Gehun ki kheti: अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं पर संकट, किसान तुरंत करें ये काम.. नहीं सिकुड़ेंगे दाने

कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि 10 फरवरी के बाद गेहूं के पौधों में बाली निकलने लगेगी और इस दौरान दाने में दूधिया अवस्था होती है. अगर मिट्टी का तापमान सर्दी के जाने के बाद बढ़ रहा है, तो इससे गेहूं के दाने प्रभावित हो सकते हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 31 Jan, 2026 | 04:42 PM

Wheat Farming: अभी जनवरी का महीना खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अचानक तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो गई है. इससे रबी फसलों पर असर पड़ रहा है. खासकर औसत से ज्यादा तापमान होने के कारण गेहूं किसानों की चिंता बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश के गेहूं किसानों का कहना है कि अगर इसी तरह तापमान में बढ़ोतरी होती रही, तो पैदावार पर असर पड़ सकता है. क्योंकि गेहूंं की फसल के लिए अभी कुछ दिनोंं तक सर्द मौसम की जरूरत है. हालांकि, गेहूं किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं हैं. कुछ देसी उपाय अपनाकर किसान अपनी गेहूं की फसल को बढ़ते तापमान के असर से बचा सकते हैं.

दरअसल, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गेहूं की फसल आधी तैयार हो गई है. लेकिन इस बार तापमान  में समय से पहले वृद्धि के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है. गेहूं को ठंडी मौसम की आवश्यकता होती है, इसलिए बढ़ती गर्मी से पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. हालांकि, कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं किसानों को सलाह दी है. उन्होंने सलाह में कहा है कि बढ़ते तापमान को देखते हुए सिंचाई के अंतराल को घटा दिया जाना चाहिए. जहां पहले किसानों को महीने में एक बार सिंचाई करनी पड़ती थी, अब इसे लगभग 20 दिनों में एक बार हल्के पानी से करना चाहिए. इसका उद्देश्य फसल को गर्मी से बचाना और पैदावार बनाए रखना है.

10 फरवरी के बाद गेहूं के पौधों में बाली निकलने लगेगी

कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि उत्तर प्रदेश कई कई जिलों में 10 फरवरी के बाद गेहूं के पौधों में बाली निकलने लगेगी और इस दौरान दाने में दूधिया अवस्था होती है. अगर मृदा का तापमान सर्दी के जाने के बाद बढ़ रहा है, तो इससे गेहूं के दाने  प्रभावित हो सकते हैं. इससे बचने के लिए किसानों को गेहूं के खेतों में हल्के पानी से सिंचाई कम अंतराल में करनी चाहिए.

इस दवा का करें छिड़काव

कृषि जानकारों के मुताबिक, गेहूं के खेतों की सिंचाई नहर या ट्यूबल से भी की जा सकती है, लेकिन अगर स्प्रिंकलर सिस्टम से सिंचाई की जाए तो फसल को किसी भी नुकसान से बचाया जा सकता है और गेहूं की पैदावार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से भी बचाव होता है. वहीं, सुलतानपुर जिले के किसानों को गेहूं की फसल में बालियां निकलने के समय किसानों को शाम के समय हल्की सिंचाई  करने की सलाह दी गई है, ताकि खेत में नमी बनी रहे. साथ ही फसल पर 0.2 फीसदी पोटेशियम नाइट्रेट या 0.2 फीसदी पोटेशियम आर्थोफास्फेट का छिड़काव करने से दाने सिकुड़ने से बचते हैं और गेहूं की पैदावार बेहतर होती है.

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Published: 31 Jan, 2026 | 04:40 PM

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