116 गायों में IVF और 70 फीसदी सफलता, भारत में पहली बार बड़े स्तर पर एम्ब्रियो ट्रांसफर सफल

भारत में पहली बार बड़े स्तर पर गायों में एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक सफल रही है. इस नई पहल से अच्छी नस्ल की गायों की संख्या तेजी से बढ़ेगी. इससे दूध उत्पादन में बढ़ोतरी और किसानों की आय में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे डेयरी सेक्टर को मजबूती मिलेगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 Mar, 2026 | 01:43 PM

Embryo Transfer: भारत के डेयरी सेक्टर के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है. अब देश में पहली बार बड़े स्तर पर गायों में एम्ब्रियो ट्रांसफर यानी भ्रूण स्थानांतरण तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया गया है. यह काम BL Agro की सहयोगी कंपनी Leeds Genetics ने किया है. इस नई तकनीक से आने वाले समय में दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

पहली बार इतने बड़े स्तर पर हुआ प्रयोग

भारत में अभी तक गायों में एम्ब्रियो ट्रांसफर  छोटे स्तर पर ही किया जाता था, लेकिन इस बार इसे बड़े पैमाने पर सफल बनाया गया है. यह पूरा कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के बरेली में बने एक आधुनिक सेंटर में किया गया, जहां आईवीएफ, पैथोलॉजी और जीनोमिक्स जैसी नई तकनीकों की सुविधा मौजूद है. कंपनी का कहना है कि यह भारत का पहला ऐसा प्रोग्राम है, जिसमें इतने बड़े स्तर पर स्वदेशी गायों पर यह तकनीक इस्तेमाल की गई और अच्छे नतीजे भी मिले.

पहले चरण में 70 फीसदी तक सफलता

इस प्रोग्राम की शुरुआत दिसंबर 2025 में की गई थी. पहले चरण में 116 गायों पर आईवीएफ (IVF) तकनीक का इस्तेमाल किया गया. इसमें करीब 70 फीसदी तक सफलता मिली, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अच्छी सफलता दर यह दिखाती है कि भारत में भी अब पशु प्रजनन के क्षेत्र  में नई तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है.

दूसरे चरण में और बढ़ाया गया दायरा

पहले चरण की सफलता के बाद कंपनी ने दूसरा चरण और बड़े स्तर पर शुरू किया. इसमें 160 गायों में भ्रूण स्थानांतरण  किया गया. इसमें गिर, साहीवाल और एचएफ क्रॉस जैसी नस्लों को शामिल किया गया. इन नस्लों को खास तौर पर इसलिए चुना गया क्योंकि ये दूध देने में अच्छी मानी जाती हैं और भारतीय मौसम में आसानी से ढल जाती हैं. खासकर गिर गाय को उसकी ज्यादा दूध देने की क्षमता और मजबूत सेहत के लिए जाना जाता है.

दूध उत्पादन बढ़ाने में मिलेगी बड़ी मदद

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे अच्छी नस्ल की गायों  की संख्या तेजी से बढ़ाई जा सकती है. एक अच्छी गाय के गुणों को जल्दी-जल्दी कई गायों में फैलाया जा सकता है. जानकारों का कहना है कि इससे दूध उत्पादन तीन गुना तक बढ़ सकता है. अगर ऐसा होता है तो डेयरी किसानों की कमाई में भी बड़ा इजाफा होगा. साथ ही देश की डेयरी इंडस्ट्री को भी मजबूती मिलेगी.

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एम्ब्रियो तकनीक से बढ़ेगा दूध उत्पादन और किसानों की आय.

भारत-ब्राजील के बीच खास सहयोग

इस पूरे प्रोजेक्ट में भारत के साथ ब्राजील की बड़ी संस्था Embrapa का भी सहयोग मिला है. यह संस्था कृषि और पशुपालन  के क्षेत्र में दुनिया भर में जानी जाती है. खास बात यह है कि यह पहली बार है जब एम्ब्रापा ने भारत में किसी निजी कंपनी के साथ मिलकर काम किया है. इस सहयोग से दोनों देशों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ एक साथ मिलकर नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं.

किसानों और गांवों को होगा सीधा फायदा

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलेगा. जब अच्छी नस्ल की गायें तेजी से बढ़ेंगी, तो दूध उत्पादन भी बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा. इसके साथ ही गांवों में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे. डेयरी सेक्टर  मजबूत होगा तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा. कंपनी का कहना है कि उनका लक्ष्य किसानों तक विश्व स्तर की तकनीक पहुंचाना है, ताकि वे भी आगे बढ़ सकें.

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आशीष खंडेलवाल

क्या कहते हैं कंपनी के अधिकारी

इस सफलता पर आशीष खंडेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा कि यह भारतीय डेयरी सेक्टर  के लिए एक बड़ा कदम है. उनके मुताबिक, इस तरह की तकनीक से भारत दुनिया में पशु आनुवंशिकी और दूध उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए आधुनिक तकनीक लाने के लिए लगातार काम करती रहेगी.

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