मॉनसून से पहले पशुपालकों के लिए अलर्ट, पेट के कीड़े घटा सकते हैं दूध उत्पादन, तुरंत कर लें ये 1 काम

Dairy Farming Tips: मॉनसून की बारिश जहां किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं पशुपालकों के लिए यह मौसम नई चुनौतियां भी खड़ी कर देता है. बरसात के दौरान हरी घास और नमी के कारण बैक्टीरिया व परजीवी तेजी से बढ़ते हैं, जो पशुओं के पेट में कीड़े पैदा कर सकते हैं. इसका सीधा असर उनकी सेहत, वजन और दूध उत्पादन पर पड़ता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, मॉनसून शुरू होने से पहले ही पशुओं की डीवार्मिंग (पेट के कीड़ों की दवा) जरूर कराएं, ताकि वे पूरे मौसम स्वस्थ और उत्पादक बने रहें.

नोएडा | Updated On: 16 Jun, 2026 | 07:25 PM
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बरसात के मौसम में खेतों और चरागाहों में बैक्टीरिया व परजीवी तेजी से पनपते हैं. दूषित घास खाने से ये पशुओं के शरीर में पहुंचकर कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं.

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पशुओं के पेट में विकसित होने वाले आंतरिक कीड़े उनकी सेहत पर बुरा असर डालते हैं. इसके कारण भूख कम लगना, वजन घटना, कमजोरी, दस्त और दूध उत्पादन में कमी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं.

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एक्सपर्ट के अनुसार मॉनसून शुरू होने से पहले पशुओं को डीवार्मिंग कराना बेहद जरूरी है. इससे पेट में मौजूद हानिकारक कीड़ों का नाश होता है और पशु कई बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं.

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डीवार्मिंग के बाद पशुओं का पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. जब पेट स्वस्थ रहता है तो पशु का विकास अच्छा होता है, रोगों का खतरा कम होता है और दूध उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ता है.

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पशु विशेषज्ञों ने पशुपालकों को मॉनसून से पहले एल्बेंडाजोल दवा देने की सलाह दी है. यह टैबलेट और लिक्विड दोनों रूपों में उपलब्ध है, लेकिन इसकी सही मात्रा पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही देनी चाहिए.

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केवल मॉनसून से पहले ही नहीं, बल्कि पशुओं की बेहतर सेहत और उत्पादन क्षमता बनाए रखने के लिए हर चार महीने के अंतराल पर नियमित डीवार्मिंग कराना जरूरी है. इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और पशु लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं.

Published: 16 Jun, 2026 | 09:22 PM

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