Plantation Sector: भारत में केले की खेती करने वाले किसानों के लिए आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सरकार प्लांटेशन सेक्टर यानी बागान क्षेत्र में विदेशी निवेश के नियमों को और आसान बनाने पर विचार कर रही है. इसमें केले जैसी दूसरी व्यावसायिक फसलों को भी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के दायरे में लाने की तैयारी हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो केले की खेती, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जुड़े कारोबार में निवेश बढ़ने की उम्मीद है.
केले को FDI के दायरे में लाने पर विचार
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों से बातचीत कर रहा है. मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, प्लांटेशन सेक्टर में FDI को और उदार बनाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं. इसमें केले जैसी फसलों को शामिल करने पर भी विचार हो रहा है. अभी भारत में चाय, कॉफी, रबर, इलायची, पाम और ऑलिव ऑयल ट्री प्लांटेशन में 100 फीसदी FDI ऑटोमैटिक रूट से आने की अनुमति है. वहीं, इन फसलों के अलावा दूसरे प्लांटेशन सेक्टर में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं है. सरकार का नया कदम इस दायरे को बढ़ाने की दिशा में हो सकता है. इससे खेती से जुड़े कारोबार में विदेशी कंपनियों और निवेशकों के लिए रास्ता खुल सकता है.
भारत में सबसे ज्यादा केले की पैदावार
भारत केले के उत्पादन के मामले में दुनिया में सबसे आगे है. देश में हर साल 3 करोड़ टन से ज्यादा केले का उत्पादन होता है. दुनिया के कुल केले के उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 26.45 फीसदी है. इसके बावजूद वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी काफी कम है. दुनिया के केले के निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 1 फीसदी ही है. यानी उत्पादन के मामले में भारत बहुत आगे है, लेकिन एक्सपोर्ट में अभी काफी गुंजाइश बाकी है.
केले के एक्सपोर्ट में तेजी
पिछले कुछ समय में भारत से केले के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 37.75 करोड़ डॉलर (3,567.02 करोड़ रुपये) के केले का एक्सपोर्ट किया. यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 30 फीसदी ज्यादा है. सरकार आने वाले सालों में केले के एक्सपोर्ट को 100 करोड़ डॉलर (94,49,050 रुपये) तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसके लिए नए बाजारों में भारतीय केले की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
इन देशों में पहुंच रहा भारतीय केला
भारत से केले का एक्सपोर्ट ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, नेपाल, कतर, कुवैत, बहरीन, अफगानिस्तान और मालदीव जैसे देशों में होता है. इसके अलावा अमेरिका, रूस, जापान, जर्मनी, चीन, नीदरलैंड, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे बड़े बाजारों में भी भारतीय केले के लिए काफी संभावनाएं हैं. अगर इन बाजारों में एक्सपोर्ट बढ़ता है तो किसानों को अपनी उपज के लिए बड़े बाजार मिल सकते हैं.
इन राज्यों में सबसे ज्यादा होती है केले की खेती
भारत में आंध्र प्रदेश केले का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है. इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है. वित्त वर्ष 2022-23 के आंकड़ों के मुताबिक, इन पांच राज्यों की देश के कुल केला उत्पादन में करीब 67 फीसदी हिस्सेदारी थी. अगर सरकार FDI नियमों में बदलाव करती है और केले को विदेशी निवेश के लिए खोलती है, तो इससे खेती के साथ-साथ स्टोरेज, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में भी निवेश बढ़ सकता है. इसका फायदा लंबे समय में किसानों और कृषि से जुड़े कारोबार को मिल सकता है.