अंडा हुआ महंगा, रेट में 10 रुपये की बढ़ोतरी… चिकन ने भी बिगाड़ा ग्राहकों का बजट

आंध्र प्रदेश में अंडे और चिकन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से किचन बजट प्रभावित हुआ है. अंडे 84- 90 रुपये प्रति दर्जन और चिकन 270 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. व्यापारियों के अनुसार मांग, कम आपूर्ति, ट्रांसपोर्ट खर्च और फीड कीमतें महंगाई के प्रमुख कारण हैं, जबकि मौसम ने उत्पादन पर असर डाला है.

नोएडा | Updated On: 15 Jun, 2026 | 01:47 PM

Egg Price Hike: आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में अंडे और चिकन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इससे आम जनता के किचन का बजट बिगड़ गया है. पिछले एक हफ्ते में अंडों के दाम 8 से 10 रुपये प्रति दर्जन तक बढ़ गए हैं.  अब एक दर्जन अंडे 84 से 90 रुपये में बिक रहे हैं, जबकि एक सप्ताह पहले इनकी कीमत 72 से 78 रुपये थी. हालांकिक, व्यापारियों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह बढ़ती मांग, कम आपूर्ति, ट्रांसपोर्ट खर्च में बढ़ोतरी और फीड (चारे) की कीमतों का बढ़ना है.

विशाखापट्टनम के व्यापारी के. नायडू ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि अंडे के साथ-साथ चिकन की कीमतों में भी 20 से 30 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है. विशाखापट्टनम शहर के कई बाजारों में ब्रॉयलर चिकन  के दामों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है. रविवार यानी 14 जून को मधुरवाड़ा में ड्रेस्ड ब्रॉयलर चिकन की कीमत 270 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि एक हफ्ते पहले यह 240 रुपये प्रति किलो थी.

गर्मियों में चिकन की मांग कम हो जाती है

कुछ अन्य बाजारों में भी चिकन ऊंचे दामों पर बिक रहा है. व्यापारियों का कहना है कि आमतौर पर गर्मियों में चिकन की मांग कम हो जाती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है. उनका कहना है कि कुछ इलाकों में बारिश के कारण मांग बढ़ी है, जबकि मई महीने में अधिक मौतों के चलते सप्लाई घट गई है, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. वहीं, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ गया है, जिससे अंडे और चिकन की कीमतों  पर असर पड़ा है. व्यापारियों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत भी बढ़ी है.

अंडे का उत्पादन घट गया

इसके अलावा, गर्म और उमस भरे मौसम की वजह से मुर्गियों ने सामान्य से कम खाना खाया, जिससे अंडे का उत्पादन घट गया. मई के अंत (26 मई से 5 जून) के बीच गर्मी के कारण कई पक्षियों की मौत भी हुई, जिससे बाजार में सप्लाई कम हो गई और मांग व आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया. व्यापारियों के अनुसार, मौसम के बावजूद देश में चिकन और अंडों की मांग स्थिर बनी हुई है. विशाखापट्टनम के मीट व्यापारी मोहन ने कहा कि देशी चिकन की कीमत 900 से 1000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है, जो पक्षी के आकार पर निर्भर करती है.

अंडा उत्पादन में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी

बता दें कि आंध्र प्रदेश भारत का सबसे बड़ा अंडा उत्पादक राज्य है. देश में बनने वाले कुल अंडों में लगभग 18 फीसदी से 20 फीसदी हिस्सेदारी अकेले इसी राज्य की होती है. यहां बड़े पैमाने पर आधुनिक तरीके से मुर्गी पालन किया जाता है और नई तकनीकों का इस्तेमाल भी होता है. इसी वजह से आंध्र प्रदेश को ‘भारत का अंडे का कटोरा’ भी कहा जाता है. यहां से दूसरे राज्यों और विदेशों तक में अंडे की सप्लाई होती है. अगर आंध्र प्रदेश में अंडा महंगा हुआ है, तो  इसका असर आने वाले दिनों में दूसरे राज्यों में पर भी पड़ सकता है.

Published: 15 Jun, 2026 | 01:45 PM

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