देश में त्योहारों के सीजन से पहले चीनी की उपलब्धता को लेकर बड़ी राहत की खबर है. चीनी उद्योग के दो प्रमुख संगठनों इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (NFCSF) ने कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. दोनों संगठनों ने कहा कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है. उन्होंने देश में चीनी की संरचनात्मक कमी होने की बात को भी खारिज किया है. संगठनों के मुताबिक, सरकार के साथ मिलकर किए गए प्रयासों से चीनी की सप्लाई स्थिर हुई है. इसके साथ ही, मिल स्तर पर चीनी के दाम अपने उच्चतम स्तर से करीब 30 फीसदी तक कम हुए हैं. संगठनों ने कहा कि बाजार में चीनी की कमी को लेकर फैली आशंकाएं भी अब दूर हो गई हैं.
चीनी उद्योग के संगठनों ने कहा कि 2025-26 सीजन के ज्यादातर समय मिलों को चीनी की कीमत उत्पादन लागत से कम मिली. जून में देशभर में मिल स्तर पर चीनी का औसत भाव करीब 39.50-40 रुपये प्रति किलो रहा. जुलाई में यह 40-40.50 रुपये और अगस्त में करीब 41-41.50 रुपये प्रति किलो रहा. वहीं, उद्योग की औसत उत्पादन लागत करीब 42 रुपये प्रति किलो है. संगठनों के मुताबिक, अगस्त के तीसरे हफ्ते में चीनी का भाव थोड़े समय के लिए 49-50 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा था. लेकिन यह तेजी सिर्फ 2-3 लाख टन चीनी की सीमित मात्रा में आई थी. इसलिए इसे पूरे सीजन की कमाई या बड़े मुनाफे के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
मिल स्तर पर चीनी के दाम 30 फीसदी घटे
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठनों ने कहा कि सरकार की ओर से कोटा जारी करने और नियामकीय स्तर पर बिक्री की प्रक्रिया तेज करने के बाद मिल स्तर पर चीनी के दाम करीब 30 फीसदी घटे हैं. इसका असर अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है. चीनी मिलों ने 2026-27 का पेराई सीजन भी करीब 10-15 दिन पहले शुरू करने की तैयारी की है. इसके अलावा, तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष पेराई का काम लगातार जारी है. इससे त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से पहले बाजार में नई चीनी की सप्लाई बढ़ाने में मदद मिलेगी.
पहली छमाही के लिए 13 लाख टन चीनी बिक्री कोटा
चीनी उद्योग के संगठनों ने कहा कि सितंबर 2026 की पहली छमाही के लिए सरकार ने 13 लाख टन चीनी की बिक्री का कोटा तय किया है. यह कोटा उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की हर पखवाड़े बिक्री कोटा व्यवस्था के तहत जारी किया गया है. संगठनों के मुताबिक, 2025-26 सीजन में भारत में चीनी का शुद्ध घरेलू उत्पादन करीब 279 लाख टन रहा है. इसमें करीब 309 लाख टन के कुल उत्पादन में से 30 लाख टन चीनी को एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया गया है. देश की सालाना खपत करीब 280-285 लाख टन है. इसके बाद सितंबर 2026 के अंत तक करीब 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बचने का अनुमान है.
चीनी की आवक और शुल्क-मुक्त आयात से बढ़ेगी सप्लाई
संगठनों ने कहा कि अक्टूबर की शुरुआती पेराई से नई चीनी बाजार में आएगी. इसके अलावा, सरकार ने TRQ के तहत 10 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति दी है, जिसमें करीब 8 लाख टन का आवंटन हो चुका है. सरकार ने 2 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अतिरिक्त सुविधा भी दी है. इसके साथ ही रिफाइनर करीब 3-3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में 15 अक्टूबर तक उपलब्ध करा सकते हैं. संगठनों का कहना है कि इन सभी स्रोतों से देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी और त्योहारों के सीजन में स्टॉक की कोई बड़ी कमी नहीं होगी.
गन्ना किसानों को 97 फीसदी बकाया भुगतान का दावा
चीनी उद्योग के संगठनों ने कहा कि मिलों ने किसानों को गन्ने का करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है. यह कुल गन्ना बकाया राशि का करीब 97 फीसदी है. संगठनों के मुताबिक, इससे गन्ना किसानों का बकाया ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर के करीब बना हुआ है. ISMA और NFCSF ने बाजार में चीनी की कमी से जुड़ी अफवाहों को खारिज करते हुए लोगों से ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है. दोनों संगठनों ने कहा कि त्योहारों के सीजन में चीनी की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने की कोशिश जारी रहेगी और उचित कीमतों पर बाजार में चीनी उपलब्ध कराई जाएगी.