Maharashtra Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र सरकार की मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है. सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, जून 2026 तक करीब 92 लाख अपात्र लाभार्थियों के खातों में योजना के तहत कुल 9,605 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को आर्थिक मदद देने के लिए जुलाई 2024 में शुरू की गई थी. इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की सहायता दी जाती है.
RTI से सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि लाभार्थियों की जांच और सूची की कई बार छंटनी के बावजूद लंबे समय तक बड़ी संख्या में ऐसे लोग योजना का फायदा लेते रहे, जो इसके नियमों के मुताबिक पात्र नहीं थे.
अलग-अलग वजहों से हटाए गए लाखों नाम
जानकारी के मुताबिक, 62 लाख लाभार्थियों को ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं करने की वजह से सूची से बाहर किया गया. वहीं करीब 16 लाख लोगों की पारिवारिक सालाना आय 2.5 लाख रुपये की तय सीमा से ज्यादा पाई गई. इसके अलावा करीब 4.5 लाख सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी योजना का लाभ लेते मिले. करीब 3.6 लाख महिलाएं पहले से ही संजय गांधी निराधार अनुदान योजना का फायदा उठा रही थीं. ऐसे में उन्हें लाड़की बहिन योजना के लिए भी लाभार्थी पाया गया.
जांच में करीब 2.5 लाख ऐसे मामले भी सामने आए, जहां एक ही परिवार के एक से ज्यादा सदस्यों ने योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था. वहीं 1.8 लाख लाभार्थी तय अधिकतम उम्र सीमा 65 साल से ज्यादा उम्र के पाए गए. जिला स्तर पर हुई जांच में 1.7 लाख अन्य लाभार्थियों को भी अपात्र घोषित कर सूची से हटा दिया गया.
पात्र महिलाओं की संख्या 1.65 करोड़
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जांच और छंटनी के बाद योजना में अब करीब 1.65 करोड़ पात्र लाभार्थी बचे हैं. हालांकि, इससे पहले काफी ज्यादा संख्या में लोगों को भुगतान किया जा रहा था. नवंबर 2025 तक 2.1 करोड़ से ज्यादा लोगों को योजना का पैसा मिला. इससे पहले फरवरी से मई 2025 के बीच लाभार्थियों की संख्या करीब 2.47 करोड़ तक पहुंच गई थी. इतनी बड़ी संख्या में भुगतान होने से महाराष्ट्र सरकार का मासिक खर्च भी तय बजट से काफी ऊपर चला गया. जहां पात्र लाभार्थियों के हिसाब से हर महीने करीब 2,450 करोड़ रुपये खर्च होने चाहिए थे, वहीं सरकार को कई मौकों पर 3,640 करोड़ रुपये से ज्यादा प्रति माह का भुगतान करना पड़ा. पिछले 24 महीनों में इस योजना पर सरकार ने कुल 76,261 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
सिर्फ सरकारी कर्मचारियों से होगी पैसों की वसूली
अब सवाल यह है कि, अपात्र लोगों को दिए गए पैसे की क्या वसूली होगी? महिला एवं बाल विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सरकार सभी अपात्र लाभार्थियों से पैसे वापस लेने की योजना नहीं बना रही है. अधिकारी के अनुसार, वसूली केवल उन 4.5 लाख सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से की जाएगी, जिन्होंने नियमों के खिलाफ योजना का लाभ लिया. इसके लिए संबंधित जिला कलेक्टर कार्यालयों को निर्देश भेजे गए हैं. उनसे सरकारी कर्मचारियों द्वारा ली गई राशि की वसूली करने और इसकी रिपोर्ट सरकार को देने को कहा गया है.
इस पूरे मामले ने योजना में लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, सरकार की ओर से अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया जारी है, ताकि आगे योजना का पैसा केवल वास्तविक पात्र महिलाओं तक पहुंच सके.