और फसल पर असर को लेकर बढ़ी चिंता के बीच आंध्र प्रदेश सरकार ने किसानों की सुरक्षा के लिए फसल बीमा कवरेज बढ़ाने पर जोर दिया है. राज्य के कृषि मंत्री के. अच्चन्नायडू ने बताया कि खरीफ 2026 में फसल बीमा के लिए 35.17 लाख आवेदन मिले हैं. पिछले साल के मुकाबले यह संख्या करीब 80 प्रतिशत ज्यादा है. सरकार का कहना है कि उसका लक्ष्य है कि कोई भी पात्र किसान मौसम की मार से बिना आर्थिक सुरक्षा के न रहे.
गांव-गांव किसानों से किया गया संपर्क
कृषि मंत्री के मुताबिक, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के निर्देश पर अधिकारियों ने बीमा योजना से जुड़े किसानों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया. इसके तहत रायथु सेवा केंद्रों, किसान समूहों और किसानवार रिकॉर्ड के जरिए पात्र किसानों से संपर्क किया गया. 29 से 31 जुलाई के बीच विशेष नामांकन अभियान भी चलाया गया. इसका मकसद ऐसे किसानों को बीमा के दायरे में लाना था, जो पहले किसी वजह से अपना नामांकन नहीं करा पाए थे. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा के लिए किसी किसान पर दबाव नहीं डाला गया, बल्कि उसकी सहमति से ही आवेदन कराया गया.
अल नीनो के खतरे को देखते हुए बढ़ाई गई समयसीमा
मौसम को लेकर संभावित जोखिम को देखते हुए सरकार ने बीमा कंपनियों के साथ मिलकर नामांकन की समयसीमा बढ़ाई. मौसम आधारित फसल बीमा योजना RWBCIS के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 15 जुलाई से बढ़ाकर 31 जुलाई की गई. वहीं, उपज आधारित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के लिए समयसीमा 31 जुलाई से बढ़ाकर 15 अगस्त कर दी गई. राज्य सरकार ने PMFBY के नामांकन को आगे 31 अगस्त तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा है. बैंकों को भी बीमा से जुड़ी जानकारी पूरी करने के लिए अतिरिक्त 15 दिन दिए गए हैं.
35.17 लाख किसानों ने कराया नामांकन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ 2025 में जहां 19.50 लाख आवेदन आए थे, वहीं खरीफ 2026 में यह संख्या बढ़कर 35.17 लाख हो गई. यानी करीब 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. सबसे बड़ा बदलाव गैर-कर्जदार किसानों के नामांकन में देखने को मिला. पिछले साल ऐसे किसानों की संख्या करीब 2 लाख थी, जो इस बार बढ़कर 20.35 लाख हो गई है. इससे पता चलता है कि बीमा योजना को उन किसानों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है, जो बैंक से फसल ऋण नहीं लेते हैं.
बीमित क्षेत्र भी लगभग दोगुना हुआ
फसल बीमा के दायरे में आने वाला क्षेत्र भी तेजी से बढ़ा है. खरीफ 2025 में 7.83 लाख हेक्टेयर जमीन का बीमा हुआ था. खरीफ 2026 में यह बढ़कर 15.17 लाख हेक्टेयर हो गया. यानी बीमित क्षेत्र में करीब 94 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इस साल कुल 13,983 करोड़ रुपये की फसल बीमा राशि कवर की गई है. कृषि मंत्री के अनुसार, बीमित क्षेत्र के मामले में आंध्र प्रदेश देश में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है.
पुराने प्रीमियम का बकाया भी चुकाने की तैयारी
सरकार के सामने पिछली अवधि के करीब 1,990 करोड़ रुपये के लंबित प्रीमियम का मामला भी है. कृषि मंत्री ने बताया कि गठबंधन सरकार ने इस बकाये को चरणबद्ध तरीके से निपटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सरकार का कहना है कि कम से कम प्रीमियम पर ज्यादा से ज्यादा किसानों को बीमा सुरक्षा देना उसकी प्राथमिकता है. अल नीनो के संभावित असर और मौसम की अनिश्चितता के बीच बढ़ा बीमा कवरेज किसानों को फसल खराब होने की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है.