जंगली हाथियों के हमले से बचाएगा इनोबॉक्स, झारखंड के 12वीं छात्र ने बनाया खास एआई उपकरण

InnoBox AI Device Protect from wild Animals Attack: पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने कहा कि झारखंड के 18 साल के एक युवा ने राज्य के वन विभाग के लिए इंसानों और हाथियों के बीच टकराव को कम करने के लिए कम कीमत वाला AI-बेस्ड डिवाइस बनाया है.

नोएडा | Updated On: 17 Jul, 2026 | 04:59 PM

झारखंड के 18 साल के लड़के ने राज्य के वन विभाग के लिए खासकर ग्रामीण इलाकों में इंसान और हाथियों के बीच टकराव को कम करने के मकसद से कम लागत वाला आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस (AI) आधारित उपकरण इनोबॉक्स बनाया है. इस उपकरण का अभी पलामू बाघ अभयारण्य (पीटीआर) में परीक्षण किया जा रहा है और अगस्त में इसे रांची जिले में प्रायोगिक परियोजना के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना है.

रांची के एक स्कूल से हाल ही में 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा पास करने वाले अवि मोहन कुमार शुक्ला ने बताया कि वह पिछले तीन महीनों से इनोबॉक्स बनाने पर काम कर रहे हैं. छात्र अवि ने पीटीआई को बताया कि ‘इनोबॉक्स’ नाम का यह उपकरण एआई आधारित है और सौर ऊर्जा से चलता है. वन्यजीव निरोधक उपकरण है. यह उपकरण कंपन संवेदी, रडार और एआई कैमरे का इस्तेमाल करके हाथियों और दूसरे जानवरों का पता लगाता है तथा उन्हें खेतों से दूर रखता है.

पशुओं की 85 फीसदी सटीक पहचान करने में सक्षम

अवि मोहन कुमार शुक्ला ने बताया कि उनका उपकरण इनोबॉक्स अलग-अलग प्रजातियों के पशुओं की पहचान करने की सटीकता 80-85 फीसदी से ज्यादा है. यह दूर से पशु को पहचान लेता है और कंपन के साथ तेज और तीखी ध्वनि निकालता है. रांची निवासी व्यापारी आशीष कुमार शुक्ला के बेटे अवि ने जब उपकरण के विकास की जानकारी दी, तो वन विभाग ने परियोजना के लिए खर्चा उठाया.

वन विभाग ने उपकरण बनाने का खर्च उठाया

झारखंड के मुख्य वन्यजीव वार्डन रवि रंजन ने पीटीआई से कहा कि सोशल मीडिया पर अवि को देखने के बाद मैंने उन्हें फोन किया और उनकी प्रस्तुति को देखा. वन विभाग ने ऐसे 10 एआई आधारित उन्नत उपकरण बनाने के लिए एक लाख रुपये दिए हैं. ये उपकरण अभी परीक्षण के दौर में हैं. हमने उन्हें अंतिम परीक्षण के लिए पलामू बाघ अभयारण्य भेजा है, जहां अब तक 80-85 फीसदी सटीकता के साथ अच्छे नतीजे मिले हैं.

इनोबॉक्स को पूरे राज्य में लगाने की योजना

मुख्य वन्यजीव वार्डन रवि रंजन ने कहा कि परीक्षण पूरा होने के बाद इन उपकरणों का इस्तेमाल रांची जिले में प्रायोगिक परियोजना के तौर पर किया जाएगा, जिसकी संभावना अगस्त में है. रंजन ने कहा कि अगर यह सफल रहा, तो इन्हें पूरे राज्य में लगाया जाएगा, क्योंकि इन उपकरणों की कीमत कम है.

Published: 17 Jul, 2026 | 04:31 PM

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