Sugarcane Crushing Season 2026-27: देश में घरेलू मांग के मुकाबले करीब 30-40 लाख टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होने के बावजूद चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है. इसी कड़ी में केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक सरकारों से 2026-27 का गन्ना पेराई सीजन जल्द शुरू करने का आग्रह किया है. सरकार का उद्देश्य मौजूदा चीनी स्टॉक खत्म होने से पहले नई चीनी बाजार में पहुंचाना है, ताकि आपूर्ति बनी रहे और कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके. हालांकि, चीनी मिलों का कहना है कि समय से पहले पेराई शुरू करने पर उन्हें और किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है. इसकी भरपाई के लिए उद्योग ने केंद्र से विशेष सब्सिडी की मांग की है.
सितंबर अंत तक 35 लाख टन स्टॉक बचने का अनुमान
देश में पिछले वर्ष करीब 280 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था और सीजन की शुरुआत लगभग 50 लाख टन के शुरुआती स्टॉक के साथ हुई थी. घरेलू खपत भी करीब 280 लाख टन रहने का अनुमान है. इसके बावजूद 30 सितंबर तक करीब 35 लाख टन चीनी स्टॉक बचने की संभावना जताई जा रही है. केंद्र सरकार चाहती है कि मौजूदा स्टॉक पूरी तरह खत्म होने से पहले ही नई चीनी बाजार में आने लगे. महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक मिलकर देश के करीब 80 फीसदी चीनी उत्पादन में योगदान करते हैं. इसी वजह से इन राज्यों से जल्द पेराई शुरू करने का आग्रह किया गया है. 8 सितंबर को नई दिल्ली में चीनी उद्योग के साथ बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें तीनों राज्यों के अधिकारियों को शामिल होने के लिए बुलाया गया है.
20 से 25 अक्टूबर के बीच शुरू हो सकती है पेराई
चीनी उद्योग के मुताबिक, सामान्य तौर पर मिलें करीब 15 नवंबर से पेराई शुरू करती हैं, जबकि इस बार 20 से 25 अक्टूबर के बीच पेराई शुरू करने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, गन्ना कटाई के लिए मजदूरों की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है और आमतौर पर मजदूर दिवाली के बाद पहुंचते हैं. उद्योग का कहना है कि समय से पहले पेराई शुरू करने पर चीनी की रिकवरी में करीब 1.5 प्रतिशत अंक की कमी आ सकती है. वहीं, किसानों से मिलने वाले गन्ने के वजन में भी 10-15 प्रतिशत तक कमी होने की आशंका है.
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मिलों और किसानों के लिए मांगी विशेष आर्थिक मदद
समय से पहले पेराई से संभावित नुकसान की भरपाई के लिए चीनी उद्योग केंद्र के सामने विशेष सहायता का प्रस्ताव रखने की तैयारी में है. उद्योग की मांग है कि चीनी मिलों को 500 रुपये प्रति टन और गन्ना किसानों को सीधे 300 रुपये प्रति टन की विशेष सब्सिडी दी जाए. इसके अलावा केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है. शुरुआती आवेदनों में करीब 8 लाख टन की मांग सामने आई थी, जिसके बाद बाकी कोटे के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. व्यापारियों के लिए अनुमत चीनी स्टॉक सीमा भी 400 टन से घटाकर 200 टन कर दी गई है.
चीनी बिक्री और स्टॉक पर सरकार की कड़ी नजर
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार स्टॉक और बिक्री की लगातार निगरानी कर रही है. पहले मिलों से 17-19 अगस्त के दौरान व्यापारियों को बेची गई चीनी का विवरण मांगा गया था. इसके बाद 21-25 अगस्त की बिक्री का डेटा लिया गया. अब मिलों को 20-31 अगस्त के बीच हुई पूरी चीनी बिक्री का विवरण देने का निर्देश दिया गया है. सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बाजार में उपलब्ध चीनी का स्टॉक कहां रखा गया है. इससे पहले एक्स-मिल चीनी की कीमत करीब 68 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी और खुदरा कीमत लगभग 80 रुपये प्रति किलो हो गई थी. सरकारी कदमों के बाद एक्स-मिल कीमत घटकर करीब 41 रुपये प्रति किलो रह गई है, लेकिन कीमतों में और कमी लाने के विकल्पों पर अभी भी विचार जारी है.