भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक, गेहूं की फसल ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

केंद्र सरकार ने फसलों के तीसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान जारी किए हैं. इसमें खरीफ, रबी और जायद तीनों सीजन की फसलों को शामिल किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार देश में इस बार चावल का उत्पादन 154.02 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. वहीं इस बार गेहूं उत्पादन 120.66 मिलियन टन रहने का अनुमान है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 28 May, 2026 | 07:35 AM

Foodgrain production: भारत में कृषि क्षेत्र से इस बार बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. वर्ष 2025-26 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है. सरकार के ताजा अनुमान के मुताबिक इस बार देश में खाद्यान्न उत्पादन में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. खास बात यह है कि चावल और गेहूं दोनों की पैदावार ने नया रिकॉर्ड बनाया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मजबूत उत्पादन आने वाले समय में संभावित कमजोर मानसून और एल नीनो जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है.

केंद्र सरकार ने फसलों के तीसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान जारी किए हैं. इसमें खरीफ, रबी और जायद तीनों सीजन की फसलों को शामिल किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार देश में इस बार चावल का उत्पादन 154.02 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. इसके साथ ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बना रहेगा.

गेहूं उत्पादन ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

चावल के साथ-साथ गेहूं उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकार के मुताबिक इस बार गेहूं उत्पादन 120.66 मिलियन टन रहने का अनुमान है. पिछले साल यह आंकड़ा 117.94 मिलियन टन था. यानी इस बार करीब 2.3 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है.

हालांकि कुछ राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा था, लेकिन इसके बावजूद कुल उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और किसानों की मेहनत का असर उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है.

दालों और मक्का उत्पादन में बड़ी छलांग

इस बार दालों के उत्पादन में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है. सरकार के अनुसार कुल दलहन उत्पादन 27.41 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 25.68 मिलियन टन था. चना उत्पादन में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला है. इस बार चना उत्पादन 12.51 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं मसूर उत्पादन भी बढ़कर 1.76 मिलियन टन हो गया है. हालांकि अरहर यानी तूर दाल का उत्पादन थोड़ा कम रहने का अनुमान है.

मक्का उत्पादन ने भी पहली बार 50 मिलियन टन का आंकड़ा पार कर लिया है. सरकार के मुताबिक इस बार मक्का उत्पादन 55.09 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 27 प्रतिशत ज्यादा है. कृषि जानकार इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं.

तिलहन उत्पादन में मामूली बढ़त

देश में तिलहन उत्पादन भी इस बार थोड़ा बढ़ा है. कुल तिलहन उत्पादन 43.06 मिलियन टन रहने का अनुमान है. हालांकि सोयाबीन उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है. इस बार सोयाबीन उत्पादन घटकर 12.6 मिलियन टन रह गया है.

दूसरी तरफ सरसों उत्पादन ने नया रिकॉर्ड बनाया है. इस बार सरसों की पैदावार 13.77 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है. इससे खाद्य तेल क्षेत्र में कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

श्रीअन्न की पैदावार में गिरावट

जहां कई फसलों का उत्पादन बढ़ा है, वहीं मोटे अनाज यानी श्रीअन्न की पैदावार में कमी दर्ज की गई है. ज्वार, बाजरा और रागी जैसी फसलों का कुल उत्पादन करीब 5.4 प्रतिशत घटकर 17.58 मिलियन टन रह गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव और कुछ क्षेत्रों में कम बारिश इसका बड़ा कारण हो सकता है.

सरकार ने किसानों और वैज्ञानिकों को दिया श्रेय

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए काम कर रही है. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड उत्पादन किसानों की मेहनत और सरकार की योजनाओं का परिणाम है. उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR और उससे जुड़े संस्थानों की भी सराहना की. उनके मुताबिक जलवायु के अनुकूल बीज, नई तकनीक और खेत स्तर तक रिसर्च पहुंचाने से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है.

कमजोर मानसून के बीच राहत भरी खबर

इस बार मानसून की शुरुआत थोड़ी धीमी रही है और एल नीनो का खतरा भी बना हुआ है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन देश के लिए राहत की बात है. अगर आने वाले महीनों में बारिश सामान्य से कम भी रहती है, तब भी देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार रहेगा. कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है. इसलिए टिकाऊ खेती, बेहतर जल प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी होगा.

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Published: 28 May, 2026 | 07:35 AM

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