Wheat procurement 2026: देश में इस बार गेहूं खरीद को लेकर शुरुआत में काफी चिंता देखने को मिली थी. मंडियों में आवक कम थी, कई राज्यों में खरीद की रफ्तार धीमी चल रही थी और मौसम भी किसानों के लिए परेशानी बना हुआ था. लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं. करीब 40 दिन तक पिछड़ने के बाद आखिरकार गेहूं खरीद ने रफ्तार पकड़ ली है और सरकार का आंकड़ा पिछले साल से आगे निकल गया है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 12 मई 2026 तक देशभर में 30.15 मिलियन टन गेहूं की खरीद हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 29.17 मिलियन टन था. यानी इस बार अब तक करीब 3 प्रतिशत ज्यादा गेहूं खरीदा गया है.
अब सरकार का लक्ष्य 34.5 मिलियन टन गेहूं खरीदने का है और मौजूदा स्थिति को देखकर उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में खरीद और तेज हो सकती है.
शुरुआती दिनों में बढ़ गई थी चिंता
इस साल गेहूं खरीद सत्र 1 अप्रैल से शुरू हुआ था. शुरुआत के कई हफ्तों तक खरीद का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले काफी पीछे चल रहा था. इससे यह चिंता बढ़ गई थी कि कहीं सरकार तय लक्ष्य से पीछे न रह जाए.
कई राज्यों में किसानों ने भी शिकायत की थी कि मंडियों में खरीद की रफ्तार धीमी है. दूसरी तरफ मौसम की मार ने भी हालात मुश्किल बना दिए थे. हालांकि मई के दूसरे सप्ताह में तस्वीर बदलनी शुरू हुई. पंजाब, हरियाणा और दूसरे राज्यों में खरीद बढ़ने लगी, जिससे कुल आंकड़ा भी तेजी से ऊपर पहुंच गया.
पंजाब और हरियाणा बने सबसे बड़े सहारा
इस बार गेहूं खरीद में सबसे ज्यादा योगदान पंजाब और हरियाणा का रहा है. पंजाब में अब तक 12.16 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया है. पिछले साल इसी समय तक राज्य में 11.79 मिलियन टन खरीद हुई थी. यानी इस बार करीब 3 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है.
वहीं हरियाणा ने उम्मीद से भी बेहतर प्रदर्शन किया है. यहां अब तक 8.46 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि राज्य का लक्ष्य 7.2 मिलियन टन रखा गया था. पिछले साल के मुकाबले यहां खरीद में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
मध्य प्रदेश में अब सुधर रहे हालात
मध्य प्रदेश में इस बार शुरुआत में गेहूं खरीद काफी कमजोर रही थी. अप्रैल के आखिर तक यहां खरीद में करीब 59 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई थी. लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है. 12 मई तक राज्य में 7.04 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया है. हालांकि यह पिछले साल के 7.77 मिलियन टन से कम है, लेकिन अंतर अब काफी घट गया है.
सरकार ने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश में खरीद और बढ़ सकती है. इसी वजह से केंद्र ने राज्य का खरीद लक्ष्य बढ़ाकर 10 मिलियन टन कर दिया है.
उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी बढ़ी खरीद
उत्तर प्रदेश में इस बार खरीद बढ़कर 1.17 मिलियन टन पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह करीब 0.98 मिलियन टन थी. वहीं उत्तर प्रदेश में भी खरीद बढ़कर 1.61 मिलियन टन हो गई है. सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की हो रही है, जहां गेहूं खरीद में 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. राज्य में अब तक 29,249 टन गेहूं खरीदा गया है. सरकार ने इन राज्यों में खरीद लक्ष्य भी बढ़ाए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों से सीधे खरीद की जा सके.
मौसम ने बिगाड़ी गुणवत्ता
इस बार मौसम भी किसानों और एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना. मार्च और अप्रैल में कई इलाकों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि हुई. इसका असर गेहूं की गुणवत्ता पर पड़ा. कई जगह दानों में नमी बढ़ गई, गेहूं सिकुड़ गया और चमक भी कम हो गई.
इसी वजह से बड़ी मात्रा में गेहूं को शिथिल मानकों यानी URS के तहत खरीदा जा रहा है. ऐसे गेहूं को अलग से स्टोर किया जा रहा है ताकि बाद में गुणवत्ता के हिसाब से उसका इस्तेमाल किया जा सके.
किसानों को मिल रही राहत
सरकारी खरीद तेज होने से किसानों को राहत मिल रही है. कई किसानों को अब अपनी फसल MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का मौका मिल रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकारी खरीद मजबूत रहती है तो किसानों को निजी व्यापारियों के सामने कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी कम होगी. इसके अलावा समय पर भुगतान और बेहतर व्यवस्था भी किसानों के लिए राहत का कारण बन रही है.
मंडियों में आवक में कमी
हालांकि खरीद बढ़ी है, लेकिन मंडियों में गेहूं की आवक में थोड़ा उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला है. 12 मई को देशभर में दैनिक आवक करीब 0.67 मिलियन टन रही, जबकि अप्रैल के आखिर में यह आंकड़ा 1.08 मिलियन टन तक पहुंच गया था. फिर भी अधिकारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अभी भी अच्छी मात्रा में गेहूं मंडियों तक पहुंच रहा है.
सरकार के लिए क्यों अहम है गेहूं खरीद?
सरकारी गेहूं खरीद सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं होती. यह देश की खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ी होती है. सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS के जरिए करोड़ों लोगों को सस्ता गेहूं और आटा उपलब्ध कराती है. इसके लिए पर्याप्त मात्रा में अनाज का भंडारण जरूरी होता है. इसी वजह से हर साल सरकार बड़े स्तर पर गेहूं खरीद अभियान चलाती है.