किसान उत्पादक संगठन ने सोलर एनर्जी से बचाए 23 लाख रुपये, 61 फीसदी बिजली जरूरत पूरी होने से खर्च भी घटा 

मराठवाड़ा क्षेत्र के लगभग 79 फीसदी छोटे किसान हैं, जो सीमित वित्तीय सुरक्षा के कारण जलवायु संबंधी झटकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं. क्षेत्र में किसान उत्पादक संगठन (FPO) से जुड़कर बिजली जरूरत को सोलर एनर्जी के जरिए पूरा किया जा रहा है. इससे सिंचाई आदि पर होने वाला खर्च घट गया है.

नोएडा | Published: 8 Jun, 2026 | 02:29 PM

महाराष्ट्र का एक सूखा प्रभावित क्षेत्र मराठवाड़ा जो पश्चिमी घाट की वर्षा छाया में स्थित है, घटते भूजल स्तर और बार-बार पड़ने वाले सूखे के कारण गंभीर कृषि संकट का सामना कर रहा है. सूखे की चपेट में होने के बावजूद कृषि मराठवाड़ा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जहां लगभग 43 लाख एकड़ कृषि योग्य भूमि जल की कमी, बदलते मौसम और अनियमित मानसून की वजह से गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है.

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के लगभग 79 फीसदी छोटे किसान हैं, जो सीमांत लाभ कमाते हैं और सीमित वित्तीय सुरक्षा के कारण जलवायु संबंधी झटकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं. क्षेत्र में किसान उत्पादक संगठन (FPO) जैसे grassroots कृषि समूह बिजली पर गंभीर निर्भरता रखते हैं क्योंकि उनकी मुख्य गतिविधियों में कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण और माइक्रो इरिगेशन शामिल हैं, जो बिजली पर अत्यधिक निर्भर हैं. जल की कमी और ग्रिड बिजली पर निर्भरता के कारण अधिकांश किसान अब नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों की ओर रुख कर रहे हैं, जो अधिक विश्वसनीय और लागत प्रभावी विकल्प है.

4 हजार किसानों के संगठन कर रहा रूफटॉप सोलर इस्तेमाल

बिजली की बार-बार होने वाली अनियमित कटौती के कारण मराठवाड़ा के कई एफपीओ अब रूफटॉप सोलर जैसी विश्वसनीय और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों की ओर बढ़ रहे हैं. कल्लम, धाराशिव (महाराष्ट्र) स्थित मराठवाड़ा एग्रो प्रोसेस किसान उत्पादक कंपनी, जिसमें 4000 से अधिक किसान शामिल हैं, फ्रेयर एनर्जी के साथ मिलकर रूफटॉप सोलर की ओर अग्रसर हुई है.

एफपीओ की ऊर्जा जरूरत का 60 फीसदी सोलर से पूरी

221-kW का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किया गया, जो एफपीओ की कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 61% पूरा करता है. एफपीओ की वार्षिक बिजली आवश्यकता 5,15,500 kWh अनुमानित है, जिसमें सोलर प्लांट सालाना लगभग 3,16,800 kWh बिजली उत्पन्न करता है. यह सिस्टम मुख्य रूप से दूध प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज और अन्य सामान्य उपयोगिता कार्यों के लिए उपयोग किया जा रहा है, जिससे अधिक स्थिर और कुशल ऊर्जा पहुंच रही है.

बिजली पर खर्च होने वाले 23 लाख रुपये बचाए

इंस्टॉलेशन के बाद एफपीओ ने 23,12,640 रुपये की सालाना बचत दर्ज की है, जिसमें 3 से 4 वर्षों में निवेश पर वापसी (ROI) होने का अनुमान है. रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन ने परिचालन लागत कम करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति, बेहतर स्टोरेज दक्षता और समग्र उत्पादकता बढ़ाने में योगदान दिया है, जिससे एफपीओ की परिचालन लचीलापन मजबूत हुआ है.

रूफटॉप सोलर से किसानों की लागत घटी

फ्रेयर एनर्जी की को-फाउंडर और डायरेक्टर राधिका चौधरी ने कहा कि रूफटॉप सोलर की ओर किसान नेतृत्व वाले उद्यमों द्वारा परिचालन स्थिरता और लंबे समय के विकास को अपनाने का व्यापक बदलाव को दिखाता है. रूफटॉप सोलर में निवेश करने वाले एफपीओ न केवल परिचालन लागत कम कर रहे हैं बल्कि महत्वपूर्ण कृषि व्यवसाय गतिविधियों के लिए विश्वसनीय ऊर्जा पहुंच भी पक्की कर रहे हैं. यह इंस्टॉलेशन दिखाता है कि स्वच्छ ऊर्जा कैसे दक्षता बढ़ा सकती है, लागत में पूर्वानुमानिता ला सकती है और ग्रामीण कृषि-उद्यमों की दीर्घकालिक व्यवहार्यता को मजबूत कर सकती है, साथ ही किसानों के लिए लचीले और व्यावसायिक रूप से टिकाऊ संचालन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

20 हजार से ज्यादा घरों को सोलर एनर्जी देने का लक्ष्य

मराठवाड़ा में रूफटॉप सोलर की गति स्पष्ट है. क्षेत्र के आठ जिलों में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत कुल 93,251 रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 341 मेगावाट है. छत्रपति संभाजीनगर जिला 37,487 से अधिक इंस्टॉलेशन के साथ आगे है. महाराष्ट्र में लगभग 13 MW स्थापित सोलर क्षमता के साथ और 2030 तक 20,000 से अधिक घरों और 2,000 MSMEs को सोलर ऊर्जा उपलब्ध कराने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ फ्रेयर एनर्जी ग्रामीण और अर्ध शहरी महाराष्ट्र को भविष्य की ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

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