किसानों को राहत, सरकार ने बढ़ाया प्याज का खरीद रेट.. 24.4 फीसदी की बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीद मूल्य 24.4 फीसदी बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलो कर दिया है. वहीं, दालों का सरकारी बफर स्टॉक रिकॉर्ड 43 लाख टन पर पहुंच गया है. घरेलू उत्पादन बढ़ने से दाल आयात में कमी आई है, जबकि चना आयात में 51 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

नोएडा | Updated On: 2 Jun, 2026 | 01:19 PM

Onion Mandi Rate: केंद्र सरकार ने किसानों को बेहतर दाम दिलाने और बाजार की स्थिति को देखते हुए बफर स्टॉक के लिए प्याज खरीद का मूल्य बढ़ा दिया है. सरकार ने प्याज का खरीद मूल्य 12.70 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलो कर दिया है, जो करीब 24.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. सरकार को उम्मीद है कि इसके इस फैसले से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर रेट मिलेगा. इससे उनकी अच्छी कमाई होगी.

द इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि चालू सीजन के लिए प्याज की सरकारी खरीद 15 मई से शुरू हो चुकी है, जबकि संशोधित खरीद मूल्य  22 मई को अधिसूचित किया गया था. सरकार का मानना है कि इस फैसले से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और बाजार में कीमतों को संतुलित रखने में भी मदद मिलेगी.

2 लाख टन प्याज खरीदी का है लक्ष्य

सरकार हर साल बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के तहत प्याज का बफर स्टॉक  तैयार करती है. इस साल सरकार ने 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है, जबकि 2025-26 में 3 लाख टन प्याज खरीदा गया था. उन्होंने कहा कि वहीं, दालों के मामले में सरकारी बफर स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. मई 2026 में दालों का बफर स्टॉक बढ़कर 43 लाख टन हो गया, जो मई 2025 के 18 लाख टन और मई 2024 के 21 लाख टन के मुकाबले काफी अधिक है.

20.35 लाख टन चना की खरीद

सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत, जब मंडियों में दालों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चले जाते हैं, तब सरकारी खरीद शुरू की जाती है. इस योजना के तहत अब तक 5.34 लाख टन अरहर (तूर) और 20.35 लाख टन चना की खरीद की जा चुकी है. देश में दालों के उत्पादन में बढ़ोतरी का असर आयात पर भी दिख रहा है. 2025-26 में दालों का आयात घटकर 60 लाख टन रह गया, जो पिछले वर्ष 73 लाख टन था. यानी आयात में करीब 30 प्रतिशत की कमी आई है.

चना आयात में बड़ी गिरावट

अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा कि खासकर चना आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. 2024-25 के 15.06 लाख टन की तुलना में चना आयात 51 प्रतिशत घट गया, जबकि दालों के लिए शुल्क-मुक्त आयात नीति अभी भी लागू है. पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए आयोजित अंतर-मंत्रालयी बैठक में खाद्य और उर्वरक सुरक्षा की स्थिति की भी समीक्षा की गई. खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा कि भारत को दालों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देश- म्यांमार, तंजानिया, मलावी, मोजाम्बिक, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील पश्चिम एशिया के तनाव से सीधे प्रभावित नहीं हैं. इसलिए दालों की आपूर्ति पर किसी बड़े जोखिम की आशंका फिलहाल नहीं है.

Published: 2 Jun, 2026 | 12:59 PM

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