अचानक महंगा हुआ धान, 42 रुपये किलो रेट.. इन किस्मों की ज्यादा बढ़ी कीमत

तमिलनाडु के मदुरै में धान की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. अक्षय पोंनी 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है जबकि RNR और श्री किस्म 37-38 रुपये में बिक रही हैं. कम आवक, सांबा सीजन समाप्ति और कर्नाटक से आपूर्ति बाधित होने के कारण दाम बढ़े हैं, जिससे प्रीमियम चावल भी 70 रुपये तक पहुंच गया है.

नोएडा | Updated On: 23 Jun, 2026 | 04:28 PM

Paddy Price Hike: तमिलनाडु के मदुरै में धान की प्रमुख किस्मों के दामों में तेजी देखी जा रही है. सांबा और लेट सांबा खेती सीजन के खत्म होने के बाद बाजार में आवक कम होने से कीमतें बढ़ गई हैं. सबसे ज्यादा मांग वाली अक्षय पोंनी धान अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 37 से 42 रुपये प्रति किलो बिक रही है. वहीं RNR और श्री किस्म की कीमतें भी बढ़कर लगभग 37 से 38 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं.

जानकारों के अनुसार, बाजार में धान की आवक कम होने के कारण कीमतें बढ़ी हैं. अब खुले बाजार में धान की बिक्री अंतिम चरण में पहुंच गई है और सौदे धीरे-धीरे हो रहे हैं. इसी बीच, अच्छी और प्रीमियम किस्म के चावल की कीमतें भी बढ़कर खुदरा बाजार में 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जिसका कारण मांग और आपूर्ति में असंतुलन बताया जा रहा है.

इस वजह से आई कीमतों में उछाल

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्षय और श्री जैसी धान की किस्मों की मांग  बढ़ने के कारण उनके दामों में तेज उछाल देखा गया है. मिल मालिक और पूर्व मदुरै राइस मिल ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पी. किशोर के अनुसार, बाजार में धान की कमी इस कीमत बढ़ोतरी की मुख्य वजह है. उन्होंने कहा कि धान की उपलब्धता काफी घट गई है, जिससे कीमतें सामान्य समय की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं. इसके साथ ही धान से बनने वाले उप-उत्पाद जैसे भूसी (husk) और चोकर (bran) की कीमतों में भी लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे ईंधन की कीमतों का असर कुछ हद तक कम हुआ है. उनका कहना है कि सबसे बड़ी समस्या कच्चे माल यानी धान की उपलब्धता की है.

कर्नाटक से होती है धान की आपूर्ति

वहीं, मदुरै के फूड पैनल चेयरपर्सन ए. अंबारासन ने कहा कि तमिलनाडु अभी भी अच्छी किस्म के धान के लिए अन्य राज्यों, खासकर कर्नाटक पर निर्भर है. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य अभी तक प्रीमियम क्वालिटी धान  के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बन पाया है. जानकारों के अनुसार, तमिलनाडु की लगभग 70 प्रतिशत धान की जरूरत कर्नाटक से पूरी होती है. कर्नाटक में कम बारिश और तुंगभद्रा डैम क्षेत्र में चल रहे कामों की वजह से धान की खेती प्रभावित हुई है. इसके कारण बाजार में मांग बढ़ गई है और उपलब्धता कम हो गई है.

अक्षय पोंनी धान की कीमत 42 रुपये किलो

इस वजह से अक्षय पोंनी धान की कीमत 36 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो हाल के वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में बारिश अच्छी होती है तो स्थिति में सुधार आ सकता है. इसी बीच, एग्री एंड ऑल-ट्रेड चैंबर के के. सुरेश कुमार ने कहा कि तमिलनाडु के किसान ज्यादातर मोटी किस्म की धान उगाते हैं, इसलिए राज्य को अच्छी (fine) किस्मों के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है.

चैंबर ने पहले किसानों के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाए थे ताकि वे अक्षय जैसी ज्यादा मांग वाली धान की किस्मों की खेती करें. कई किसानों ने चैंबर की 22,000 टन क्षमता वाली स्टोरेज सुविधा का उपयोग कर ताजा काटी गई अक्षय धान को सुरक्षित रखा है. चैंबर ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह किसानों को इन उच्च मांग वाली किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित  करे, बजाय पारंपरिक मोटी किस्मों के. उनका कहना है कि ऐसे कदमों से दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी और धान की आपूर्ति व कीमतें अधिक स्थिर रह सकेंगी.

Published: 23 Jun, 2026 | 05:28 PM

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