जून में भारत का खाद्य तेल आयात 30 फीसदी घटा, पाम और सोयाबीन तेल की खरीद में आई बड़ी गिरावट

India Edible Oil Import: भारत में जून 2026 के दौरान खाद्य तेलों का आयात पिछले साल की तुलना में 30 प्रतिशत घटकर 11.11 लाख टन रह गया. पाम तेल और सोयाबीन तेल की कम मांग इसकी मुख्य वजह रही. हालांकि, तेल वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों में कुल खाद्य तेल आयात 7 फीसदी बढ़ा है.

नोएडा | Updated On: 14 Jul, 2026 | 07:44 PM

Edible Oil Import: भारत में जून 2026 के दौरान खाद्य तेल (Edible Oil) के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पिछले साल के मुकाबले इस बार जून में खाद्य तेल का आयात करीब 30 प्रतिशत कम रहा. इसकी सबसे बड़ी वजह पाम तेल और सोयाबीन तेल के आयात में आई कमी है. हालांकि, पूरे तेल वर्ष (2025-26) के पहले आठ महीनों का आंकड़ा देखें तो कुल खाद्य तेल आयात पिछले साल की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक रहा है. यह जानकारी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने जारी की है.

एसईए के मुताबिक, जून 2026 में भारत ने 11.11 लाख टन खाद्य तेल आयात किया. जबकि जून 2025 में यह आंकड़ा 15.97 लाख टन था. यानी एक साल में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.

पाम और सोयाबीन तेल की मांग घटी

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, एसईए के कार्यकारी निदेशक बी. वी. मेहता ने बताया कि, आयात में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पाम तेल की कम मांग रही. जून 2026 में पाम तेल का आयात 4.87 लाख टन रहा, जबकि मई में यह 5.46 लाख टन था. पिछले साल जून में यह आंकड़ा 9.52 लाख टन तक पहुंचा था. इसी तरह सोयाबीन तेल का आयात भी मई के 4.93 लाख टन से घटकर जून में 3.80 लाख टन रह गया.

आखिर क्यों घटा आयात?

इंडोनेशिया, मलेशिया और अमेरिका जैसे देशों में बायोफ्यूल को बढ़ावा देने वाली नीतियों का असर खाद्य तेल बाजार पर पड़ा है. इन देशों में वनस्पति तेल का बड़ा हिस्सा अब ईंधन बनाने में इस्तेमाल हो रहा है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की उपलब्धता और कीमतों दोनों पर असर पड़ा है. इसी वजह से भारत के आयात में भी बदलाव देखने को मिला.

आठ महीनों का आंकड़ा क्या कहता है?

हालांकि जून में आयात कम रहा, लेकिन पूरे तेल वर्ष (नवंबर 2025 से जून 2026) के दौरान तस्वीर अलग है. इन आठ महीनों में भारत ने 103.88 लाख टन खाद्य तेल आयात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 97.29 लाख टन था. यानी कुल आयात में करीब 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

कच्चे तेल का हिस्सा बढ़ा

एसईए के अनुसार, इस दौरान भारत ने 100.18 लाख टन कच्चा खाद्य तेल और 3.68 लाख टन रिफाइंड खाद्य तेल आयात किया. एक साल पहले जहां कुल आयात में रिफाइंड तेल की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत थी, वहीं अब यह घटकर 4 प्रतिशत रह गई है. दूसरी तरफ कच्चे खाद्य तेल का हिस्सा बढ़कर 96 प्रतिशत हो गया है. नेपाल से भी रिफाइंड सोयाबीन, सूरजमुखी तेल, पामोलिन और रेपसीड तेल का आयात जारी रहा.

भारत सबसे ज्यादा मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम तेल आयात करता है. वहीं अर्जेंटीना और रूस से सोयाबीन और सूरजमुखी तेल मंगाया जाता है. इसके अलावा थाईलैंड, ब्राजील, यूक्रेन, चीन, नेपाल और यूएई से भी सीमित मात्रा में खाद्य तेल आयात होता है.

खाद्य तेल हुए महंगे

आयात के साथ-साथ खाद्य तेलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले एक साल में खाद्य तेलों की औसत कीमत करीब 17 प्रतिशत बढ़ी है. आरबीडी पामोलिन 18 प्रतिशत, सोयाबीन तेल 14 प्रतिशत और सूरजमुखी तेल 19 प्रतिशत महंगा हुआ है. एसईए का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी आयातकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, जिससे आने वाले समय में कीमतों पर असर पड़ सकता है.

Published: 14 Jul, 2026 | 09:22 PM

Topics: