प्याज किसानों के लिए 10 हजार करोड़ का पैकेज जारी होगा, गिरते भाव से राहत देने की योजना

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ ने कहा कि सालों से चले आ रहे एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध, कीमतों में भारी गिरावट और मौसम से जुड़ी दिक्कतों ने प्याज उगाने वालों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है. संघ ने कहा है कि प्याज के बाजार में सरकार के बार-बार के दखल से किसानों की आमदनी पर बुरा असर पड़ा है.

नोएडा | Updated On: 31 May, 2026 | 10:36 PM

लगातार प्याज की कीमतों में गिरावट से आर्थिक चोट खा रहे प्याज किसानों को बड़ी राहत देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का राहत पैकेज केंद्र सरकार जारी करने की तैयारी कर रही है. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ ने केंद्र से राहत पैकेज की मांग उठाई है, जिसके बाद दावा किया जा रहा है कि सरकार की ओर से सकारात्मक रुख दिखाया गया है और किसानों के नुकसान की भरपाई करने का भरोसा दिया गया है.

प्याज बाजार में सरकार के बार-बार दखल से आमदनी पर असर

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संघ ने कहा कि सालों से चले आ रहे एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध, कीमतों में भारी गिरावट और मौसम से जुड़ी दिक्कतों ने प्याज उगाने वालों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है. महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने केंद्र सरकार से किसानों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करने की अपील की है. संघ ने कहा है कि प्याज के बाजार में सरकार के बार-बार के दखल से किसानों की आमदनी पर बुरा असर पड़ा है.

एक्सपोर्ट रोक और एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने से भारी नुकसान

संघ के संस्थापक अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि 2019, 2020 और 2023-24 में एक्सपोर्ट पर लगाए गए प्रतिबंधों के साथ-साथ अलग-अलग समय पर लगाई गई 40 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी और न्यूनतम एक्सपोर्ट कीमत की शर्तों के कारण प्याज उगाने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. संघ के अनुसार केंद्र सरकार के उस फैसले से भी कीमतें और गिर गईं और किसानों को नुकसान हुआ, जिसके तहत NAFED और NCCF के जरिए घरेलू बाजार में कम कीमतों पर प्याज का बफर स्टॉक जारी किया गया था.

उपभोक्ताओं को बचाने के लिए किसानों पर चोट क्यों

दिघोले ने कहा कि उपभोक्ताओं के कल्याण के नाम पर प्याज उगाने वालों को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियों को तुरंत रोका जाना चाहिए. केंद्र सरकार को फौरन 10,000 करोड़ रुपये के एक विशेष प्याज आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए. संघ ने दावा किया कि किसानों को भारी बारिश, ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा, फसलों में लगने वाली बीमारियों और नकली बीजों के चलन से भी भारी नुकसान हुआ है.

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन किसानों ने 2025 में प्याज का भंडारण किया था और 2026 में उसे बेचा था. उन्हें बहुत कम कीमतों पर अपना प्याज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा. सीधी आर्थिक मदद की मांग करते हुए संघ ने कहा कि किसानों को सालों से हुए कुल नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की रकम सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जानी चाहिए.

15 लाख किसान परिवार प्याज पर निर्भर

महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है, जहां लगभग 30 जिलों में प्याज की खेती की जाती है. दिघोले का अनुमान है कि हर साल लगभग 10 से 15 लाख किसान परिवार प्याज की खेती पर ही निर्भर रहते हैं. संघ ने इस क्षेत्र के लिए एक व्यापक सहायता ढाँचे की भी मांग की है, जिसमें प्रमाणित प्याज़ के बीजों पर सब्सिडी, भंडारण शेड और गोदाम बनाने के लिए पूरी आर्थिक मदद, और किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) तथा सहकारी समितियों द्वारा सीधे उपभोक्ताओं को प्याज़ बेचने की सुविधा के लिए एक विशेष कोष का गठन शामिल है.

किसानों की कच्चे प्याज की बिक्री पर निर्भरता कम करना जरूरी

संघ ने नासिक, अहिल्यानगर, पुणे, बीड, सतारा, छत्रपति संभाजीनगर, जलगांव, धुले और सोलापुर जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों में प्याज प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने की भी मांग की है. किसानों का संगठन चाहता है कि प्याज पाउडर, प्याज के फ्लेक्स, सूखे प्याज, प्याज का पेस्ट और दूसरे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट बनाने वाली किसानों के मालिकाना हक वाली यूनिट्स को मदद मिले, ताकि कच्चे प्याज की बिक्री पर निर्भरता कम हो सके.

प्याज उत्पादक किसान संघ की मांगें

संघ का एक ‘प्याज निर्यात प्रोत्साहन फंड’ बनाना जाए. बार-बार लगने वाले निर्यात बैन और ड्यूटी की जगह एक स्थिर, लंबे समय की निर्यात पॉलिसी लाना. और जब भी कीमतें अचानक गिरें, तो किसानों को बचाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय प्याज स्थिरीकरण फंड’ बनाना.

एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि स्टोर किए गए प्याज को मजबूरी में कम दाम पर बेचने से रोकने के लिए कम ब्याज वाले या बिना ब्याज वाले लोन दिए जाएं; प्याज की खरीद और स्टोरेज में लगी सहकारी समितियों को आर्थिक मदद दी जाए; और किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र ‘राष्ट्रीय प्याज उत्पादक निगम’ बनाया जाए।

दिघोले ने कहा अगर प्याज उगाने वाले किसान टिके रहेंगे, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी टिकी रहेगी और अगर ग्रामीण अर्थव्यवस्था टिकी रहेगी, तो देश की अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी.

Published: 31 May, 2026 | 10:21 PM

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