बकरी पालक हो जाएं सावधान! ये 3 बीमारियां 24 घंटे में बन सकती हैं जानलेवा, एक्सपर्ट से जानें बचाव के तरीके
Goat Farming Tips: क्या आप कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने का तरीका ढूंढ रहे हैं? तो बकरी पालन आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा यह व्यवसाय सही नस्ल के चयन, बेहतर देखभाल और समय पर टीकाकरण के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रहा है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वाई. के. सोनी ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, बकरी पालकों की जरा सी लापरवाही भारी नुकसान भी करा सकती है.
बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में कम निवेश में शुरू होने वाला एक बेहतरीन व्यवसाय है. इसमें ज्यादा जमीन या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती, इसलिए छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं और नियमित आय का स्रोत बना सकते हैं.
डॉ. वाई. के. सोनी बताते हैं कि, बकरी पालन में सफलता काफी हद तक सही नस्ल के चयन पर निर्भर करती है. अगर किसान दूध या मांस उत्पादन के हिसाब से नस्ल चुनते हैं, तो उत्पादन बढ़ता है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है, जिससे मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है.
अगर बकरियों को संतुलित आहार, साफ पानी और स्वच्छ वातावरण दिया जाए, साथ ही आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं, तो उनकी सेहत बेहतर रहती है और उत्पादन (दूध/मांस) भी ज्यादा मिलता है.
बकरी पालन में सबसे बड़ी चुनौती बीमारियों से बचाव है. कई बार छोटी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान करा सकती है. डॉ. सोनी के मुताबिक, कई ऐसी बीमारियां हैं जो बहुत तेजी से फैलती हैं और कुछ मामलों में बीमारी इतनी गंभीर हो जाती है कि 4 से 24 घंटे के अंदर ही बकरी की मौत हो सकती है.
बकरियों में एंटेरोटॉक्सिमिया (आंतों का जहर), बकरी चेचक और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियां बहुत तेजी से फैलती हैं. इनमें बकरी सुस्त हो जाती है, खाना बंद कर देती है और कई मामलों में 24 घंटे के भीतर मौत तक हो सकती है, इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत ध्यान देना जरूरी है.
डॉ. वाई.के. सोनी का कहना है कि, अगर पशुपालक समय पर टीकाकरण कराएं, बकरियों को पौष्टिक आहार दें और उनके रहने की जगह साफ रखें, तो इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है. इससे बकरी पालन सुरक्षित रहता है और दूध व मांस उत्पादन के जरिए अच्छी आय मिलती है.