बेलगावी की चीनी मिलों पर गन्ने का संकट! महाराष्ट्र की जल्दी पेराई ने कर्नाटक की बढ़ाई चिंता

Sugar Mills: बेलगावी की चीनी मिलों के सामने इस सीजन गन्ने की कमी की चुनौती बढ़ सकती है. महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से पेराई शुरू होने से सीमा क्षेत्र का गन्ना वहां की मिलों में जाने की आशंका है. वहीं कम बारिश से गन्ने की बढ़त प्रभावित हुई है, जिससे चीनी रिकवरी और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.

नोएडा | Published: 12 Sep, 2026 | 10:20 AM

Belagavi Sugarcane Crisis: कर्नाटक के बेलगावी जिले में इस बार चीनी मिलों के सामने गन्ना जुटाने की चुनौती बढ़ सकती है. इसकी बड़ी वजह महाराष्ट्र का 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने का फैसला है. वहीं, कर्नाटक ने अभी पेराई शुरू करने की तारीख तय नहीं की है. ऐसे में महाराष्ट्र से सटे बेलगावी के इलाकों का गन्ना वहां की मिलों की ओर जाने की आशंका है. अगर ऐसा हुआ तो कर्नाटक की मिलों को किसानों से गन्ना लेने के लिए ज्यादा कोशिश और प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है.

बेलगावी में करीब 30 मिलें होंगी चालू

बेलगावी जिले में पिछले सीजन में करीब 28 चीनी मिलें चली थीं. इन मिलों ने लगभग 100 दिन तक पेराई की और करीब 1.75 करोड़ टन गन्ना पेरा था. इस सीजन में करीब 30 मिलों के शुरू होने की उम्मीद है. कई मिलों ने अपनी पेराई क्षमता भी बढ़ाई है. इसके साथ ही चीनी बनाने के बाद मिलने वाले दूसरे उत्पादों से जुड़ी सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है. ऐसे में मिलों को इस बार ज्यादा गन्ने की जरूरत होगी. लेकिन गन्ने की उपलब्धता को लेकर पहले ही चिंता बनी हुई है.

कम बारिश ने बढ़ाई किसानों और मिलों की चिंता

इस साल कई इलाकों में बारिश सामान्य से कम रही है. इसका असर गन्ने की बढ़त पर पड़ा है. अगर अक्टूबर में ही पेराई शुरू होती है तो शुरुआती दौर में मिलों को पूरी तरह तैयार या ज्यादा पका हुआ गन्ना कम मिल सकता है. इसका सीधा असर चीनी की रिकवरी पर पड़ सकता है. गन्ने से कम चीनी निकलने पर कुल उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. इसका असर किसानों को मिलने वाले उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी और मिलों की कमाई पर भी पड़ने की आशंका है.

महाराष्ट्र पहले शुरू हुआ तो बदल जाएगा पूरा समीकरण

बेलगावी की मिलों को आमतौर पर महाराष्ट्र से पहले पेराई शुरू करने का फायदा मिलता रहा है. दोनों राज्यों की सीमा से लगे इलाकों में एक ही किसानों और गन्ने के लिए मिलों के बीच मुकाबला रहता है. पिछले साल कर्नाटक की मिलों ने 8 नवंबर से पेराई शुरू की थी और ज्यादातर मिलें इसके एक-दो दिन बाद चालू हो गई थीं. वहीं महाराष्ट्र की मिलें शुरुआती समय में बंद थीं. इसका फायदा बेलगावी की मिलों को मिला और सीमा क्षेत्र से गन्ना जुटाना आसान रहा. लेकिन इस बार महाराष्ट्र की मिलें 15 अक्टूबर से ही शुरू हो रही हैं. ऐसे में कर्नाटक की मिलों को पहले मिलने वाला यह फायदा खत्म हो सकता है.

अक्टूबर में पेराई से रिकवरी पर भी सवाल

गन्ने से चीनी की रिकवरी आमतौर पर दिसंबर के बाद बेहतर होती है. अगर मिलें अक्टूबर में पेराई शुरू करके जनवरी के अंत तक सीजन खत्म कर देती हैं, तो ज्यादा रिकवरी वाले गन्ने की पेराई के लिए समय कम बच सकता है. पिछले सीजन में भी बेलगावी की मिलों को गन्ने की उपलब्धता को लेकर परेशानी हुई थी. मिलों को रोजाना 2 लाख टन से ज्यादा गन्ना मिलने की उम्मीद थी, लेकिन असल उपलब्धता इससे कम रही थी.

किसानों को अपने पाले में लाने की बढ़ेगी कोशिश

अब एक तरफ महाराष्ट्र की मिलें जल्दी शुरू हो रही हैं और दूसरी तरफ कम बारिश के कारण गन्ने की उपलब्धता पर सवाल है. ऐसे में बेलगावी की चीनी मिलों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है. मिलों को सीमा से जुड़े इलाकों में किसानों से पहले और ज्यादा संपर्क करना पड़ सकता है. किसानों को बेहतर सुविधाएं और समय पर भुगतान जैसे मुद्दे भी इस मुकाबले में अहम हो सकते हैं. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कर्नाटक अपनी पेराई की तारीख कब घोषित करता है और गन्ना जुटाने के लिए मिलें क्या रणनीति अपनाती हैं.

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