61 दिन का प्रतिबंध खत्म, इस दिन से शुरू होगी फिशिंग.. तटीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार
आंध्र प्रदेश में 61 दिनों का मछली पकड़ने पर लगा प्रतिबंध 14 जून को समाप्त हो रहा है. इसके बाद मछुआरे फिर समुद्र में उतरेंगे और बाजारों में ताजी मछलियां, झींगे व केकड़े पहुंचने लगेंगे. सरकार ने बंद सीजन में 1.30 लाख मछुआरा परिवारों को 20-20 हजार रुपये की सहायता दी है. मछुआरे बेहतर पकड़ और आय की उम्मीद कर रहे हैं.
Andhra Pradesh Fishing: आंध्र प्रदेश में करीब दो महीने के प्रतिबंध के बाद मछली पकड़ने की गतिविधियां 15 जून को फिर से शुरू होने जा रही हैं. इसके साथ ही बाजारों में ताजी समुद्री मछलियां, झींगे और केकड़े पहुंचने लगेंगे. हालांकि, शुरुआती कुछ हफ्तों में आवक कम रहने और मांग अधिक होने के कारण समुद्री खाद्य पदार्थों की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं. ताजा मछली खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग बंदरगाहों और फिश लैंडिंग केंद्रों का रुख कर सकते हैं.
आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में मछली पकड़ने पर लगा प्रतिबंध 14 जून को खत्म हो जाएगा. करीब 61 दिन के वार्षिक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के बाद अब मछुआरों में उत्साह का माहौल है. नए सीजन की शुरुआत से पहले मछुआरे अपनी नौकाओं और जालों की मरम्मत में जुटे हैं और अच्छी पकड़ की कामना के लिए धार्मिक अनुष्ठान भी कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि इस साल मौसम अनुकूल रहेगा, मछलियों की अच्छी पैदावार होगी और उनकी आमदनी बढ़ेगी.
15 अप्रैल से 14 जून तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध
समुद्री संसाधनों के संरक्षण और मछलियों के प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए हर साल 15 अप्रैल से 14 जून तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाता है. इस दौरान हजारों मछुआरे लगभग दो महीने तक समुद्र में नहीं जा सके. अब प्रतिबंध हटने के साथ ही मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों और गांवों में गतिविधियां तेज हो गई हैं. मछुआरे नौकाओं की मरम्मत, जालों को ठीक करने और समुद्र में जाने के लिए जरूरी ईंधन, उपकरण तथा अन्य सामान जुटाने में लगे हुए हैं.
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पारंपरिक मान्यताओं का भी पालन कर रहे मछुआरे
समुद्र में जाने की तैयारियों के साथ-साथ कई मछुआरे अपनी पारंपरिक मान्यताओं का भी पालन कर रहे हैं. वे समुद्र में निकलने से पहले पुजारियों से सलाह लेकर शुभ मुहूर्त तय करते हैं. उनका मानना है कि शुभ समय पर यात्रा शुरू करने से समुद्र में सुरक्षा बनी रहती है और मछलियों की अच्छी पकड़ होती है. प्रतिबंध अवधि के दौरान राज्य सरकार ने मत्स्यकार सेवा योजना के तहत मछुआरों को आर्थिक सहायता भी दी. इस योजना के तहत करीब 1.30 लाख मछुआरा परिवारों को 20-20 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई. सरकार ने इस पर कुल 261.5 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे मछुआरों को बंद सीजन के दौरान आर्थिक मुश्किलों से राहत मिली.
कारोबारों में भी रौनक लौटने की उम्मीद
वहीं, मछली पकड़ने का काम दोबारा शुरू होने से मछली बाजारों और इससे जुड़े अन्य कारोबारों में भी रौनक लौटने की उम्मीद है. इससे समुद्री अर्थव्यवस्था पर निर्भर हजारों लोगों की आजीविका को फिर से गति मिलेगी. तल्लापालेम गांव के मछुआरे वी. नारायण राव ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि वे मंगलवार तड़के समुद्र में जाने की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस साल अच्छी पकड़ की उम्मीद है. उनकी टीम आमतौर पर मंगिनापुडी से निकलकर अंतरवेदी और निजामपट्टनम के बीच के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने का काम करती है.
15 जून की रात समुद्र में रवाना होंगे मछुआरे
एक अन्य मछुआरे के. नरसिम्हा स्वामी ने कहा कि उनकी टीम 15 जून की रात समुद्र में मछली पकड़ने के लिए रवाना होगी. उन्होंने मछुआरों को दी जाने वाली 20,000 रुपये की सहायता राशि जारी रखने के लिए सरकार का आभार जताया. साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन लाभार्थियों को अब तक सहायता राशि नहीं मिली है, उनके लंबित भुगतान जल्द जारी किए जाएं. तल्लापालेम गांव के मछुआरे वी. नारायण राव ने कहा कि उनकी टीम मंगलवार तड़के समुद्र में मछली पकड़ने के लिए रवाना होगी. उन्होंने कहा कि इस साल उन्हें अच्छी पकड़ की उम्मीद है. उनकी नौकाएं आमतौर पर मंगिनापुडी से निकलकर अंतरवेदी और निजामपट्टनम के बीच के समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने का काम करती हैं.