आयातित बीजों पर निर्भरता होगी कम, पॉपकॉर्न मक्का की 2 नई देसी किस्में लॉन्च.. होगी बंपर पैदावार

भारत में पॉपकॉर्न मक्का की खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘Krisna459’ और ‘Godari234’ नाम की दो नई देसी हाइब्रिड किस्में लॉन्च की गई हैं. इनसे किसानों को बेहतर पैदावार और तय कीमत का फायदा मिलने की उम्मीद है. देश में पॉपकॉर्न मक्का का बाजार 2025-26 में 1.3 लाख टन पहुंच गया है. भारत 2030 तक आयात खत्म करने का लक्ष्य रखता है.

Kisan India
नोएडा | Published: 25 Aug, 2026 | 09:06 AM

भारत में पॉपकॉर्न मक्का की खेती को बढ़ावा देने के लिए दो नई देसी हाइब्रिड किस्में ‘Krisna459’ और ‘Godari234’ लॉन्च की गई हैं. ये दोनों हाई-एक्सपैंशन और नॉन-GMO किस्में हैं. उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आंध्र प्रदेश के मुसुनुरु में गॉरमेट पॉपकॉर्निका की फैक्ट्री में इन्हें लॉन्च किया. गॉरमेट पॉपकॉर्निका कंपनी के मुताबिक, इन किस्मों से किसानों को बेहतर पैदावार, तय खरीद और बेहतर कीमत का फायदा मिल सकता है.

कंपनी के मुताबिक, इन नई किस्मों के जरिए किसानों को सिर्फ पॉपकॉर्न मक्का की खेती का विकल्प ही नहीं मिलेगा, बल्कि वे इसके बीज की जेनेटिक्स पर भी मालिकाना हक हासिल कर सकेंगे. कंपनी ने कहा कि इससे पहले वह किसानों को सामान्य मक्का की खेती से हटाकर वैल्यू-एडेड और कॉन्ट्रैक्ट आधारित पॉपकॉर्न मक्का की खेती से जोड़ रही थी. किसानों को इस खेती में फसल की तय खरीद और बेहतर कीमत का फायदा मिलता है.

आयातित बीजों पर निर्भरता घटेगी

गॉरमेट पॉपकॉर्निका के मुताबिक, ‘Krisna459’ और ‘Godari234’ हाइब्रिड बीज भारत में पॉपकॉर्न मक्का  के लिए आयातित बीजों पर निर्भरता कम करने में मदद करेंगे. इन बीजों को भारत में ही तैयार और विकसित किया गया है. इनसे किसानों को बेहतर पैदावार, अच्छी क्वालिटी और फसल की बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है. कंपनी ने कहा कि भारत में सिनेमा और प्रीमियम रिटेल में बिकने वाले पॉपकॉर्न के लिए लंबे समय से अमेरिका, अर्जेंटीना, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से बीज और मक्का आयात किया जाता रहा है. ‘Krisna459’ और ‘Godari234’ को इसी निर्भरता का घरेलू विकल्प बताया जा रहा है.

17,500 से ज्यादा किसानों को फायदा

इन दोनों हाइब्रिड को भारत की प्रमुख मक्का अनुसंधान संस्थाओं के साथ मिलकर पांच फसल सीजन में तैयार और टेस्ट किया गया है. कंपनी के अनुसार, दोनों किस्मों में आयातित प्रमुख किस्मों के बराबर दाने का आकार और पॉपिंग क्षमता है. साथ ही, इनमें कीटों से बचाव, कम अवधि में तैयार होने और अच्छी पैदावार जैसी खूबियां हैं. कंपनी के मुताबिक, इन किस्मों से आठ राज्यों के 17,500 से ज्यादा किसानों को सीधे फायदा मिल सकता है. ये किसान करीब 40,000 एकड़ में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर रहे हैं. औसतन 4.5 टन गीले भुट्टे प्रति एकड़ की पैदावार और प्रोसेसर-ग्रेड क्वालिटी मिलने पर किसानों को तय खरीद और कॉन्ट्रैक्ट कीमतों का लाभ मिलेगा.कंपनी का कहना है कि इससे छोटे और सीमांत किसानों की आय में लंबे समय तक सुधार की उम्मीद है.

पॉपकॉर्न मक्का का बाजार 11 साल में ढाई गुना बढ़ा

भारत में पॉपकॉर्न मक्का का बाजार तेजी से बढ़ा है. 2014-15 में करीब 50,000 टन का बाजार 2025-26 में बढ़कर लगभग 1.3 लाख टन हो गया है. अब देश में होने वाला उत्पादन घरेलू मांग का करीब 70 फीसदी पूरा कर रहा है. कंपनी के मुताबिक, घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत ने 2025-26 में ही करीब 810 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है. ‘Krisna459’ और ‘Godari234’ जैसी देसी हाइब्रिड किस्मों की बड़े स्तर पर खेती शुरू होने से भारत का लक्ष्य 2030 तक पॉपकॉर्न के आयात को पूरी तरह खत्म करना है.

 

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