तमिलनाडु के मदुरै जिले के मेलूर, वाडिपट्टी और आसपास के इलाकों में पानी की कमी से करीब 4,000 एकड़ में लगी गन्ने की फसल पर संकट मंडरा रहा है. ये इलाके बारिश पर निर्भर हैं. किसानों को डर है कि अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो पानी की कमी से गन्ने की फसल सूख सकती है. कुल गन्ना क्षेत्र में करीब 1,500 एकड़ में हरा गन्ना और बाकी हिस्से में बैंगनी गन्ने की खेती की गई है. सिंचाई के कुओं का पानी सूखने से किसान अब फसल बचाने के लिए बोरवेल पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं.
मेलूर के गन्ना किसान एम. सतीश ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उन्होंने करीब 5 एकड़ में बैंगनी गन्ने की खेती की है. उनके खेत में सिंचाई के लिए दो कुएं और दो बोरवेल हैं, लेकिन हाल ही में दोनों कुएं सूख गए हैं. अब फसल को बचाने के लिए बोरवेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि अगर अगले तीन हफ्तों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो गन्ने की फसल सूख सकती है. पानी की कमी के कारण नए लगाए गए गन्ने की बढ़वार भी काफी धीमी हो गई है.
पानी की कमी से गन्ना फसल को नुकसान
किसान एम. सतीश ने कहा कि इलाके में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से कई किसान पहले ही गन्ने की फसल का नुकसान झेल चुके हैं. सिंचाई संकट के अलावा किसानों की एक बड़ी चिंता अलंगानल्लूर नेशनल कोऑपरेटिव शुगर मिल का लंबे समय से बंद रहना है. किसानों का कहना है कि मिल बंद होने से उन्हें गन्ना बेचने और उसकी सही कीमत पाने का भरोसेमंद रास्ता नहीं मिल रहा है.
8 साल से बंद सहकारी चीनी मिल
तमिलनाडु शुगरकेन फार्मर्स एसोसिएशन और अलंगानल्लूर नेशनल कोऑपरेटिव शुगर मिल समिति के अध्यक्ष एन. पलानिचामी ने कहा कि किसानों ने मिल को जल्द से जल्द दोबारा खोलने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया है. एन. पलानिचामी ने कहा कि कई बार विरोध प्रदर्शन के बावजूद आठ साल से ज्यादा समय में सहकारी चीनी मिल को दोबारा शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने सरकार से मिल को फिर से शुरू करने के लिए बजट जारी करने और गन्ना किसानों की मदद करने की मांग की.
चीनी मिल बंद होने से घटा गन्ने का रकबा
उन्होंने कहा कि मिल लंबे समय से बंद होने के कारण इलाके में गन्ने की खेती का रकबा भी काफी घट गया है. किसानों ने अब आंदोलन तेज करने का फैसला किया है. इसके तहत सितंबर के पहले हफ्ते में अलंगानल्लूर से मदुरै जिला कलेक्ट्रेट तक वॉकथॉन निकाला जाएगा. किसान इस मार्च के जरिए सिंचाई की समस्या दूर करने और सहकारी चीनी मिल को जल्द खोलने की मांग करेंगे.