खराब मौसम के बावजूद पंजाब में लक्ष्य से ज्यादा गेहूं खरीदी, 122 लाख टन के पार पहुंचा आंकड़ा

2025 में 15 मई तक सरकारी एजेंसियों ने 119.23 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था, जबकि निजी व्यापारियों ने 10.79 लाख मीट्रिक टन खरीद की थी. वहीं 2026 में सरकारी खरीद पिछले साल के स्तर से भी आगे निकल गई, जबकि निजी व्यापारियों की हिस्सेदारी करीब 86 से 87 प्रतिशत तक गिर गई.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 10 May, 2026 | 11:59 AM

Wheat Procurement: पंजाब में गेहूं की खरीदी अपने लक्ष्य को पार कर गया है. हालांकि, इसके बाजूद पिछले साल के मुकाबले समान अवधि में गेहूं की खरीदी कम ही है. खास बात यह है कि इस बार सरकारी एजेंसियों की खरीद में ज्यादा सक्रिय भूमिका रही, जिससे निजी व्यापारियों की घटती हिस्सेदारी की भरपाई हो गई. प्रदेश में 6 मई तक 122.39 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया. खास बात यह है कई जिलों में टारगेट से ज्यादा गेहूं की खरीदी हो गई है. ऐसे राज्य सरकार ने इस साल गेहूं खरीद का लक्ष्य 122 लाख मीट्रिक टन तय किया था.

हालांकि, गेहूं खरीद का काम आधिकारिक तौर पर 15 मई तक जारी रहेगा, लेकिन मंडियों में गेहूं की आवक अब तेजी से कम हो गई है. सीजन के दौरान जहां रोजाना 10 से 11 लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुंच रहा था, वहीं अब यह घटकर करीब 56 हजार मीट्रिक टन रह गया है. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार खरीद सीजन पिछले साल के मुकाबले काफी पहले खत्म होने की ओर बढ़ रहा है.

पंजाब की मंडियों में गेहूं की खरीदी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल फरवरी से मार्च के दूसरे हफ्ते तक लगातार ज्यादा गर्मी पड़ने से गेहूं की फसल पर असर पड़ा. तेज तापमान की वजह से दाने सिकुड़ गए, जिससे फसल का विकास प्रभावित हुआ और कई इलाकों में उत्पादन 3 से 5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक कम हो गया. इसी कारण पिछले साल की तुलना में इस बार मंडियों में गेहूं की आवक भी कम रही. ऐसे 15 मई 2025 तक पंजाब की मंडियों  में करीब 130.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की गई थी. वहीं 6 मई 2026 तक यह आंकड़ा करीब 122.39 लाख मीट्रिक टन रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 5.9 प्रतिशत कम है, जबकि खरीद प्रक्रिया अभी जारी है. हालांकि, अब खरीद की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है.

व्यापारियों ने गेहूं खरीदी की कम

2025 में 15 मई तक सरकारी एजेंसियों ने 119.23 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था, जबकि निजी व्यापारियों ने 10.79 लाख मीट्रिक टन खरीद की थी. वहीं 2026 में सरकारी खरीद पिछले साल के स्तर से भी आगे निकल गई, जबकि निजी व्यापारियों की हिस्सेदारी करीब 86 से 87 प्रतिशत तक गिर गई. आंकड़ों से साफ है कि इस साल निजी खरीदारों की कमजोर भागीदारी के कारण सरकारी एजेंसियों को लगभग पूरी गेहूं आवक खुद खरीदनी पड़ी.

मंडियों में गेहूं की आवक हुई कम

पंजाब के कई जिलों में निजी व्यापारियों की खरीद 1000 मीट्रिक टन से भी कम रही. ऐसे हालात में सरकारी एजेंसियों को मंडियों में आने वाली लगभग पूरी गेहूं फसल खरीदनी पड़ी. कई जिलों में सरकारी खरीद  का हिस्सा 98 से 99 प्रतिशत तक पहुंच गया. बरनाला, कपूरथला, पटियाला, रूपनगर, पठानकोट और तरनतारन जैसे जिलों में सरकार ने 100 प्रतिशत गेहूं खरीदा. इस साल की खरीद व्यवस्था से साफ है कि मंडी सिस्टम निजी बाजार की बजाय लगभग पूरी तरह सरकारी समर्थन पर निर्भर रहा. वहीं अब करीब 10 जिलों में रोजाना गेहूं की आवक 2,000 मीट्रिक टन से भी कम रह गई है, जिससे मंडियों की गतिविधियां काफी धीमी पड़ गई.

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Published: 10 May, 2026 | 11:58 AM
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