मौजूदा खरीफ सीजन में सोयाबीन खेती का रकबा बुरी तरह से घटा है. किसानों ने 31 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर इस बार सोयाबीन की खेती नहीं की है. ऐसे में सोयाबीन तेल उत्पादन भी घटने की आशंकाओं को बीच सूरजमुखी, अरंडी के तेल पर निगाहें टिकी हैं, लेकिन इनके भरोसे खपत पूरी नहीं हो पाएगी. वहीं, मूंगफली के रकबे में भी 13 लाख हेक्टेयर की गिरावट ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने खेती के रकबे में गिरावट को बड़ी चिंता बताते हुए खपत आपूर्ति संकट को लेकर अलर्ट किया है.
कृषि मंत्रालय की ओर से जारी खरीफ 2026 की बुवाई के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में शुरुआत धीमी रही है. कुल तिलहन का रकबा 66.31 लाख हेक्टेयर है, जो 2025 की इसी अवधि में 109.27 लाख हेक्टेयर था. इस गिरावट में सोयाबीन और मूंगफली का हिस्सा सबसे ज्यादा है, जबकि सूरजमुखी और अरंडी (कैस्टर) में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
खेती में सुधार की उम्मीद मॉनसून पर टिकी
खाद्य तेल इंडस्ट्री के शीर्ष निकाय सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने खेती के रकबे में गिरावट को बड़ी चिंता बताते हुए खपत आपूर्ति संकट को लेकर अलर्ट किया है. एसोसिएशन ने कहा कि रकबा घटा है, लेकिन 5 जुलाई 2026 तक के इन आंकड़ों को मॉनसून के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. कई इलाकों में शुरुआती दौर में बारिश सामान्य से कम होने के कारण बुवाई का काम रुका नहीं है, बल्कि उसमें देरी हुई है. जैसे-जैसे मुख्य उत्पादक राज्यों में बारिश बेहतर होगी, आने वाले हफ्तों में रकबे में काफी सुधार की उम्मीद है.
किसानों ने 31 लाख हेक्टेयर में नहीं बोई सोयाबीन
एसोसिएशन ने कहा कि खाद्य तेल उद्योग के लिए सोयाबीन और मूंगफली की बुवाई की प्रगति पर बारीकी से नजर रखना जरूरी है. सोयाबीन का रकबा 31 लाख हेक्टेयर घटकर 47.80 लाख हेक्टेयर पर आ गया है. जबकि, मूंगफली का रकबा जो पिछले सीजन 28 लाख हेक्टेयर था वो करीब 11 लाख हेक्टेयर घटकर 16.93 लाख हेक्टेयर पर आ गया है. हालांकि, सूरजमुखी के रकबे में 33 हजार हेक्टेयर और अरंडी के रकबे में 2 हजार हेक्टेयर की बढ़त दर्ज की गई है.
SOYBEAN, GROUNDNUT LAG, SUNFLOWER SHOWS PROMISE AS LESSER RAINFALL LOWERS KHARIF SOWING!
The initial Kharif 2026 sowing data, released by the Agriculture Ministry, reflects a slower start compared to last year, with total oilseed acreage at 66.31 lakh hectares, down from 109.27… pic.twitter.com/ikmJFTEp7w— The Solvent Extractors’ Association of India (@Seaof_india) July 8, 2026
खाद्य तेल आपूर्ति पर संकट बढ़ने की आशंका
एसोसिएशन के अनुसार सोयाबीन और मूंगफली के रकबे में अगर गिरावट जारी रही तो उत्पादन भी कम होगा और खाद्य तेल की आपूर्ति घटेगी. अरंडी और सूरजमुखी का भले ही रकबा बढ़ा हो पर बाजार की जरूरत की पूर्ति नहीं हो सकी है. हालांकि, अभी बुवाई का समय है और अच्छी बारिश की उम्मीद से रकबे में समय पर सुधार होगा और घरेलू तिलहन उत्पादन मजबूत होने की संभावना बनी हुई है. यह भी संभावना जताई गई है कि खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य में मदद मिलेगी.
चावल, मक्का और दलहन रकबे में गिरावट ने बढ़ाई चिंता
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने जारी बयान में कहा कि चावल के रकबे में 9 लाख हेक्टेयर की गिरावट भी चिंताजनक है. इसके अलावा मक्का का रकबा 2 लाख हेक्टेयर और दलहन फसलों की खेती का क्षेत्रफल 10 लाख हेक्टेयर घट गया है. कहा कि अगले कुछ हफ्ते यह तय करने में अहम होंगे कि क्या खरीफ 2026 की बुवाई फिर से रफ्तार पकड़ सकती है और पिछले साल की बुवाई की गति के करीब पहुंच सकती है.