किसानों को बड़ी राहत, सरकार ने कपास की खरीदी 15 दिन के लिए बढ़ाई.. रेट में गिरावट
कपास किसानों को राहत देते हुए सरकार ने MSP पर खरीद 15 दिन बढ़ाई है. CCI केंद्र सीमित अवधि तक खुले रहेंगे. विदर्भ में 25 फीसदी फसल अब भी बिना बिकी है. भारत-अमेरिका ड्यूटी-फ्री आयात खबर के बाद बाजार भाव 8,110 से गिरकर 7,500 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए.
Cotton Procurement: महाराष्ट्र के कपास किसानों के लिए राहत की खबर है. सरकार ने कपास किसानों को दाम गिरने से बचाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कपास खरीद की अवधि 15 दिन और बढ़ा दी है. यह फैसला 27 फरवरी की तय समय-सीमा खत्म होने के एक दिन बाद लिया गया. यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह को लिखे गए पत्र के बाद उठाया गया, जिसमें किसानों को नुकसान से बचाने के लिए खरीद अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी. वहीं, भारत-अमेरिका ड्यूटी-फ्री आयात खबर के बाद बाजार भाव में गिरावट आई है.
हालांकि, व्यापारियों और किसानों का कहना है कि 15 दिन का विस्तार पर्याप्त नहीं है, क्योंकि अभी भी काफी मात्रा में कपास बिना बिके पड़ी है. उनका मानना है कि सरकारी खरीद कम से कम 30 अप्रैल तक जारी रहनी चाहिए. सरकारी एजेंसी कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने तय कार्यक्रम के अनुसार 27 फरवरी को कपास की खरीद बंद कर दी थी. लेकिन शनिवार को फैसला लिया गया कि खरीद प्रक्रिया को 15 दिन और जारी रखा जाएगा. CCI के चेयरमैन ललित कुमार गुप्ता ने इसकी पुष्टि की है.
कपास के रेट में गिरावट
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस 15 दिन की अवधि में खरीद केंद्र सोमवार से शुक्रवार तक खुले रहेंगे. बताया जा रहा है कि लगभग 25 प्रतिशत कपास की फसल, खासकर विदर्भ क्षेत्र में, अभी भी बिना बिके पड़ी है. वहीं, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप मिलने से पहले ही यह खबर आई कि भारत अमेरिका से एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कपास का ड्यूटी-फ्री आयात करेगा. इस खबर के बाद खुले बाजार में कपास के दाम गिर गए. जहां अच्छी गुणवत्ता वाली कपास का एमएसपी 8,110 रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं बाजार में कीमत घटकर करीब 7,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गई. व्यापारियों का कहना है कि अगर इस समय एमएसपी पर खरीद बंद कर दी जाती, तो किसान बाजार की अनिश्चितता के भरोसे रह जाते.
बाजार में 6,000 रुपये क्विंटल भी नहीं मिल रहे भाव
बाद में तोड़ी जाने वाली कम गुणवत्ता की कपास को बाजार में 6,000 रुपये प्रति क्विंटल भी नहीं मिल रहे हैं, जबकि CCI केंद्र पर गुणवत्ता के अनुसार ऐसी कपास को करीब 7,500 रुपये मिल सकते हैं. CCI की वेबसाइट के अनुसार, 20 फरवरी तक देशभर में 491 लाख क्विंटल कपास की खरीद की गई, जिसकी कीमत 3,900 करोड़ रुपये से अधिक है. वहीं महाराष्ट्र में 20 फरवरी तक 113 लाख क्विंटल कपास खरीदी गई, जिसके लिए 9,020 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया.
25 फीसदी कपास अभी भी किसानों और व्यापारियों के पास
वहीं, पीछले हफ्ते खबर सामने आई थी कि महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में करीब 25 फीसदी कपास अभी भी किसानों और व्यापारियों के पास पड़ी है. तब कहा गया था कि यदि 27 फरवरी के बाद यदि कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) खरीद बंद कर देता है तो कीमतों में और गिरावट का खतरा है. बेहतर दाम पाने के लिए हजारों किसानों ने CCI में पंजीकरण कर स्लॉट बुक किए थे. अब तक जिले में CCI ने 15,74,462 क्विंटल से ज्यादा कपास खरीदी है, लेकिन बड़ी मात्रा में फसल अब भी नहीं बिकी है. खरीद की आखिरी तारीख नजदीक आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
इस साल करीब 5 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती हुई
रिपोर्ट के अनुसार, यवतमाल पारंपरिक रूप से बड़ा कपास उत्पादक जिला है और इस साल करीब 5 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती हुई. 2024-25 सीजन में भारी नुकसान के बाद कई किसान आर्थिक संकट में आ गए थे. अगली फसल के लिए पैसे न होने पर भी उन्होंने कर्ज लेकर खेती जारी रखी. लेकिन खरीफ 2025 में ज्यादा बारिश से हजारों हेक्टेयर फसल खराब हो गई. जो कपास आमतौर पर दशहरे तक मंडी पहुंच जाती थी, वह इस बार दिवाली के आसपास घर पहुंची. मजबूरी में कई किसानों ने अपनी उपज निजी व्यापारियों को 7,200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेची, जिससे उन्हें करीब 800 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ.