GMO विवाद के बाद चीन को फिर भाया भारतीय चावल, लेकिन बढ़ती लागत बनी बड़ी चुनौती

चीन ने 2021-22 के दौरान भारत से बड़ी मात्रा में टूटे चावल का आयात किया था. इसके बाद 2022 में भारत सरकार ने खराब मौसम और संभावित कमी को देखते हुए टूटे चावल के निर्यात पर रोक लगा दी थी. वहीं हाल ही में चीन ने भारतीय चावल पर GMO होने का आरोप लगाकर कई खेपों को खारिज कर दिया था.

नई दिल्ली | Published: 17 Apr, 2026 | 07:43 AM

China imports Indian rice: चीन ने एक बार फिर भारत से टूटे चावल (ब्रोकन राइस) की खरीद शुरू कर दी है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ ही समय पहले चीन ने भारतीय चावल की कई खेपों को यह कहकर खारिज कर दिया था कि उनमें GMO (जेनेटिक मॉडिफिकेशन) के अंश मौजूद हैं. लेकिन अब दोबारा खरीद शुरू होने से जहां निर्यातकों को राहत मिली है, वहीं बढ़ती शिपिंग लागत और वैश्विक हालात चिंता का कारण बने हुए हैं.

पहले आपत्ति, अब फिर खरीद

चीन ने 2021-22 के दौरान भारत से बड़ी मात्रा में टूटे चावल का आयात किया था. इसके बाद 2022 में भारत सरकार ने खराब मौसम और संभावित कमी को देखते हुए टूटे चावल के निर्यात पर रोक लगा दी थी. वहीं हाल ही में चीन ने भारतीय चावल पर GMO होने का आरोप लगाकर कई खेपों को खारिज कर दिया था. यह मामला इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि इससे पहले वही खेपें चीनी एजेंसियों से क्लियर हो चुकी थीं. लेकिन अब चीन ने फिर से भारत से टूटे चावल की खरीद शुरू कर दी है, जिससे साफ है कि उसे भारतीय चावल की जरूरत है.

भारत की कीमतें सबसे सस्ती और प्रतिस्पर्धी

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, भारतीय चावल की सबसे बड़ी ताकत उसकी कीमत है. राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TREA) के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव के अनुसार भारत टूटे चावल को 300 से 310 डॉलर प्रति टन के भाव पर दे रहा है. इसके अलावा 5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल की कीमत 335 से 339 डॉलर प्रति टन है.

अगर तुलना करें तो:

थाईलैंड: 423 डॉलर प्रति टन
वियतनाम: 344-348 डॉलर प्रति टन
पाकिस्तान: 345-349 डॉलर प्रति टन

इस हिसाब से भारत का चावल सबसे सस्ता और खरीदारों के लिए आकर्षक बना हुआ है.

चावल का प्रकार 5% टूटा सफेद (अप्रैल 1) 25% टूटा सफेद (अप्रैल 1)
पारबॉयल्ड (अप्रैल 1)
भारत 337 324 345
पाकिस्तान 347 331
वियतनाम 368 346
थाईलैंड 423 415 439

शिपिंग लागत ने बढ़ाई मुश्किल

निर्यातकों के सामने सबसे बड़ी समस्या अब ट्रांसपोर्ट की लागत है. ईरान युद्ध के कारण जहाजों में इस्तेमाल होने वाले बंकर ईंधन की कीमतों में करीब 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है. इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ा है. एक्सपर्ट के अनुसार अब 20 फुट कंटेनर की लागत 75 से 80 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है. हालांकि अभी कोई अलग से ‘वार सरचार्ज’ नहीं लगाया गया है, लेकिन ईंधन महंगा होने से कुल लागत बढ़ गई है.

बासमती पर असर, नॉन-बासमती ठीक

ईरान युद्ध का असर खास तौर पर बासमती चावल के निर्यात पर पड़ा है, खासकर पश्चिम एशिया के देशों में. लेकिन नॉन-बासमती चावल का निर्यात फिलहाल सामान्य बना हुआ है. पश्चिम अफ्रीका जैसे बाजारों में मांग बनी हुई है, जिससे भारतीय निर्यात को सहारा मिल रहा है.

एल नीनो का खतरा और वैश्विक बाजार

ट्रेड एनालिस्ट एस. चंद्रशेखरन के अनुसार आने वाले समय में एल नीनो का असर भी चावल बाजार पर पड़ सकता है. एल नीनो के कारण एशिया के कई देशों में सूखा पड़ता है, जिससे उत्पादन घट सकता है और कीमतें बढ़ सकती हैं. हालांकि थाईलैंड और वियतनाम में नई फसल आने वाली है, जिससे कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है. लेकिन अगर ‘सुपर एल नीनो’ की स्थिति बनी, तो कीमतों में ज्यादा गिरावट नहीं आएगी.

भारत में उत्पादन मजबूत

भारत में चावल उत्पादन की स्थिति फिलहाल काफी अच्छी है. 2025-26 में चावल उत्पादन 150 मिलियन टन से ज्यादा रहने का अनुमान है, जो एक रिकॉर्ड स्तर हो सकता है. रबी धान की फसल भी अच्छी बताई जा रही है. इसका एक कारण यह है कि दक्षिण भारत में असमय बारिश और ओलावृष्टि का ज्यादा असर नहीं पड़ा. इसके विपरीत उत्तर भारत में गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है और अब उत्पादन 5 से 10 प्रतिशत तक कम होने का अनुमान है.

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