India-US Trade Deal: बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद और बिहार के पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में कम या शून्य आयात शुल्क पर आने की अनुमति दी जाती है, तो इसका सीधा असर देश के किसानों पर पड़ सकता है. सुधाकर सिंह ने यह पत्र दोनों देशों के बीच हाल में हुई व्यापार वार्ता के बाद लिखा है. उनका कहना है कि इस समझौते के तहत कई अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में बेहद कम शुल्क पर आ सकते हैं. ऐसे में सरकार को किसी भी फैसले से पहले किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को गंभीरता से देखना चाहिए.
किन कृषि उत्पादों के आयात की आशंका?
सांसद ने अपने पत्र में उन कृषि और खाद्य उत्पादों का भी जिक्र किया है, जिनके कम शुल्क पर भारत आने की संभावना बताई जा रही है. इनमें मक्का, सोयाबीन और मूंगफली के अलावा बादाम, अखरोट और पिस्ता जैसे मेवे शामिल हैं. इसके साथ ही सेब, अंगूर, संतरे, चीज, मक्खन और मिल्क पाउडर जैसे डेयरी उत्पादों का भी आयात बढ़ सकता है. चिकन और अंडे के अलावा लकड़ी और पशु आहार भी संभावित आयात की सूची में बताए गए हैं.
छोटे किसानों के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल?
सुधाकर सिंह का कहना है कि अमेरिकी और भारतीय कृषि व्यवस्था में बड़ा अंतर है. अमेरिका में खेती बड़े स्तर पर होती है और किसानों को सरकार की ओर से काफी सब्सिडी भी मिलती है. वहीं भारत में खेती का बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों पर निर्भर है, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं. ऐसे में अगर अमेरिका से कृषि उत्पाद कम कीमत पर भारत पहुंचते हैं, तो स्थानीय किसानों को उनसे मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है. सस्ते आयात के कारण घरेलू बाजार में अनाज, फल और डेयरी उत्पादों के दाम नीचे आने की आशंका है. इसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ सकता है.
बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर की चिंता
सांसद ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य की करीब 70 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है. इसलिए कृषि उत्पादों की कीमतों में बड़ी गिरावट का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. किसानों के साथ-साथ गांवों में कृषि से जुड़े छोटे दुकानदारों, कारोबारियों और दूसरे लोगों की आमदनी भी प्रभावित हो सकती है. सुधाकर सिंह ने आशंका जताई कि अगर इस तरह के आयात को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के मंजूरी दी गई, तो इससे देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता पर भी असर पड़ सकता है.
अमेरिकी अदालत के फैसले का भी दिया हवाला
सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के 20 फरवरी 2026 के फैसले का भी जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि अदालत ने ‘अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम’ यानी IEEPA, 1977 के तहत लगाए गए कुछ आयात शुल्क को अवैध माना था और कहा था कि इस तरह के शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास है. उनका कहना है कि अमेरिका में व्यापार शुल्क को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट न होने के बीच भारत को किसी अंतरिम समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.
JPC से समीक्षा कराने की मांग
सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि अमेरिकी कृषि उत्पादों से जुड़े किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले उसकी कृषि एवं किसान कल्याण संबंधी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से समीक्षा कराई जाए. उनका कहना है कि इस तरह की समीक्षा से यह समझने में मदद मिलेगी कि समझौते का भारतीय किसानों, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर लंबे समय में क्या असर होगा. उन्होंने सरकार से किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए किसी भी बाहरी दबाव में फैसला नहीं लेने की अपील की है.