मिर्च व्यापार पर संकट, खतरनाक कीटनाशकों पर रोक की उठी मांग.. निर्यात में बढ़ी दिक्कतें
मिर्च निर्यात में कीटनाशक अवशेष की समस्या से चीन सहित कई बाजारों में भारतीय खेपें रिजेक्ट हो रही हैं. एक्सपोर्टर्स ने उच्च जोखिम वाले कीटनाशकों पर रोक, बेहतर जांच व्यवस्था और ट्रेसबिलिटी की मांग की है. सरकार से सख्त नियंत्रण और जागरूकता अभियान की अपील की गई है.
मिर्च एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, इंडिया ने आंध्र प्रदेश सरकार से अपील की है कि निर्यात के लिए उगाई जाने वाली मिर्च की खेती में खतरनाक और अधिक जोखिम वाले कीटनाशकों के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाई जाए या उस पर सख्त नियंत्रण किया जाए. एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर मिर्च में कीटनाशक अवशेष बार-बार तय सीमा से ज्यादा पाए जाते रहे, तो भारत की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिति कमजोर हो सकती है. इसका असर खासकर चीन जैसे बड़े बाजारों पर पड़ सकता है.
द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जून को राज्य के कृषि, रेशम, सहकारिता और विपणन विभाग को दिए गए एक ज्ञापन में बताया गया कि भारत से, खासकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक से भेजे जाने वाले सूखे मिर्च के निर्यात में समस्याएं आ रही हैं. कई खेपों को या तो अस्वीकार किया जा रहा है या उनमें देरी हो रही है. साथ ही जांच भी बढ़ा दी गई है. इसकी वजह मिर्च में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक अवशेष पाया जाना बताया गया है. एसोसिएशन ने अपने अध्यक्ष वेलागापुडी संभाशिव राव और महासचिव थोता रामकृष्ण के नेतृत्व में कई खतरनाक कीटनाशक रसायनों को लेकर चिंता जताई है.
मिर्च में इन कीटनाशकों की मात्रा अधिक
उन्होंने मेथामिडोफॉस, एसीफेट, मोनोक्रोटोफॉस, प्रोफेनोफॉस, ट्रायजोफॉस, एथियन, क्लोरपाइरीफॉस और फिप्रोनिलजैसे रसायनों को जोखिम भरे के रूप में चिन्हित किया है. एसोसिएशन ने खास तौर पर अपील की है कि निर्यात के लिए उगाई जाने वाली मिर्च की फसलों में एसीफेट और मेथामिडोफॉस के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मिर्च की गुणवत्ता और भरोसा बना रहे.
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तुरंत सभी स्तरों पर कार्रवाई जरूरी है
एक्सपोर्टर्स ने इस समस्या को ‘फार्म से लेकर एक्सपोर्ट तक की सप्लाई चेन’ से जुड़ी गंभीर समस्या बताया है. उनका कहना है कि इस पर तुरंत सभी स्तरों पर कार्रवाई जरूरी है, जिसमें उत्पादन, कृषि सलाह, जांच, खरीद और नीति निर्माण शामिल हैं. उन्होंने सुझाव दिया है कि एक ऐसा प्रोटोकॉल बनाया जाए जिसमें कीटनाशक अवशेष (residue) तय सीमा के अंदर रहे. इसके लिए स्पाइसेस बोर्ड, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और पौध संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों को मिलाकर एक संयुक्त व्यवस्था तैयार करने की बात कही गई है, ताकि मिर्च की गुणवत्ता और निर्यात दोनों सुरक्षित रह सकें.
जागरूकता अभियान चलाया जाएगा
एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि मिर्च की खेती करने वाले प्रमुख जिलों जैसे गुंटूर, पलनाडु, प्रकाशम, कुरनूल और नांदयाल में गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं. इसके साथ ही फसल काटने से पहले कीटनाशक अवशेष की जांच, हर खेप की अलग-अलग सैंपलिंग और कीटनाशक बेचने वाले दुकानदारों पर सख्त निगरानी रखने की भी बात कही गई है. एसोसिएशन के महासचिव रामकृष्ण ने कहा कि मिर्च की खेती में कीटनाशकों का इस्तेमाल केवल तय मात्रा और नियमों के अनुसार ही होना चाहिए, जैसा कि एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) में बताया गया है.
किसान कर रहे कीटनाशकों का इस्तेमाल
बता दें कि यह मामला तब सामने आया जब हाल ही में चीन ने भारतीय मिर्च के तीन कंसाइनमेंट (कुल पांच कंटेनर) को रिजेक्ट कर दिया था. हालांकि गुंटूर कृषि मार्केट कमेटी के अध्यक्ष कुर्रा अप्पा राव ने इन चिंताओं को कम बताते हुए कहा कि चीन को होने वाले कुल निर्यात की तुलना में ये अस्वीकृत खेपें बहुत कम हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर किसान तय सीमा के अनुसार ही कीटनाशकों का उपयोग कर रहे हैं.