मध्य प्रदेश के 7 लाख किसानों के खाते में पहुंचे 9 हजार करोड़ रुपये, धान खरीद का नया रिकॉर्ड बना
मध्य प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार इस साल धान खरीदी अभियान बहुत सफल रहा है. तय समय सीमा में लक्ष्य से अधिक धान की खरीद की गई है. सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 के लिए 46 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था, जिससे 8 लाख मीट्रिक टन ज्यादा धान की खरीद की गई है.
मध्य प्रदेश में चावल की कमी नहीं होने वाली है और कीमतें भी स्थिर रहने वाली हैं. इसकी वजह है टारगेट से अधिक धान खरीद पूरी होना. राज्य सरकार ने सरकारी खरीद केंद्रों के जरिए अंतिम तिथि 20 जनवरी तक पिछले साल की तुलना में 8 लाख मीट्रिक टन अधिक धान की खरीद की है, जो धान खरीद का नया रिकॉर्ड है. वहीं, राज्य के 7 लाख से अधिक किसानों के खाते में धान खरीद के भुगतान के रूप में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि ट्रांसफर कर दी गई है. मंडियों और खरीद केंद्रों पर पहुंची किसानों की उपज का 84 फीसदी के करीब उठान भी हो चुका है.
मध्य प्रदेश में खरीद टारगेट के पार पहुंची धान खरीद
मध्य प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार इस साल धान खरीदी अभियान बहुत सफल रहा है. तय समय सीमा में लक्ष्य से अधिक धान की खरीद की गई है. मध्य प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन 2025-26 के लिए 46 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था. सरकारी खरीद केंद्रों पर इस बार किसानों ने अपनी उपज को जमकर बेचा है और यही वजह है कि इस बार खरीद की अंतिम तिथि 20 जनवरी तक 51.75 लाख मीट्रिक टन धान खरीद की गई है. जो तय टारगेट से जहां 5 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है तो वहीं बीते साल में हुई खरीद से 8 लाख मीट्रिक टन अधिक है.
7 लाख से अधिक किसानों के खाते में भेजे गए 9485 करोड़ रुपये
मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि 20 जनवरी तक इस साल धान की खरीदी 51 लाख 75 हजार मीट्रिक टन हो गई है, जो बीते साल से 8 लाख 22 हजार टन अधिक है. इस खरीद से 7 लाख 62 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिला. किसानों को अब तक 9485 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया जा चुका है. जिन किसानों का धान का पेमेंट बाकी रहा है उनकी भी राशि धान उठान पूरा होते ही ट्रांसफर कर दी जाएगी.
1436 केंद्रों पर खरीदी गई 84 फीसदी धान का उठान पूरा
मध्य प्रदेश में किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपये प्रति क्विंटल पर उपज बिक्री के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था. राज्य आंकड़ों के अनुसार 8 लाख से अधिक किसानों ने अपनी उपज बिक्री करने की इच्छा जताते हुए पंजीकरण कराए थे. धान खरीद के लिए किसानों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सितंबर 2025 में शुरू की गई थी. इस साल 1436 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी पूरी की गई. खरीदी गई 84 फीसदी धान की मात्रा का सफलतापूर्वक उठान हो चुका है. बता दें कि धान खरीद के बाद उठान जितनी जल्दी होता है उतनी जल्दी किसानों को भुगतान मिलता है. क्योंकि, जो मिलर्स धान का उठान करते हैं वे भुगतान सरकार को करते हैं और फिर सरकार वह पेमेंट किसानों के खातों में भेजती है.