Jackfruit Farming: पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए किसान अब ऐसी बागवानी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग हो और कम लागत में बेहतर आमदनी मिल सके. इन्हीं विकल्पों में लाल कटहल की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. अपने लाल गूदे, अनोखे स्वाद और औषधीय गुणों के कारण यह कटहल सामान्य किस्मों से अलग पहचान बना रहा है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक के अनुसार, सही गुणवत्ता वाले पौधे और उपयुक्त मिट्टी के साथ इसकी खेती किसानों के लिए लाभदायक व्यवसाय बन सकती है.
क्या है लाल कटहल की खासियत?
कृषि विशेषज्ञ डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक के अनुसार, लाल कटहल देखने में सामान्य कटहल जैसा होता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा अंतर इसका लाल गूदा और लाल बीज है. स्वाद के मामले में भी इसे पारंपरिक कटहल से अलग माना जाता है. कई लोग इसकी सब्जी के स्वाद की तुलना नॉन-वेज व्यंजनों से करते हैं, हालांकि यह पूरी तरह शाकाहारी फल है. इसका एक फल लगभग 10 किलोग्राम तक वजन का हो सकता है. लाल कटहल का उपयोग सब्जी और पके फल दोनों रूपों में किया जाता है. यही वजह है कि इसकी बाजार में अलग पहचान और अच्छी मांग देखने को मिल रही है.
2 से 4 साल में शुरू होता है उत्पादन
विशेषज्ञ के अनुसार, लाल कटहल का पौधा रोपाई के 2 से 4 वर्ष के भीतर फल देना शुरू कर देता है. एक विकसित पेड़ से अनुकूल परिस्थितियों में 300 तक फल प्राप्त हो सकते हैं. मुख्य फलन अवधि जून से सितंबर के बीच मानी जाती है, जबकि कुछ उन्नत किस्में वर्षभर भी फल देने की क्षमता रखती हैं. बेहतर उत्पादन के लिए स्वस्थ और प्रमाणित पौध सामग्री का चयन बेहद जरूरी है. गुणवत्तापूर्ण पौधे भविष्य में फल की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों को प्रभावित करते हैं.
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दोमट मिट्टी में मिलती है बेहतरीन पैदावार
लाल कटहल की खेती सामान्य कटहल की तरह ही की जाती है. इसके लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जहां जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो. पौध रोपाई के समय खेत की उचित तैयारी और पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना बेहतर विकास के लिए जरूरी होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि पौधे की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि कमजोर या असली किस्म न होने पर फलन प्रभावित हो सकता है और बाजार में अच्छी कीमत नहीं मिलती.
कम लागत में बागवानी का लाभकारी विकल्प
लाल कटहल की खेती उन किसानों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है, जो धान, गेहूं या पारंपरिक फसलों के अलावा बागवानी से अतिरिक्त आय प्राप्त करना चाहते हैं. इसकी देखभाल सामान्य कटहल की तरह होती है और शुरुआती लागत भी अपेक्षाकृत कम रहती है. इसके लाल गूदे, औषधीय गुणों और बढ़ती बाजार मांग के कारण भविष्य में इसका व्यावसायिक महत्व और बढ़ सकता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान केवल प्रमाणित नर्सरी से ही गुणवत्तापूर्ण पौधे खरीदें, ताकि बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा सुनिश्चित किया जा सके.