गर्मी में तालाब की लापरवाही पड़ सकती है भारी, मई में मछली पालक जरूर अपनाएं ये सावधानियां

Fish Farming Tips: मछली पालन सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर यह काफी मुनाफेदार काम बन सकता है. लेकिन इसकी सफलता की शुरुआत तालाब की तैयारी से होती है जहां सफाई, पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन स्तर और सही प्रबंधन सबसे अहम भूमिका निभाते हैं. अगर शुरुआत ही सही हो, तो मछलियों की ग्रोथ तेज होती है और नुकसान की संभावना बेहद कम हो जाती है. ऐसे में डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग बिहार ने मछली पालकों के लिए कुछ जरूरी एडवाइजरी जारी की है.

नोएडा | Updated On: 4 May, 2026 | 05:21 PM
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मछलियों को पूरक आहार हमेशा उनकी आवश्यकताओं के अनुसार सही मात्रा, गुणवत्ता और सही स्थान पर देना चाहिए. आहार का संतुलन मछलियों के वजन और तालाब की स्थिति के अनुसार तय करना जरूरी है, ताकि उनका विकास तेजी से और स्वस्थ तरीके से हो सके.

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तालाब की उर्वरकता बढ़ाने के लिए गोबर और चूना दोनों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इन्हें कभी भी एक साथ नहीं मिलाना चाहिए. दोनों को अलग-अलग समय पर उपयोग करने से पानी की गुणवत्ता बनी रहती है और मछलियों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता.

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मत्स्य बीज (स्पॉन से फ्राई) तैयार करने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक का प्रयोग नहीं करना चाहिए. इससे बीज की गुणवत्ता खराब हो सकती है और मछलियों की वृद्धि पर असर पड़ता है.

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गर्मी और बारिश के मौसम में तालाब में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा कम हो सकती है. इसे संतुलित रखने के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट का छिड़काव, ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दवाएं या एरेटर/एयर ब्लोअर का उपयोग सुबह और शाम करना बहुत जरूरी है.

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जब मछलियों का औसत वजन 1 से 1.5 किलोग्राम हो जाए, तभी उन्हें बिक्री के लिए तालाब से निकाला जाना चाहिए. निकासी से कम से कम एक दिन पहले उन्हें आहार देना बंद कर देना चाहिए ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे.

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नए मत्स्य बीज डालने से पहले तालाब को अच्छी तरह सूखाकर, जोतकर गोबर और चूने से उपचारित करना जरूरी है. इसके बाद पानी भरकर और पोटाशियम परमैंगनेट से संक्रमण मुक्त करके ही बीज संचयन करें, जो हमेशा सुबह 8 से 12 बजे के बीच करना अधिक सुरक्षित माना जाता है.

Published: 4 May, 2026 | 06:21 PM

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