ईरान युद्ध का असर भारत के चावल कारोबार पर, बासमती निर्यात में आई भारी गिरावट

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है. वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ज्यादा मानी जाती है. भारत अकेले इतना चावल निर्यात करता है जितना थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे बड़े निर्यातक देश मिलकर भी नहीं कर पाते. लेकिन इस बार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कारोबार की रफ्तार धीमी कर दी है.

नई दिल्ली | Updated On: 28 May, 2026 | 07:43 AM

Rice exports: भारत के चावल निर्यात कारोबार पर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. खासकर बासमती चावल के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है. ईरान और खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है, जिससे भारतीय निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में भारत के कुल चावल निर्यात में हल्की गिरावट देखने को मिली है.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है. वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से ज्यादा मानी जाती है. भारत अकेले इतना चावल निर्यात करता है जितना थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे बड़े निर्यातक देश मिलकर भी नहीं कर पाते. लेकिन इस बार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कारोबार की रफ्तार धीमी कर दी है.

जनवरी से अप्रैल तक घटी चावल की सप्लाई

इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के अनुसार जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच भारत का कुल चावल निर्यात 1.3 प्रतिशत घटकर 8.39 मिलियन टन रह गया. सबसे ज्यादा असर बासमती चावल पर पड़ा है. इस दौरान बासमती चावल का निर्यात करीब 7 प्रतिशत गिरकर 2.3 मिलियन टन तक पहुंच गया.

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों तक माल पहुंचाने में दिक्कतें बढ़ गई हैं. कई शिपमेंट रास्ते में फंस गए हैं और नए सौदों पर भी असर पड़ रहा है.

खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा जाती है बासमती

भारत का प्रीमियम बासमती चावल मुख्य रूप से सऊदी अरब, ईरान, इराक, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में निर्यात किया जाता है. लंबे समय तक ईरान भारत का सबसे बड़ा बासमती खरीदार रहा, हालांकि पिछले साल सऊदी अरब उससे आगे निकल गया.

निर्यातकों का कहना है कि युद्ध की वजह से समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर तनाव का असर सीधे शिपिंग पर पड़ रहा है. इससे जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है और कई कंटेनर समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.

बढ़ा माल ढुलाई और बीमा खर्च

युद्ध शुरू होने के बाद शिपिंग बीमा और माल ढुलाई की लागत में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है. कारोबारियों के मुताबिक समुद्री भाड़ा पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है. ऐसे में निर्यातकों की लागत बढ़ रही है और कई खरीदार नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं. दिल्ली के एक निर्यातक ने इकोनॉमिक्स टाइम्स को बताया कि जब तक ईरान युद्ध खत्म नहीं होता, तब तक बासमती निर्यात सामान्य स्तर पर लौटने की संभावना कम है. कई खरीदार फिलहाल इंतजार की स्थिति में हैं.

गैर-बासमती चावल का निर्यात थोड़ा बढ़ा

हालांकि गैर-बासमती चावल के निर्यात में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जनवरी से अप्रैल 2026 के दौरान गैर-बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 6.09 मिलियन टन पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 6.03 मिलियन टन था.

भारत मुख्य रूप से गैर-बासमती चावल बांग्लादेश, बेनिन, आइवरी कोस्ट, गिनी और कैमरून जैसे देशों को निर्यात करता है. लेकिन अफ्रीकी देशों में भी मांग थोड़ी कमजोर पड़ती दिख रही है.

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित एक निर्यातक ने बताया कि युद्ध की वजह से समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है, जिससे अफ्रीकी बाजारों में भी खरीदारी का माहौल कमजोर पड़ा है.

घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है असर

निर्यात घटने का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे सकता है. इस साल भारत में रिकॉर्ड चावल उत्पादन हुआ है और निर्यात में गिरावट से घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है. इससे कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका है. रिपोर्ट के मुताबिक इस साल रिकॉर्ड उत्पादन की वजह से भारत में चावल की कीमतें पहले ही 5 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुकी हैं. अगर निर्यात और कमजोर हुआ तो किसानों को उचित दाम मिलने में दिक्कत हो सकती है.

किसानों और कारोबारियों की बढ़ी चिंता

चावल निर्यात से जुड़े कारोबारी अब हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर आने वाले महीनों में और ज्यादा दिखाई दे सकता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए नए बाजार तलाशना अब जरूरी हो गया है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता से बचा जा सके. साथ ही सरकार को भी निर्यातकों और किसानों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाने पड़ सकते हैं.

फिलहाल पश्चिम एशिया का तनाव भारत के चावल कारोबार के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है और आने वाले समय में इसका असर किसानों की आय पर भी पड़ सकता है.

Published: 28 May, 2026 | 08:00 AM

Topics: