खाने के तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता, आयात बिल 87 हजार करोड़ रुपये पार… पाम ऑयल की मांग बढ़ी
Vegetable oil imports: भारत में खाने के तेल की मांग बहुत ज्यादा है. पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है. लेकिन देश में तिलहन उत्पादन अभी भी जरूरत के हिसाब से कम है. इसी वजह से भारत को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है.
Vegetable oil imports: देश में खाने के तेल की कीमतें लगातार लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं. रसोई का खर्च पहले से ही बढ़ा हुआ है और अब खाद्य तेल की महंगाई ने आम परिवारों का बजट और बिगाड़ दिया है. इसी बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है कि भारत में इस साल खाद्य तेल आयात में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है.
SEA की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 ऑयल ईयर के पहले छह महीनों यानी नवंबर से अप्रैल के बीच भारत ने करीब 79.4 लाख टन वनस्पति तेल आयात किया. यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 13 प्रतिशत ज्यादा है. पिछले साल इसी अवधि में देश ने करीब 70.4 लाख टन खाद्य तेल विदेशों से मंगाया था.
भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातकों में शामिल है. देश में खाने के तेल की खपत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन अभी भी जरूरत के मुकाबले काफी कम है. यही वजह है कि भारत को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदना पड़ता है.
पाम ऑयल की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी
इस बार सबसे ज्यादा बढ़ोतरी पाम ऑयल की खरीद में देखने को मिली है. रिपोर्ट के अनुसार नवंबर से अप्रैल के बीच भारत ने लगभग 39.7 लाख टन पाम ऑयल आयात किया, जबकि पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा करीब 27.4 लाख टन था. यानी एक साल में पाम ऑयल आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों की वजह से कंपनियां और उपभोक्ता पाम ऑयल की तरफ ज्यादा रुख कर रहे हैं.
भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल खरीदता है. इन दोनों देशों को दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक माना जाता है.
सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की खरीद घटी
जहां पाम ऑयल आयात तेजी से बढ़ा है, वहीं सोयाबीन और सूरजमुखी तेल जैसे सॉफ्ट ऑयल की खरीद में गिरावट देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक इन तेलों का कुल आयात घटकर करीब 38.5 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल यह करीब 41.3 लाख टन था.
भारत के लिए सोयाबीन तेल का सबसे बड़ा सप्लायर अर्जेंटीना है. इसके अलावा ब्राजील भी भारत को बड़ी मात्रा में सोयाबीन तेल भेजता है. वहीं सूरजमुखी तेल मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन से आता है. विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतें और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां भी खरीद के पैटर्न को प्रभावित कर रही हैं.
आयात बिल में भी बड़ा इजाफा
सिर्फ आयात मात्रा ही नहीं बढ़ी, बल्कि इसके लिए खर्च होने वाला पैसा भी काफी बढ़ गया है. नवंबर से अप्रैल के बीच भारत का खाद्य तेल आयात बिल करीब 87 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 73 हजार करोड़ रुपये था. यानी एक साल में आयात खर्च में लगभग 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा असर बाजार कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है.
खाने के तेल की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
पिछले एक साल में खाने के तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक पाम ऑयल की कीमतें अप्रैल 2025 की तुलना में 14 से 15 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं. वहीं सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की कीमतों में 17 से 22 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अब इसका असर हर घर की रसोई तक पहुंच चुका है. कई शहरों में लोग खाने के तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं. घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है.
रुपये की कमजोरी भी बनी बड़ी वजह
खाद्य तेल आयात महंगा होने की एक बड़ी वजह भारतीय रुपये की कमजोरी भी है. पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 9.2 प्रतिशत कमजोर हुआ है. जब डॉलर मजबूत होता है तो विदेशों से सामान खरीदना महंगा हो जाता है. यही कारण है कि खाद्य तेल आयात की लागत भी तेजी से बढ़ी है. SEA ने इसे आयातकों और रिफाइनरी कंपनियों के लिए चिंता का बड़ा कारण बताया है.
नेपाल से भी आया रिफाइंड तेल
रिपोर्ट के अनुसार नेपाल ने भी इस साल भारत को बड़ी मात्रा में रिफाइंड खाद्य तेल निर्यात किया है. नवंबर से अप्रैल के बीच नेपाल से करीब 2.17 लाख टन रिफाइंड तेल भारत पहुंचा. इसमें मुख्य रूप से रिफाइंड सोयाबीन तेल शामिल था. इसके अलावा थोड़ी मात्रा में सूरजमुखी तेल, RBD पामोलीन और रेपसीड ऑयल भी आया.
बढ़ते स्टॉक से मिल सकती है राहत
महंगाई और बढ़ती कीमतों के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है. मई 2026 तक भारत में कुल खाद्य तेल स्टॉक बढ़कर 21.2 लाख टन तक पहुंच गया है. पिछले साल मई में यह आंकड़ा 13.5 लाख टन था. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्टॉक इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले महीनों में सप्लाई बेहतर हो सकती है और कीमतों में कुछ स्थिरता देखने को मिल सकती है.
भारत क्यों है आयात पर इतना निर्भर?
भारत में खाने के तेल की मांग बहुत ज्यादा है. पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है. लेकिन देश में तिलहन उत्पादन अभी भी जरूरत के हिसाब से कम है. इसी वजह से भारत को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है.