Sahiwal Cow: पशुपालन और स्वदेशी नस्लों के संरक्षण की दिशा में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. बीएचयू के राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के जरिए एक गंगातीरी सरोगेट गाय ने 24 किलो वजन की स्वस्थ साहीवाल बछिया को जन्म दिया है. खास बात यह है कि बछिया उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली साहीवाल गाय से तैयार भ्रूण से पैदा हुई है. बीएचयू के अनुसार, बछिया में आगे चलकर रोजाना 14 से 16 लीटर दूध उत्पादन की क्षमता हो सकती है.
सेक्स-सॉर्टेड सीमन से तैयार हुआ उच्च गुणवत्ता वाला भ्रूण
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू की पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय की टीम ने इस परियोजना के तहत अधिक दूध देने वाली साहीवाल गाय में 11 नवंबर 2025 को सुपरओव्यूलेशन कराया. इसके बाद बेहतर आनुवंशिक गुणवत्ता वाले साहीवाल सांड के सेक्स-सॉर्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराया गया. इस पूरी प्रक्रिया से कुल छह उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण तैयार किए गए. इन भ्रूणों को ऐसी सरोगेट गायों में प्रत्यारोपित किया गया, जिनका प्रजनन चक्र पहले से इसके लिए तैयार किया गया था. इसी प्रक्रिया के परिणामस्वरूप 21 अगस्त 2026 को गंगातीरी सरोगेट गाय ने स्वस्थ साहीवाल बछिया को जन्म दिया.
24 किलो की बछिया, दूध उत्पादन की क्षमता 16 लीटर तक
जन्म के समय बछिया का वजन करीब 24 किलो दर्ज किया गया. बीएचयू के अनुसार, इसमें रोजाना 14 से 16 लीटर तक दूध उत्पादन की क्षमता हो सकती है. हालांकि वास्तविक दूध उत्पादन भविष्य में पशु की वृद्धि, स्वास्थ्य, पोषण, प्रबंधन और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. इस उपलब्धि की खासियत यह है कि साहीवाल जैसी बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाली नस्ल के भ्रूण को गंगातीरी गाय में प्रत्यारोपित कर संतान प्राप्त की गई. इससे उन्नत आनुवंशिक गुणों वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होती हैं.
किसानों की आय बढ़ाने में मिल सकती है मदद
बीएचयू की इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक बछिया पैदा करना नहीं, बल्कि स्वदेशी गोवंश का संरक्षण और आनुवंशिक सुधार करना है. भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीकों की मदद से बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं को तेजी से बढ़ाया जा सकता है. अगर अधिक दूध देने वाली और बेहतर गुणवत्ता वाली नस्लों की संख्या बढ़ती है, तो लंबे समय में इससे दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आय में सुधार की संभावना बन सकती है. खासकर ऐसे पशुपालकों के लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है, जो बेहतर नस्ल के पशुओं के जरिए डेयरी कारोबार को आगे बढ़ाना चाहते हैं.
विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगी आधुनिक पशुपालन तकनीक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू की टीम अब ओवम पिक-अप, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी काम कर रही है. विश्वविद्यालय की योजना इन तकनीकों को आगे विंध्य क्षेत्र के पशुपालकों तक पहुंचाने की है. इससे गंगातीरी समेत अन्य स्वदेशी नस्लों के आनुवंशिक सुधार को गति मिल सकती है. बीएचयू का मानना है कि उन्नत प्रजनन तकनीकों के इस्तेमाल से बेहतर नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने के साथ पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिलेगी.