अब घर में उगेंगे रसीले अंगूर, आसान तरीका जानकर आप भी करेंगे शुरुआत

अंगूर की बेल को अच्छी बढ़वार और फल के लिए भरपूर धूप की जरूरत होती है. रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप मिलने पर पौधा स्वस्थ रहता है. पानी देने में संतुलन रखना बहुत जरूरी है. जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ें सड़ सकती हैं. गर्मी के मौसम में रोज हल्का पानी देना ठीक रहता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 28 Jan, 2026 | 02:34 PM

Gardening Tips: अक्सर लोगों को लगता है कि अंगूर जैसी फसल सिर्फ बड़े खेतों, बागानों या वाइनयार्ड में ही उगाई जा सकती है. लेकिन बदलते समय और शहरी बागवानी के बढ़ते चलन ने यह सोच पूरी तरह बदल दी है. अब आप अपने घर की बालकनी, छत या आंगन में भी गमले में अंगूर उगा सकते हैं. सही तरीका अपनाया जाए, तो गमले में उगी अंगूर की बेल न सिर्फ आपको ताजे और जैविक फल देगी, बल्कि आपके घर की सुंदरता भी बढ़ाएगी.

गमले का सही चुनाव क्यों है जरूरी

अंगूर की बेल की जड़ें गहरी और फैलने वाली होती हैं. इसलिए गमला छोटा नहीं होना चाहिए. अगर गमला छोटा होगा, तो जड़ों को जगह नहीं मिलेगी और पौधा कमजोर रह जाएगा. गमले की गहराई और चौड़ाई कम से कम 15 से 20 इंच होनी चाहिए. ऐसा गमला चुनें जिसमें नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर हों, ताकि अतिरिक्त पानी जमा न हो. मिट्टी के गमले हों या मजबूत प्लास्टिक के, दोनों ही सही रहते हैं, बस जल निकासी अच्छी होनी चाहिए.

मिट्टी की गुणवत्ता से तय होती है पौधे की सेहत

गमले में अंगूर उगाने के लिए हल्की, भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में पानी रुकता नहीं और जड़ों को हवा भी मिलती रहती है. मिट्टी में जैविक खाद, गोबर की सड़ी खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाने से पौधे को जरूरी पोषण मिलता है. इससे बेल तेजी से बढ़ती है और फल आने की संभावना भी बढ़ जाती है.

बीज नहीं, कटिंग से उगाएं अंगूर

अगर आप चाहते हैं कि आपके गमले में अंगूर जल्दी लगें, तो बीज से पौधा उगाने के बजाय कटिंग से तैयार पौधा लगाना बेहतर होता है. कटिंग से उगाया गया पौधा जल्दी जड़ पकड़ता है और आमतौर पर 1 से 2 साल में फल देना शुरू कर देता है. कटिंग लगाने के बाद मिट्टी को हल्का गीला रखें और शुरुआत में पौधे को बहुत तेज धूप से बचाएं, ताकि जड़ें अच्छे से विकसित हो सकें.

धूप और पानी का सही संतुलन

अंगूर की बेल को अच्छी बढ़वार और फल के लिए भरपूर धूप की जरूरत होती है. रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप मिलने पर पौधा स्वस्थ रहता है. पानी देने में संतुलन रखना बहुत जरूरी है. जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ें सड़ सकती हैं. गर्मी के मौसम में रोज हल्का पानी देना ठीक रहता है, जबकि सर्दी और बरसात में मिट्टी देखकर ही सिंचाई करनी चाहिए.

बेल को सहारा देना क्यों जरूरी है

अंगूर की बेल लता वाली होती है, इसलिए उसे चढ़ने के लिए सहारे की जरूरत पड़ती है. इसके लिए गमले के पास लकड़ी या लोहे का मचान या ट्रेलिस लगाना चाहिए. इससे बेल सही दिशा में बढ़ती है और पत्तों व फलों को हवा और धूप मिलती रहती है. समय-समय पर सूखी टहनियों और बेकार पत्तों की छंटाई करते रहने से पौधे की ताकत फल बनाने में लगती है.

खाद और कीटों से प्राकृतिक सुरक्षा

अच्छी फसल के लिए हर 15 से 20 दिन में जैविक खाद देना फायदेमंद रहता है. घर पर बनी खाद, वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद पौधे को धीरे-धीरे पोषण देती है. कीटों और रोगों से बचाव के लिए रासायनिक दवाओं की जगह नीम तेल या जैविक कीटनाशक का इस्तेमाल करें. इससे पौधा सुरक्षित भी रहेगा और फल पूरी तरह जैविक होंगे.

कब मिलेंगे गमले में उगे अंगूर

गमले में लगाए गए अंगूर के पौधे पहले साल अपनी जड़ें और बेल मजबूत करते हैं. दूसरे साल से फूल और छोटे फल दिखने लगते हैं. अगर सही देखभाल की जाए, तो 2 से 3 साल में अच्छी मात्रा में अंगूर मिलने लगते हैं. एक बार बेल पूरी तरह तैयार हो जाए, तो हर साल आपको अपने घर में उगे ताजे और रसीले अंगूर खाने को मिल सकते हैं.

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