Today’s Insight: जनवरी में सूरज की तेज धूप से बर्बाद न हो जाए फसल, इन 2 उपायों से बढ़ाएं उत्पादन, बचाएं नुकसान

Gehun Ki Kheti: उत्तर भारत के किसान इस साल मौसम के बदलते मिजाज को लेकर चिंतित हैं. दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड न पड़ने और तापमान लगातार बढ़ने से गेहूं की फसल समय से पहले पकने लगी है. इससे न केवल दाने छोटे और हल्के हो रहे हैं, बल्कि कुल पैदावार में भी गिरावट का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में किसानों के लिए फसल की सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने के स्मार्ट उपाय अपनाना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.

नोएडा | Published: 14 Jan, 2026 | 04:55 PM
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दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड न पड़ने और तापमान बढ़ने से गेहूं के दाने छोटे और हल्के रह सकते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और कुल उत्पादन पर असर पड़ेगा.

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विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की फसल को अच्छे कल्ले और दाने के लिए कम तापमान और ठंडी रातों की जरूरत होती है. गर्मी लगातार बढ़ती रही, तो फसल समय से पहले पक जाएगी.

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कई किसानों के अनुसार बदलता मौसम खेती के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. जनवरी में अब दोपहर की धूप भी तेज हो गई है, जिससे पारंपरिक खेती के पैटर्न पर असर साफ दिख रहा है.

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ऐसे में फसल को गर्मी के तनाव से बचाने के लिए किसानों को सिंचाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए. हल्की नमी बनाए रखने के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करना फायदेमंद साबित होता है.

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2% पोटैशियम सल्फेट के घोल का छिड़काव गेहूं की फसल को बढ़ती गर्मी और तापमान के तनाव से बचाने में बेहद मददगार होता है. यह घोल न केवल पौधों को गर्मी से होने वाले नुकसान से बचाता है, बल्कि दाने भरने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित रखता है.

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स्प्रिंकलर सिंचाई करने से खेत की सूक्ष्म जलवायु ठंडी बनी रहती है, जिससे पौधों को गर्मी का तनाव नहीं होता. इससे गेहूं के दाने पूरी तरह विकसित होकर वजन और गुणवत्ता में बढ़ोतरी करते हैं. इसके अलावा, स्प्रिंकलर सिंचाई फसल के लिए समान नमी बनाए रखती है.

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