Kharif crops MSP hike: केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन 2026-27 के लिए किसानों को बड़ी राहत देते हुए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में यह फैसला लिया गया.
सरकार का कहना है कि MSP बढ़ाने का मकसद किसानों को उनकी फसल का लाभकारी दाम दिलाना और खेती को ज्यादा फायदे का सौदा बनाना है. इस फैसले से धान, दालें, तिलहन और मोटे अनाज उगाने वाले करोड़ों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
किसानों को लागत से कम से कम 50 प्रतिशत ज्यादा दाम
सरकार ने बताया कि खरीफ फसलों का MSP इस तरह तय किया गया है कि किसानों को उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत ज्यादा दाम मिल सके. यह वही नीति है, जिसकी घोषणा केंद्र सरकार ने 2018-19 के बजट में की थी.
इन फसलों के MSP में हुई सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
इस बार सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सूरजमुखी बीज के MSP में की गई है.
सूरजमुखी बीज: 622 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
कपास: 557 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी
नाइजरसीड: 515 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी
तिल: 500 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी
सरकार का फोकस इस बार तिलहन और दालों की खेती को बढ़ावा देने पर भी दिखाई दे रहा है.
दालों और मोटे अनाज पर खास जोर
सरकार पिछले कुछ वर्षों से धान और गेहूं के अलावा दूसरी फसलों की खेती बढ़ाने पर जोर दे रही है. खासतौर पर दालें, तिलहन और न्यूट्री-सीरियल यानी श्री अन्न को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. सरकार के आंकड़ों के अनुसार इस बार किसानों को लागत के मुकाबले सबसे ज्यादा फायदा मूंग की खेती में मिलने का अनुमान है.
मूंग: 61% लाभ
बाजरा: 56% लाभ
मक्का: 56% लाभ
अरहर: 54% लाभ
बाकी फसलों में किसानों को लागत पर लगभग 50 प्रतिशत तक लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया है.
MSP बढ़ने से किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह दर होती है, जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदती है. इससे किसानों को बाजार में कम कीमत मिलने का डर कम हो जाता है. अगर बाजार में फसल का दाम गिर भी जाए, तब भी किसान MSP पर अपनी उपज बेच सकते हैं. इससे उनकी आय सुरक्षित रहती है. विशेषज्ञों का कहना है कि MSP बढ़ने से किसानों का खेती की तरफ भरोसा मजबूत होता है और वे ज्यादा उत्पादन के लिए प्रोत्साहित होते हैं.
खरीफ फसलों का MSP 2026-27 (रुपये प्रति क्विंटल)
| क्र. सं. | फसल | MSP 2026-27 | लागत (KMS 2026-27) | लागत पर लाभ (%) | MSP 2025-26 |
2025-26 से बढ़ोतरी
|
| 1 | धान (सामान्य) | 2441 | 1627 | 50% | 2369 | 72 रु. |
| 2 | धान ग्रेड-A | 2461 | – | – | 2389 | 72 रु. |
| 3 | ज्वार (हाइब्रिड) | 4023 | 2682 | 50% | 3699 | 324 रु. |
| 4 | ज्वार मालदांडी | 4073 | – | – | 3749 | 324 रु. |
| 5 | बाजरा | 2900 | 1858 | 56% | 2775 | 125 रु. |
| 6 | रागी | 5205 | 3470 | 50% | 4886 | 319 रु. |
| 7 | मक्का | 2410 | 1544 | 56% | 2400 | 10 रु. |
| 8 | अरहर / तुअर | 8450 | 5496 | 54% | 8000 | 450 रु. |
| 9 | मूंग | 8780 | 5438 | 61% | 8768 | 12 रु. |
| 10 | उड़द | 8200 | 5418 | 51% | 7800 | 400 रु. |
| 11 | मूंगफली | 7517 | 5011 | 50% | 7263 | 254 रु. |
| 12 | सूरजमुखी बीज | 8343 | 5562 | 50% | 7721 | 622 रु. |
| 13 | सोयाबीन (पीला) | 5708 | 3805 | 50% | 5328 | 380 रु. |
| 14 | तिल | 10346 | 6897 | 50% | 9846 | 500 रु. |
| 15 | नाइजरसीड | 10052 | 6701 | 50% | 9537 | 515 रु. |
| 16 | कपास (मध्यम रेशा) | 8267 | 5511 | 50% | 7710 | 557 रु. |
| 17 | कपास (लंबा रेशा) | 8667 | – | – | 8110 | 557 रु. |
धान खरीद में बड़ा उछाल
2004-05 से 2013-14 के बीच धान खरीद: 4590 लाख मीट्रिक टन
2014-15 से 2025-26 के बीच धान खरीद: 8418 लाख मीट्रिक टन
किसानों को MSP भुगतान
2004-05 से 2013-14 के बीच धान किसानों को भुगतान: 4.44 लाख करोड़ रुपये
2014-15 से 2025-26 के बीच भुगतान: 16.08 लाख करोड़ रुपये
14 खरीफ फसलों पर MSP भुगतान
2004-05 से 2013-14: 4.75 लाख करोड़ रुपये
2014-15 से 2025-26: 18.99 लाख करोड़ रुपये
सरकार का दावा है कि MSP नीति के कारण किसानों की आय में सुधार हुआ है और सरकारी खरीद का दायरा भी बढ़ा है.
खेती की लागत भी बढ़ रही
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को सिर्फ MSP बढ़ने से ही पूरी राहत नहीं मिलेगी. डीजल, खाद, बीज, मजदूरी और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है. सरकार ने MSP तय करते समय इन सभी खर्चों को शामिल करने की बात कही है. इसमें मजदूरी, किराया, बीज, खाद, सिंचाई, मशीनों का खर्च और पारिवारिक श्रम तक को जोड़ा गया है.
किसानों के लिए क्यों अहम है MSP?
भारत में बड़ी संख्या में किसान छोटे और सीमांत हैं. ऐसे किसानों के लिए MSP सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. जब बाजार में कीमतें गिरती हैं, तब MSP किसानों को नुकसान से बचाने में मदद करता है. खासतौर पर धान, दालें और तिलहन उगाने वाले किसानों के लिए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है.
आने वाले खरीफ सीजन पर नजर
अब किसानों की नजर खरीफ बुवाई के मौसम पर है. अच्छी बारिश और बेहतर MSP मिलने पर इस बार दालों, तिलहन और मोटे अनाज की खेती बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार खरीद व्यवस्था मजबूत रखती है, तो किसानों को इस MSP बढ़ोतरी का सीधा फायदा मिल सकता है.